Tamilnadu Assembly Election result 2026: तमिलनाडु विधानसभा चुनाव के जो रुझान आए हैं उसमें थलापति विजय की पार्टी तमिलगा वेट्टी कझगम (TVK) सरकार बनाती नजर आ रही है। रुझानों में एक्टर विजय की पार्टी 101 सीटों पर आगे चल रही है। वहीं, सत्ताधारी डीएमके तीसरे नंबर की पार्टी बन गई है। वह 47 सीटों पर सिमटती दिख रही है। एआईएडीएमके दूसरे नंबर की पार्टी है। तमिलगा वेट्टी कझगम (TVK) की जीत राज्य की राजनीति में में एक नए युग की शुरुआत मानी जा रही है। पिछले कई दशक से तमिलनाडु की सत्ता या तो डीएमके या फिर एआईएडीएमके के हाथ में रहती थी।
राजनीति में थलापति विजय की एंट्री महज दो साल पहले हुई थी। बावजूद इसके चुनाव में जिस तरह की जीत उनकी पार्टी ने हासिल की वह बताती है कि तमिलनाडु की राजनीति को एक नया धुरंधर मिल चुका है। लेकिन ये करिश्मा हुआ कैसे?
सुपरस्टार छवि का जला जादू
51 साल के थलपति विजय अपनी सुपरस्टार छवि के जादू को वोटों में बदलने में कामयाब रहे हैं। विजय की फैन फॉलोइंग कितनी है ये किसी से छिपी नहीं है। थलपति विजय ने पिछले 30 सालों में जितनी भी फिल्में की है उनमें ज्यादातर मसीहा की छवि वाली की हैं। शायद यही कारण भी है कि तमिलनाडु के युवा और महिलाएं थलपति विजय को अपना नायक और असली हीरो मानते हैं।

युवा दिलों की धड़कन हैं विजय (AI Image)
माना जा रहा है कि विजय और उनकी पार्टी को सबसे ज्यादा वोट महिलाओं और युवाओं के ही मिले हैं। फर्स्ट टाइम वोटर्स के बीच भी विजय का सिनेमाई स्टारडम पूरे चुनाव भर हावी रहा है।
राजनीति में डेब्यू से पहले भी किया खूब काम
थलापति विजय ने दशकों तक तमिल सिनेमा पर राज करने के बाद, आधिकारिक तौर पर साल 2024 में अपनी पार्टी TVK का गठन किया। उनका राजनीतिक सफर महज एक अभिनेता के तौर पर नहीं, बल्कि भ्रष्टाचार मुक्त शासन और सामाजिक समानता के वादे के साथ शुरू हुआ। विजय ने अपनी एनजीओ 'विजय मक्कल इयक्कम' के जरिए जमीनी स्तर पर पहले ही एक मजबूत आधार तैयार कर लिया था, जिसका असर चुनाव के नतीजों पर भी दिख रहा है।
हाई रिस्क से नहीं डरे
पहली बार विधानसभा चुनाव के रण में कूदने वाले विजय ने किसी के साथ गठबंधन नहीं किया। उनकी पार्टी टीवीके अकेले मैदान में उतरी और 'विजय' हासिल की। हालांकि बहुत से राजनीतिक पंडित डीएमके और एआईएडीएमके के के प्रभुत्व वाले इस राज्य में विजय के इस फैसले को बहुत 'हाई-रिस्क' माना था। लेकिन अपने फिल्मी किरदारों की तरह ही विजय ने ये रिस्क लिया औऱ वो कर दिखाया जो वो करना चाहते थे।

तमिलनाडु के थलापति की 'विजय' (AI Image)
वादों का दिखा असर
विजय पर तमिलनाडु की जनता ने भरोसा दिखाया। विजय ने चुनावी रण में उतरने से पहले ही युवाओं से महिलाओं और राज्य के किसानों की बेहतरी के कई वायदे किये थे। उन्होंने युवाओं के लिए जहां स्कॉलरशिप और बेरोजगारी भत्ते का वादा किया तो वहीं महिलाओं के लिए हर महीने 2500 रुपये और साल में 6 मुफ्त एलपीजी सिलेंडर देने का वादा भी किया था। किसानों को भी लोन और कर्ज माफी के वादे के साथ वह मैदान में उतरे।
सत्ता विरोधियों का मिला साथ
पूरे चुनाव लोगों ने देखा कि विजय की रैलियों में भारी भीड़ उमड़ी। हालांकि विजय और टीवीके के सामने सबसे बड़ी चुनौती DMK और AIADMK के दशकों पुराने मजबूत कैडर नेटवर्क का मुकाबला करना रहा था। तमिलनाडु की राजनीति पर पैनी नजर रखने वाले विश्लेषकों की मानें तो विजय ने AIADMK के वोट बैंक और सत्ता विरोधी वोटों में सेंध लगाई। इसका नतीजा ये है कि सत्ता तो गई ही डीएमकए नतीजों में तीसरे पायदान पर दिख रही है।
