Tej Pratap Singh Yadav vs Anujesh Yadav: उत्तर प्रदेश में नौ विधानसभा सीटों पर होने वाले उपचुनाव में राज्य में सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी ने बृहस्पतिवार को सात सीटों पर उम्मीदवारों के नाम का ऐलान कर दिया। पार्टी ने करहल सीट से अनुजेश यादव को मैदान में उतारा है जो सपा प्रमुख अखिलेश यादव के चचेरे बहनोई हैं । दिलचस्प यह है कि करहल से सपा उम्मीदवार तेज प्रताप सिंह यादव अनुजेश के फूफा हैं ।
धर्मेंद्र यादव ने नाता तोड़ने का कर दिया था ऐलान
पारिवारिक सूत्रों के मुताबिक दरअसल, अनुजेश आजमगढ़ से सपा सांसद धर्मेन्द्र यादव के सगे जीजा हैं। धर्मेन्द्र सपा प्रमुख अखिलेश यादव के चचेरे भाई हैं। अनुजेश ने जब मार्च 2019 में भाजपा का दामन थामा था, तो बदायूं से तत्कालीन सांसद रहे धर्मेंद्र यादव ने एक पत्र जारी करके उनसे अपना नाता तोड़ने का ऐलान कर दिया था।
करहल सीट हमेशा से समाजवादियों का बेहद मजबूत गढ़ रहा है और इस बार भी इस सीट पर सपा और भाजपा के बीच ही मुख्य मुकाबला होने की सम्भावना है। ऐसे में तेज प्रताप और अनुजेश चुनावी मैदान में एक-दूसरे से जोर-आजमाइश करते नजर आएंगे।
'पार्टी के प्रति वफादारी का मिला इनाम, करहल में जीतेंगे'
करहल से उम्मीदवार बनाए जाने के बाद अनुजेश यादव ने कहा कि मैं प्रदेश और केंद्रीय नेतृत्व का दिल से आभार जताता हूं। मैं पार्टी के प्रति वफादार था इसलिए भारतीय जनता पार्टी ने मुझ पर भरोसा किया। मेरे परिवार से मेरी मां यहां से विधायक रही हैं और मुझे उम्मीद है कि जनता मुझ पर भरोसा जताएगी। यहां का विकास हमारी प्राथमिकता रहेगी। उत्तर प्रदेश के मैनपुरी जिले की करहल विधानसभा सीट से अनुजेश यादव उम्मीदवार बनाए जाने पर सियासत तेज हो चली है। करहल सीट सपा का गढ़ मानी जाती है। अनुजेश यादव मुलायम सिंह की भतीजी और सांसद धर्मेंद्र यादव की बहन संध्या यादव के पति हैं। संध्या उर्फ बेबी यादव 2015 से 2020 तक मैनपुरी की जिला पंचायत अध्यक्ष रहीं, जबकि अनुजेश खुद इसी दौरान फिरोजाबाद से जिला पंचायत सदस्य थे।
करहल सीट पर फूफा और भतीजे आमने-सामने
समाजवादी पार्टी (सपा) के संरक्षक मुलायम सिंह यादव के दामाद अनुजेश यादव सपा उम्मीदवार तेज प्रताप यादव के खिलाफ चुनाव लड़ेंगे। अनुजेश यादव सपा के प्रत्याशी तेज प्रताप यादव के फूफा लगते हैं। ऐसे में अब करहल सीट पर फूफा और भतीजे आमने-सामने होंगे। अनुजेश यादव सपा सांसद धर्मेंद्र यादव के सगे बहनोई हैं। उनकी बहन संध्या यादव से अनुजेश यादव की शादी हुई है। ऐसे में इस सीट पर दिलचस्प चुनावी लड़ाई के आसार है। साल 2022 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के बाद करहल सीट अखिलेश यादव के पास थी। इस साल की शुरुआत में उनके लोकसभा के लिए चुने जाने के बाद यह सीट खाली हो गई थी। उनकी जगह इस बार अखिलेश यादव के भतीजे तेज प्रताप यादव चुनाव लड़ रहे हैं, जो मुलायम सिंह यादव के बड़े भाई रतन सिंह यादव के पोते और आरजेडी सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव के दामाद भी हैं।
लोकसभा चुनाव में उत्तर प्रदेश में लगे झटके के कारण राज्य में नौ विधानसभा सीटों पर होने वाले उपचुनाव भाजपा के लिए काफी महत्वपूर्ण हो गए हैं। इन सीटों पर राज्य के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की प्रतिष्ठा दांव पर लगी है, तो वहीं ये उपचुनाव अखिलेश यादव की पार्टी और उनके परिवार, दोनों के लिए प्रतिष्ठा का चुनाव बन गया है।
कटेहरी सीट पर भाजपा ने किसे बनाया अपना उम्मीदवार?
भाजपा ने आज जारी सूची में कटेहरी सीट पर बहुजन समाज पार्टी के पूर्व विधायक धर्मराज निषाद को उम्मीदवार बनाया है। धर्मराज निषाद वर्ष 1996, 2002 और 2007 में कटेहरी से विधायक रहे हैं। भाजपा की सहयोगी, निषाद पार्टी गठबंधन के तहत कटेहरी और मझवां सीट मांग रही थी। भाजपा ने मझवां सीट से पूर्व विधायक सुचिस्मिता मौर्य को मैदान में उतारा है। वह वर्ष 2017 में हुए विधानसभा चुनाव में इसी सीट से भाजपा के टिकट पर विधायक बनी थीं।
वर्ष 2022 के चुनाव में यह सीट गठबंधन के तहत निषाद पार्टी के खाते में चली गयी थी। उपचुनाव में एक बार फिर सुचिस्मिता को टिकट देकर भाजपा ने अपने वफादारों को तरजीह देने का संदेश दिया है। फूलपुर सीट से भाजपा ने दीपक पटेल को उम्मीदवार बनाया है। पटेल वर्ष 2012 में करछना सीट से बसपा के विधायक रह चुके हैं।
राजवीर सिंह दिलेर के बेटे को खैर सीट से मिला टिकट
प्रदेश की खैर सीट से भाजपा ने सुरेंद्र दिलेर को प्रत्याशी बनाया है। दिलेर हाथरस से भाजपा के सांसद रहे राजवीर सिंह दिलेर के बेटे हैं। भाजपा ने इस साल लोकसभा चुनाव में राजवीर को टिकट नहीं दिया था। भाजपा ने गाजियाबाद से पार्टी के जिलाध्यक्ष संजीव शर्मा को टिकट दिया है। शर्मा इलाके में भाजपा का ब्राह्मण चेहरा माने जाते हैं।
इसके अलावा कुंदरकी सीट से रामवीर सिंह ठाकुर को उम्मीदवार बनाया है। ठाकुर पूर्व में दो बार कुंदरकी से और एक बार मुरादाबाद—ग्रामीण सीट से चुनाव लड़ चुके हैं। हालांकि उन्हें पराजय का सामना करना पड़ा था।
