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West Bengal Assembly Election 2026: राहुल गांधी का कोलकाता दौरा रद्द, अनुमति विवाद पर गरमाई सियासत; कांग्रेस ने प्रशासन पर लगाए आरोप

कांग्रेस नेता राहुल गांधी का 23 अप्रैल को कोलकाता में प्रस्तावित चुनावी दौरा रद्द हो गया है, जिससे सियासी हलचल तेज हो गई है। पार्टी ने आरोप लगाया है कि प्रशासनिक अनुमति न मिलने के कारण कार्यक्रम आयोजित नहीं किया जा सका।

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राहुल गांधी का कोलकाता दौरा रद्द (फोटो: पीटीआई)

Photo : PTI

West Bengal Assembly Election 2026: पश्चिम बंगाल में चुनावी सरगर्मी के बीच कांग्रेस नेता राहुल गांधी की 23 अप्रैल को कोलकाता में प्रस्तावित चुनावी यात्रा रद्द हो गई है। पार्टी का आरोप है कि राज्य सरकार के इशारे पर स्थानीय प्रशासन, खासकर पुलिस ने कार्यक्रम के लिए अनुमति नहीं दी। कांग्रेस सूत्रों के अनुसार, शाम 6 बजे तक अनुमति का इंतजार किया गया, लेकिन मंजूरी न मिलने के कारण कार्यक्रम की तैयारियां संभव नहीं रहीं। हालांकि राहुल गांधी इस दौरे के लिए इच्छुक हैं, इसलिए अब 25 या 26 अप्रैल के लिए नई अनुमति मांगी जाएगी।

"आवेदन 2 से 7 दिन पहले देना होता है"

वहीं, ममता सरकार की मंत्री शशि पांजा ने इस मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि किसी भी सार्वजनिक सभा के लिए आवेदन ‘सुविधा पोर्टल’ के माध्यम से करना अनिवार्य है और यह आवेदन 2 से 7 दिन पहले देना होता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह नियम सभी राजनीतिक दलों पर समान रूप से लागू होता है। साथ ही उन्होंने कहा कि राज्य में फिलहाल कार्यवाहक सरकार है, ऐसे में इस रद्दीकरण को लेकर जवाब चुनाव आयोग ही दे सकता है। गौरतलब है कि, 23 अप्रैल को राज्य में विधानसभा चुनाव (Assembly Elections 2026) के तहत पहले फेज की वोटिंग होनी है।

कांग्रेस ने लगाया पीएम मोदी पर महिला आरक्षण में देरी का आरोप

वहीं, कांग्रेस ने सोनिया गांधी और राहुल गांधी द्वारा कुछ साल पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लिखे गए पत्रों का हवाला देते हुए मंगलवार को आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री महिला आरक्षण को परिसीमन से जोड़कर इसके कार्यान्वयन में देरी करना चाहते हैं। कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने कहा कि कांग्रेस अध्यक्ष के रूप में राहुल गांधी ने 16 जुलाई, 2018 को प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर महिला आरक्षण को तत्काल लागू करने की मांग की थी। रमेश ने एक्स पर पोस्ट किया, "आठ साल बाद, प्रधानमंत्री इसे परिसीमन से जोड़कर आरक्षण के कार्यान्वयन में देरी करना चाहते हैं। अभी भी इस मांग पर कदम नहीं उठा रहे हैं।" उन्होंने राहुल गांधी के जिस पत्र का हवाला दिया, उसमें राहुल गांधी ने 2018 में संसद के मानसून सत्र में महिला आरक्षण विधेयक को पारित कराने के लिए समर्थन का अनुरोध किया था।

पत्र में गांधी ने कहा था, "प्रधानमंत्री महोदय, अपनी कई सार्वजनिक सभाओं में आपने महिलाओं को सशक्त बनाने और उन्हें सार्वजनिक जीवन में अधिक सार्थक रूप से शामिल करने के अपने जुनून के बारे में बात की है। महिला आरक्षण विधेयक को पारित करने के लिए बिना शर्त समर्थन देने की पेशकश से बेहतर महिलाओं के हितों के प्रति अपनी प्रतिबद्धता प्रदर्शित करने का इससे बेहतर तरीका क्या हो सकता है? और संसद के आगामी सत्र से बेहतर समय क्या हो सकता है? किसी भी तरह की देरी से इसे अगले आम चुनाव से पहले लागू करना असंभव हो जाएगा।" उन्होंने यह भी कहा था, "हमारी महिलाओं को सशक्त बनाने के मुद्दे पर, आइए दलगत राजनीति से ऊपर उठकर एक साथ खड़े हों और भारत को संदेश दें कि हमारा मानना है कि बदलाव का समय आ गया है। महिलाओं को हमारे राज्य विधानसभाओं और संसद में अपना उचित स्थान लेना चाहिए, जहां वर्तमान में उनका प्रतिनिधित्व बहुत कम है।"

रमेश ने 2017 में तत्कालीन कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी द्वारा प्रधानमंत्री मोदी लिखे गए पत्र का हवाला देते हुए कहा, "कांग्रेस पार्टी का रुख अडिग और अपरिवर्तित रहा है। यह मोदी सरकार है जो इस मांग पर सोई रही और फिर इसे परिसीमन से जोड़कर इसमें देरी करने की कोशिश की है।" कांग्रेस ने सोमवार को कहा था कि महिलाओं के लिए आरक्षण की आड़ में मोदी सरकार द्वारा उठाए गए परिसीमन के कदम को नाकाम करना "बुलडोजर राजनीति" की हार थी और केंद्र का एजेंडा महिला आरक्षण नहीं बल्कि प्रधानमंत्री मोदी का "संरक्षण" है।

(भाषा इनपुट के साथ)

Nilesh DwivedI
निलेश द्विवेदी author

निलेश द्विवेदी टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल की सिटी टीम में काम कर रहे हैं। वे शहरों से जुड़ी लोकल घटनाएं, क्राइम, राजनीति, इंफ्रास्ट्रक्चर और राज्यवार अप... और देखें

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