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Raebareli Election: सिर्फ राहुल गांधी की मां सोनिया और दादी इंदिरा ही नहीं, दादा फिरोज ने भी रायबरेली में बजाया था डंका; क्या टूटेगा रिकॉर्ड?

Raebareli Chunav: रायबरेली लोकसभा सीट के पहले सबसे के तौर पर जवाहरलाल नेहरू के दामाद, इंदिरा गांधी के पति, सोनिया गांधी के ससुर और राहुल गांधी के दादा... फिरोज गांधी का नाम दर्ज है। इस बार राहुल खुद मैदान में हैं। उनकी मां सोनिया ने एक जनसभा में रायबरेली के लोगों से कहा कि मैं अपना बेटा आपको सौंप रही हैं।

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राहुल गांधी का रायबरेली में क्या होगा?

Photo : Times Now Digital

History of Raebareli Seat: अमेठी और रायबरेली को गांधी-नेहरू परिवार का गढ़ माना जाता रहा है, हालांकि पिछले चुनाव में भाजपा ने अमेठी में सेंधमारी कर ली थी। सोनिया गांधी ने रायबरेली में कांग्रेस का कब्जा कायम रखा था। इस बार यानी लोकसभा चुनाव 2024 में राहुल गांधी की मां सोनिया ने अपनी सीट छोड़ दी और यहां से कांग्रेस ने राहुल को टिकट दिया है। रायबरेली सीट का इतिहास बड़ा रोचक है। इस सीट से सिर्फ राहुल की मां और दादी ही नहीं, बल्कि उनके दादा भी दो-दो बार सांसद रह चुके हैं।

बड़ा रोचक है रायबरेली सीट का चुनावी इतिहास

उत्तर प्रदेश की रायबरेली लोकसभा सीट का चुनावी इतिहास बड़ा ही दिलचस्प है। यहां बीते बीस सालों से सोनिया गांधी चुनाव जीतती आ रही हैं, तो वर्ष 1999 के बाद से किसी भी चुनाव में कांग्रेस को हार नहीं झेलनी पड़ी है। हालांकि सिर्फ इतनी सी वजह नहीं है कि इसे कांग्रेस और गांधी-नेहरू परिवार का गढ़ माना जाता है। दरअसल, इस सीट के पहले सबसे के तौर पर जवाहरलाल नेहरू के दामाद, इंदिरा गांधी के पति, सोनिया गांधी के ससुर और राहुल गांधी के दादा... फिरोज गांधी का नाम दर्ज है।

कौन कब चुना गया रायबरेली सीट का सांसद

वर्षनामपार्टी
1952फिरोज गांधीभारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस
1957फिरोज गांधीभारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस
1960 (उपचुनाव)आरपी सिंहभारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस
1962बैजनाथ कुरीलभारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस
1967इंदिरा गांधीभारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस
1971इंदिरा गांधीभारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस
1977राज नारायणजनता पार्टी
1980इंदिरा गांधीभारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस
1980 (उपचुनाव)अरुण नेहरूभारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस
1984अरुण नेहरूभारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस
1989शीला कौलभारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस
1991शीला कौलभारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस
1996अशोक सिंहभारतीय जनता पार्टी
1998अशोक सिंहभारतीय जनता पार्टी
1999सतीश शर्माभारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस
2004सोनिया गांधीभारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस
2006 (उपचुनाव)सोनिया गांधीभारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस
2009सोनिया गांधीभारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस
2014सोनिया गांधीभारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस
2019सोनिया गांधीभारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस
उपर दिए आंकड़ों में आपने देखा कि 1952 और 57 में इंदिरा के पति फिरोज गांधी ने यहां से चुनाव जीता, जिसके बाद 8 सितंबर, 1960 को उनका निधन हो जाने के बाद इस सीट पर उचुनाव हुए और आरपी सिंह सांसद चुने गए। 1967 में पहली बार इस सीट से इंदिरा गांधी ने चुनाव जीता, लगातार दो बार सांसद चुनी जाने के बाद 1977 में उन्हें राज नारायण से हार झेलनी पड़ी। हालांकि इंदिरा ने हार नहीं मानी उन्होंने 1980 में इस सीट से चुनाव जीता और ये सीट छोड़ दी। जिसके बाद अरुण नेहरू इस सीट से दो बार 1980 के उपचुनाव और 1984 के लोकसभा चुनाव जीतकर सांसद बने। यहां भारतीय जनता पार्टी ने 1996 और 98 में चुनाव जीता था।

राहुल गांधी बनाम दिनेश प्रताप सिंह का मुकाबला

लोकसभा चुनाव 2024 में कांग्रेस के राहुल गांधी का मुकाबला भारतीय जनता पार्टी के दिनेश प्रताप सिंह से हो रहा है। इसके अलावा इस सीट से मायावती की बहुजन समाज पार्टी से ठाकुर प्रसाद यादव मैदान में हैं। रायबरेली लोकसभा सीट पर बीते 20 मई को यानी पाचवें चरण में मतदान हुए थे। लोकसभा चुनाव 2024 के नतीजे 4 जून को आने हैं।

Ayush Sinha
आयुष सिन्हाauthor

मैं टाइम्स नाउ नवभारत (Timesnowhindi.com) से जुड़ा हुआ हूं। कलम और कागज से लगाव तो बचपन से ही था, जो धीरे-धीरे आदत और जरूरत बन गई। मुख्य धारा की पत्रकारिता से जुड़े हुए 10 साल पूरे हो चुके हैं। लोकसभा चुनाव 2014 से पहले ही मैंने पत्रकारिता की पढ़ाई के बीच में ही देश की राजधानी दिल्ली आने की ठान ली थी। उससे पहले मैंने कभी ये सोचा तक नहीं था कि मैं बनारस बोले तो वाराणसी शहर से बाहर भी जा सकता हूं। जी हां, मेरा नाता काशी से है। जन्म के साथ-साथ शिक्षा दीक्षा भी बनारस में ही हुई। राष्ट्रपिता मोहनदास करमचंद गांधी (बापू) द्वारा स्थापित किए गए विश्वविद्यालय- 'महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ' से मैंने पत्रकारिता में स्नातक किया है। ग्रेजुएशन के दौरान ही विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के अध्यापकों ने बड़ी ही सख्ती से मेरी नक्काशी करने की कोशिश की। ग्रेजुएशन के आखिरी वर्ष आते-आते मैंने दिल्ली की ट्रेन पकड़ी और यहां पहुंच गया। आव देखा न ताव, दिल्ली NCR में बड़े-बड़े मीडिया समूहों के दफ्तरों के बाहर अपना बायोडेटा डाल कर प्रयास में जुट गया। काफी धैर्य के बाद ZEE मीडिया समूह से जुड़ने का मौका मिला। मेरे पत्रकारिता के सफर की शुरुआत टेलीविजन के इनपुट डिपार्टमेंट से हुई। यहां मैं असाइनमेंट डेस्क पर था। कुछ महीनों तक खुद को इस समूह के साथ जोड़े रखने के बाद वर्ष 2015 में मैंने प्रिंट मीडिया का रुख कर लिया और ALL RIGHTS नाम की मैगज़ीन के साथ जुड़ गया। बतौर विशेष संवाददाता (Special Correspondent) मेरे कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई थी। मैं उन दिनों देशभर के अलग-अलग लोकसभा क्षेत्र के सांसदों, केंद्रीय मंत्रियों और दिल्ली सरकार के विधायकों और मंत्रियों का साक्षात्कार करता था। मैगज़ीन के संपादकीय पृष्ठ के लिए मैं लेख भी लिखता था। राजनीतिक खबरों से लगाव होने के चलते मैंने इस बीट को ही अपना हमसाया बना लिया। मैगजीन के बाद फिर टेलीविजन का रुख किया और इसी साल दोबारा ज़ी मीडिया से जुड़ गया। यहां साढ़े 3 सालों तक काम करने के बाद मैंने डिजिटल मीडिया में कदम रखने की ठान ली। रिपब्लिक भारत की लॉन्चिंग से पहले मुझे इसकी वेबसाइट से जुड़ने का मौका मिला। रिपब्लिक से जुड़ने के साथ ही मैंने दिल्ली छोड़कर मुंबई का रुख कर लिया। समंदर किनारे बसे इस शहर में मैंने डिजिटल पत्रकारिता के गुर को सीखा। इस संस्थान में मुझे रिपोर्टर के तौर पर मौका दिया था। कुछ ही महीने बाद मैं वापस दिल्ली आ गया और मैंने न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में एसोसिएट प्रोड्यूसर और रिपोर्टर की भूमिका में काम किया। चंद महीने बाद ही ज़ी मीडिया समूह के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम करने का अवसर मिला। ज़ी हिन्दुस्तान के लिए मैंने स्पेशल खबरों पर काम किया और इस समूह का पहला डिजिटल रिपोर्टर बन गया। इसके बाद मुझे वीडियो सेक्शन का हेड बना दिया गया। मैंने चुनावी कवरेज की, ग्राउंड रिपोर्टिंग की और साथ ही साथ वीडियो सेक्शन को नए शिखर पर पहुंचाने की कोशिश की। मैं कविताएं और किस्से-कहानियां भी लिखता रहता हूं। पढ़ाई के दौरान ही मैंने दो किताबें भी लिखी, एक नॉवेल और दूसरी पोएट्री बुक। पत्रकारिता में रहते हुए मैंने कई "स्टिंग ऑपरेशन" भी किए। मेरे सफर को और भी खूबसूरत बनाने के लिए टाइम्स समूह ने मुझे मौका दिया। मैं जुलाई, 2023 में इस संस्थान से जुड़ा और मुझे मेन डेस्क पर खबरों से दो-चार होते रहने की जिम्मेदारी सौंपी गई। राजनीतिक विश्लेषण के साथ विस्तार से खबरों को परोसता हूं और अपने पाठकों को कुछ नया देने का प्रयास करता हूं।

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