Lok Sabha Election: लोक जनशक्ति पार्टी (लोजपा) के सांसद महबूब अली कैसर रविवार को राष्ट्रीय जनता दल (राजद) में शामिल हो गए। वह बिहार में, भाजपा नीत राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) से पिछले लोकसभा चुनाव में जीत हासिल करने वाले एकमात्र मुस्लिम उम्मीदवार थे। कैसर, लोजपा में टूट के समय पूर्व केंद्रीय मंत्री पशुपति कुमार पारस के गुट में शामिल हो गए थे।
जानें कौन हैं चौधरी महबूब अली कैसर
चौधरी महबूब अली कैसर आखिर कौन हैं, जिन्होंने चिराग पासवान को गच्चा देकर तेजस्वी यादव को अपना रहनुमा चुन लिया। उनके RJD में शामिल होने से NDA और चिराग पासवान की टेंशन में इजाफा हो गया है। बता दें, चौधरी महबूब अली कैसर खगड़िया के मौजूदा सांसद हैं। जब चिराग के चाचा ने पार्टी तोड़ी थी तो वो उनके साथ चले गए थे, बाद में वो लोजपा (पारस गुट) से चिराग पासवान की पार्टी में शामिल हो गए थे।
टिकट नहीं मिला तो फिर कर दिया बगावत
महबूब अली कैसर को उम्मीद थी कि इस बार भी चिराग पासवान उन पर भरोसा जताएंगे, क्योंकि पिछले दो बार से वो खगड़िया से सांसद चुने जा रहे हैं। हालांकि चिराग ने उनका ट्रैक रिकॉर्ड देखते हुए टिकट नहीं दिया। लोजपा (र) अध्यक्ष चिराग पासवान ने इस सीट से भागलपुर के व्यापारी राजेश वर्मा को टिकट दे दिया। इसी के बाद से चौधरी महबूब अली कैसर उनसे नाराज हो गए और उन्होंने राजद में जाने का फैसला लिया।
तेजस्वी यादव ने NDA को कर दिया कमजोर
इस बार, मेल-मिलाप की कोशिशों के बावजूद चिराग पासवान ने कैसर को टिकट देने से इनकार कर दिया, जिसके बाद वह (कैसर) राजद के नेता तेजस्वी यादव की मौजूदगी में उनकी पार्टी में शामिल हो गए। तेजस्वी ने कहा, 'कैसर साहब, पार्टी अध्यक्ष लालू प्रसाद जी के साथ मुलाकात के बाद हमारे साथ जुड़ रहे हैं। उनके अनुभव से हम लाभान्वित होंगे। यह एक ऐसा घटनाक्रम है जिससे संविधान को मौजूदा शासन से उत्पन्न खतरे के खिलाफ हमारी लड़ाई के समर्थन में लोगों के बीच एक मजबूत संदेश जाएगा।'
कांग्रेस के साथ शुरू किया था राजनीतिक करियर
सहरसा जिले के सिमरी बख्तियारपुर की पूर्ववर्ती रियासत पर शासन करने वाले परिवार में जन्मे कैसर ने कांग्रेस के साथ अपना राजनीतिक करियर शुरू किया और 2013 तक पार्टी की राज्य इकाई का नेतृत्व किया। वह 2014 में लोजपा में शामिल हुए और खगड़िया सीट जीती, जिसे उन्होंने पांच साल बाद भी बरकरार रखा। तत्कालीन लोजपा अध्यक्ष चिराग पासवान के साथ उनके संबंधों में खटास तब आई, जब पार्टी ने 2020 के बिहार विधानसभा चुनाव में उनके बेटे यूसुफ सलाहुद्दीन को टिकट देने से इनकार कर दिया। सलाहुद्दीन ने राजद के टिकट पर सिमरी बख्तियारपुर सीट से चुनाव लड़ा और जीत हासिल की।
हालांकि, अभी यह स्पष्ट नहीं हो सका है कि राजद, जिसने 23 लोकसभा सीट में से एक को छोड़कर सभी के लिए उम्मीदवारों की घोषणा की है, कैसर को चुनाव मैदान में उतारेगी या नहीं।
