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मोदी और शाह के 'घर' में BJP को 2017 में मिली थी हार,जानें इस बार क्या है समीकरण

  • Authored by: प्रशांत श्रीवास्तव
  • Updated Nov 16, 2022, 04:01 PM IST

Gujarat Assembly Election 2022: साल 2017 में ऊंझा सीट से भाजपा प्रत्याशी की हार, पार्टी के लिए बड़ा झटका थी। इस सीट पर साल 1995 से भाजपा का कब्जा था। लेकिन 2017 के चुनावों में कांग्रेस की आशा पटेल ने भाजपा प्रत्याशी पटेल नारायणभाई लल्लूदास को हरा दिया था। ऐसे भाजपा मानसा सीट भी हार गई थी।

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गुजरात चुनाव में भाजपा के लिए ये 2 सीटें बेहद अहम

Photo : Twitter
KEY HIGHLIGHTS
  • पीएम मोदी का गांव ऊंझा विधानसभा सीट में आता है।
  • गृह मंत्री अमित शाह का गांव मानसा विधानसभा सीट में आता है।
  • भाजपा के लिए ऊंझा और मानसा सीट प्रतिष्ठा का विषय हैं।

Gujarat Assembly Election 2022: गुजरात विधानसभा चुनावों की रणभेरी बज चुकी है। और भाजपा (BJP) अपने 27 साल के रिकॉर्ड को बरकार रखने की जी तोड़ कोशिश रही है। करीब तीन दशकों से गुजरात में एक छत्र राज करने वाली भाजपा को, 2017 में एक बड़ा झटका लगा था। उस साल भाजपा भले ही फिर से सत्ता में वापसी कर गई थी, लेकिन उसे उन दो सीटों पर हार का सामना करना पड़ा था। जिसे भाजपा कभी हारना नहीं चाहती है। असल में पिछले चुनाव में भाजपा ऊंझा (Unjha) और मनसा (Mansa) सीट हार गई थी। ऊंझा सीट के तहत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का (Narendra Modi) गांव वडनगर आता है, वहीं अमित शाह (Amit Shah) का गांव मानसा, मानसा विधानसभा क्षेत्र का हिस्सा है। ऐसे में भाजपा के लिए इन दोनों सीटों पर इस बार जीत प्रतिष्ठा का सवाल है।

उंझा सीट से 2017 में टूटा था भाजपा का आधिपत्य

साल 2017 में ऊंझा सीट से भाजपा प्रत्याशी की हार, पार्टी के लिए बड़ा झटका थी। इस सीट पर साल 1995 से भाजपा का कब्जा था। लेकिन 2017 के चुनावों में कांग्रेस की आशा पटेल ने भाजपा प्रत्याशी पटेल नारायणभाई लल्लूदास को हरा दिया था। हालांकि 2 साल बाद ही आशा पटेल भाजपा में शामिल हो गई थी। और 2019 के उप चुनाव में भाजपा ने यह सीट फिर से अपने नाम कर ली थी। उंझा विधानसभा के पाटीदार समुदाय का प्रभाव है। और 2017 के चुनावों के पहले पाटीदार आंदोलन का असर इस सीट पर दिखा था। इस बार कोई कसर नहीं रहे इस बार भाजपा ने कीर्तिभाई केशवलाल पटेल को टिकट दिया है।

मानसा में दो बार से जीत रही है कांग्रेस

साल 2017 के चुनावों में इस सीट पर कांग्रेस के सुरेश कुमार पटेल ने भाजपा के अमित भाई चौधरी को हराया था। लेकिन दोनों के बीच वोटों की लड़ाई इतनी रोचक थी, कि उम्मीदवारों की सांसे अटक गई थी। कांग्रेस यहां केवल 524 वोटों से जीत पाई थी। इसके पहले 2012 में अमित भाई चौधरी कांग्रेस के टिकट जबकि उसके पहले के तीन विधानसभा चुनावों में भाजपा ने जीत हासिल की थी। यहां पर ठाकोर वोटर चुनावों में काफी निर्णायक भूमिका निभाते हैं। इस बार कांग्रेस ने मोहन सिंह ठाकोर को और भाजपा ने जयंती भाई पटेल को मैदान में उतारा है।

प्रशांत श्रीवास्तव
प्रशांत श्रीवास्तवauthor

करीब 17 साल से पत्रकारिता जगत से जुड़ा हुआ हूं। और इस दौरान मीडिया की सभी विधाओं यानी टेलीविजन, प्रिंट, मैगजीन, डिजिटल और बिजनेस पत्रकारिता में काम करने का मौका मिला। इस समय Timesnowhindi.com में टीम लीड के रुप में बिजनेस, ऑटो, यूटीलिटी, टेक सेक्शन में अपना योगदान दे रहा हूं। करियर का पहला ब्रेक हैदराबाद स्थित मीडिया संस्थान ईटीवी से टेलीविजन के जरिए हुआ। यहां पर टेलीविजन पत्रकारिता की बारीकियों को समझने का मौका मिला। और उसके बाद अगला पड़ाव दिल्ली स्थित दैनिक भास्कर समूह का बिजनेस भास्कर रहा। यहां से बिजनेस पत्रकारिता में कदम रखा। और यह सफर वित्त मंत्रालय की रिपोर्टिंग से लेकर बैंकिंग, इंश्योरेंस, ऑटो, एफएमसीजी, एमएमएमई, टेलीकॉम सेक्टर की ग्राउंड रिपोर्ट से लेकर कॉरपोरेट जगत की खबरें और इकोनॉमी से जुड़ी खबरों से गुजरते हुए अमर उजाला, मनी भास्कर वेबसाइट से होकर आउटलुक मैगजीन पहुंचा। यहां पर पॉलिटिकल खबरों को करने का मौका मिला। आउटलुक में रहते हुए भाजपा और कांग्रेस पार्टी को भी कवर किया। इस दौरान दिल्ली दंगों पर ग्राउंड रिपोर्ट से लेकर सीएए आंदोलन, किसान आंदोलन और कृषि जगत, वाइल्ड लाइफ से जुड़ी ग्राउंड रिपोर्ट भी करने का मौका मिला। करियर के इस सफर में 2014 लोक सभा चुनाव, 2019 लोक सभा चुनाव, इसके अलावा उत्तर प्रदेश विधान सभा चुनाव, राजस्थान विधान सभा, मध्य प्रदेश विधान सभा चुनाव की ग्राउंड रिपोर्ट भी की। पिछले 16 साल से केंद्रीय बजट की बारीकियों को समझकर उसे आम भाषा में लोगों तक पहुंचाने का भी प्रयास किया है। 17 साल के करियर में करीब 10 साल डिजिटल मीडिया का अनुभव रहा है। पिछले 3 साल से टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहा हूं। पत्रकारिता का ककहरा माखन लाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय भोपाल से सीखा है।

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