इलेक्शन

'वायनाड से दो सांसद होंगे...' आखिर राहुल गांधी ने क्यों कह दी ये बात?

Wayanad By-Election: राहुल गांधी ने कहा है कि वायनाड से दो सांसद होंगे, मैं अनाधिकारिक सांसद रहूंगा। कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा ने बुधवार को वायनाड लोकसभा सीट पर होने वाले उपचुनाव के लिए नामांकन पत्र दाखिल कर दिया। वे पहली बार कोई चुनाव लड़ रही हैं। इसी मौके पर राहुल ने ये दावा किया है।

Image

वायनाड सीट से नामांकन दाखिल करते हुए प्रियंका गांधी वाड्रा।

Rahul Gandhi on Wanayad Seat: केरल की वायनाड लोकसभा सीट से उपचुनाव में उतरीं प्रियंका गांधी वाड्रा के लिए प्रचार करने राहुल गांधी पहुंचे। वायनाड में प्रचार के दौरान वायनाड से पूर्व लोकसभा सांसद राहुल गांधी ने बुधवार को कहा कि अब से वायनाड के पास दो सांसद होंगे। राहुल गांधी ने कहा, 'प्रियंका गांधी आधिकारिक सांसद होंगी, जबकि मैं अनाधिकारिक सांसद रहूंगा।'

प्रियंका गांधी के साथ रोड शो में शामिल होने पहुंचे राहुल

कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने आम चुनाव में कर्नाटक की वायनाड और उत्तर प्रदेश की रायबरेली लोकसभा सीट पर जीत दर्ज की थी। इसके बाद राहुल गांधी ने रायबरेली सीट से सांसद बने रहने का फैसला किया था। इसके बाद वायनाड सीट रिक्त हो गई। इस सीट पर 13 नवंबर को उपचुनाव होगा। राहुल गांधी बुधवार सुबह अपनी बहन प्रियंका गांधी के साथ एक विशाल रोड शो में शामिल होने के लिए वायनाड पहुंचे थे। प्रियंका गांधी वाड्रा ने वायनाड लोकसभा क्षेत्र से पर्चा भर दिया है।

'देश का एकमात्र ऐसा निर्वाचन क्षेत्र, जहां होंगे दो सांसद'

संयोगवश, जब राहुल और प्रियंका गांधी चुनावी रैली को संबोधित कर रही थीं, तब उनकी मां और पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी भी मौजूद थीं। प्रियंका गांधी के संबोधन के बाद चुनावी रैली को राहुल गांधी ने संबोधित किया। राहुल गांधी ने कहा, 'मुझे लगता है कि आप सभी वायनाड के साथ मेरे रिश्ते को अच्छी तरह समझते हैं। मैं खुद से सोच रहा था कि वायनाड ने मेरे लिए जो किया है, उसे शब्दों में बयां नहीं किया जा सकता।'

उन्होंने कहा, 'वायनाड देश का एकमात्र ऐसा निर्वाचन क्षेत्र है, जहां दो लोकसभा सदस्य होंगे, एक आधिकारिक और दूसरा अनाधिकारिक। वे दोनों वायनाड के लोगों के लिए मिलकर काम करेंगे।'

राहुल गांधी ने अपनी बहन के बारे में बात करते हुए कहा, 'जब हम छोटे थे, तो मैं प्रियंका को उसके दोस्तों के साथ देखा करता था। वह हमेशा उनकी बहुत मदद करती थी। मैं उससे कहता था, 'तुम अपने दोस्तों की मदद करने के लिए इस हद तक नहीं जा सकती।'

'अपने परिवार के लिए बलिदान देने को तैयार है मेरी बहन'

राहुल गांधी ने कहा, 'अगर उसका कोई दोस्त होता तो वह उसके लिए कुछ भी करने को तैयार रहती थी। कभी-कभी उसके दोस्त उसके काम की सराहना नहीं करते थे। मैं उसे इस बारे में बताता था। वह कहती थी कि 'अगर वे सराहना नहीं करते तो कोई बात नहीं' और वह वही करती थी जो उसे सही लगता था। अब आप इसी से समझ लीजिए जब वह अपने दोस्तों के लिए इतना कर सकती हैं तो फिर अपने परिवार का किस तरह ख्याल रखेंगी। जब मेरे पिता का निधन हुआ, तो वह ही थी जिसने हमारी मां की देखभाल की। उस समय वह केवल 17 साल की थी।'

राहुल गांधी ने कहा, 'मुझे पूरा भरोसा है कि मेरी बहन अपने परिवार के लिए बलिदान देने को तैयार है। वह आप सभी का बहुत ख्याल रखने वाली हैं। वह अपनी ऊर्जा वायनाड के लोगों और आपकी समस्याओं के लिए लगाएगी। वायनाड उनका परिवार है और वह अपने परिवार का बहुत ख्याल रखेंगी।'

Ayush Sinha
आयुष सिन्हाauthor

मैं टाइम्स नाउ नवभारत (Timesnowhindi.com) से जुड़ा हुआ हूं। कलम और कागज से लगाव तो बचपन से ही था, जो धीरे-धीरे आदत और जरूरत बन गई। मुख्य धारा की पत्रकारिता से जुड़े हुए 10 साल पूरे हो चुके हैं। लोकसभा चुनाव 2014 से पहले ही मैंने पत्रकारिता की पढ़ाई के बीच में ही देश की राजधानी दिल्ली आने की ठान ली थी। उससे पहले मैंने कभी ये सोचा तक नहीं था कि मैं बनारस बोले तो वाराणसी शहर से बाहर भी जा सकता हूं। जी हां, मेरा नाता काशी से है। जन्म के साथ-साथ शिक्षा दीक्षा भी बनारस में ही हुई। राष्ट्रपिता मोहनदास करमचंद गांधी (बापू) द्वारा स्थापित किए गए विश्वविद्यालय- 'महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ' से मैंने पत्रकारिता में स्नातक किया है। ग्रेजुएशन के दौरान ही विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के अध्यापकों ने बड़ी ही सख्ती से मेरी नक्काशी करने की कोशिश की। ग्रेजुएशन के आखिरी वर्ष आते-आते मैंने दिल्ली की ट्रेन पकड़ी और यहां पहुंच गया। आव देखा न ताव, दिल्ली NCR में बड़े-बड़े मीडिया समूहों के दफ्तरों के बाहर अपना बायोडेटा डाल कर प्रयास में जुट गया। काफी धैर्य के बाद ZEE मीडिया समूह से जुड़ने का मौका मिला। मेरे पत्रकारिता के सफर की शुरुआत टेलीविजन के इनपुट डिपार्टमेंट से हुई। यहां मैं असाइनमेंट डेस्क पर था। कुछ महीनों तक खुद को इस समूह के साथ जोड़े रखने के बाद वर्ष 2015 में मैंने प्रिंट मीडिया का रुख कर लिया और ALL RIGHTS नाम की मैगज़ीन के साथ जुड़ गया। बतौर विशेष संवाददाता (Special Correspondent) मेरे कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई थी। मैं उन दिनों देशभर के अलग-अलग लोकसभा क्षेत्र के सांसदों, केंद्रीय मंत्रियों और दिल्ली सरकार के विधायकों और मंत्रियों का साक्षात्कार करता था। मैगज़ीन के संपादकीय पृष्ठ के लिए मैं लेख भी लिखता था। राजनीतिक खबरों से लगाव होने के चलते मैंने इस बीट को ही अपना हमसाया बना लिया। मैगजीन के बाद फिर टेलीविजन का रुख किया और इसी साल दोबारा ज़ी मीडिया से जुड़ गया। यहां साढ़े 3 सालों तक काम करने के बाद मैंने डिजिटल मीडिया में कदम रखने की ठान ली। रिपब्लिक भारत की लॉन्चिंग से पहले मुझे इसकी वेबसाइट से जुड़ने का मौका मिला। रिपब्लिक से जुड़ने के साथ ही मैंने दिल्ली छोड़कर मुंबई का रुख कर लिया। समंदर किनारे बसे इस शहर में मैंने डिजिटल पत्रकारिता के गुर को सीखा। इस संस्थान में मुझे रिपोर्टर के तौर पर मौका दिया था। कुछ ही महीने बाद मैं वापस दिल्ली आ गया और मैंने न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में एसोसिएट प्रोड्यूसर और रिपोर्टर की भूमिका में काम किया। चंद महीने बाद ही ज़ी मीडिया समूह के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम करने का अवसर मिला। ज़ी हिन्दुस्तान के लिए मैंने स्पेशल खबरों पर काम किया और इस समूह का पहला डिजिटल रिपोर्टर बन गया। इसके बाद मुझे वीडियो सेक्शन का हेड बना दिया गया। मैंने चुनावी कवरेज की, ग्राउंड रिपोर्टिंग की और साथ ही साथ वीडियो सेक्शन को नए शिखर पर पहुंचाने की कोशिश की। मैं कविताएं और किस्से-कहानियां भी लिखता रहता हूं। पढ़ाई के दौरान ही मैंने दो किताबें भी लिखी, एक नॉवेल और दूसरी पोएट्री बुक। पत्रकारिता में रहते हुए मैंने कई "स्टिंग ऑपरेशन" भी किए। मेरे सफर को और भी खूबसूरत बनाने के लिए टाइम्स समूह ने मुझे मौका दिया। मैं जुलाई, 2023 में इस संस्थान से जुड़ा और मुझे मेन डेस्क पर खबरों से दो-चार होते रहने की जिम्मेदारी सौंपी गई। राजनीतिक विश्लेषण के साथ विस्तार से खबरों को परोसता हूं और अपने पाठकों को कुछ नया देने का प्रयास करता हूं।

और पढ़ें
End of Article