महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम अजित पवार के बेटे से जुड़ी बड़ी खबर सामने आई है, पार्थ पवार पर जमीन सौदे में बड़े घोटाले का आरोप लग रहा है। वहीं इस मामले में अब तीन आरोपियों के खिलाफ FIR दर्ज की गई है। बता दें कि विपक्ष पहले से ही इसको लेकर फडणवीस सरकार पर हमलावर हैं। राज्य के डिप्टी सीएम अजित पवार के बेटे से जुड़ा होने की वजह से यह मामला और गर्मा गया है।
वहीं दूसरी ओर महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम अजीत पवार के बेटे से जुड़े पुणे लैंड डील मामले पर महाराष्ट्र के सीएम देवेंद्र फडणवीस ने कहा, 'जो लोग यह भी नहीं समझते कि FIR (फर्स्ट इंफॉर्मेशन रिपोर्ट) क्या होती है, वही ऐसे बेबुनियाद आरोप लगा रहे हैं। जब FIR दर्ज होती है, तो यह इसमें शामिल सभी पार्टियों के खिलाफ फाइल की जाती है। इस मामले में, FIR कंपनी और उसके ऑथराइज्ड सिग्नेटरी के खिलाफ दर्ज की गई है। यह समझना ज़रूरी है कि जब FIR दर्ज होती है, तो इसमें शामिल सभी लोग कवर होते हैं: जिन्होंने डॉक्यूमेंट्स पर साइन किए, जिन्होंने बेचा, जिन्होंने गलत रजिस्ट्रेशन किया, और जिन्होंने बदलाव किए। अगर जांच के दौरान नए नाम या लिंक सामने आते हैं, तो उनके खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी।'
उन्होंने आगे कहा कि 'मौजूदा FIR में किसी को भी बख्शा नहीं गया है। जांच रिपोर्ट आने दीजिए, उसमें जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। डिप्टी चीफ मिनिस्टर अजीत पवार भी मेरे विचार से सहमत हैं। कल भी हमने एक मिनट भी इंतज़ार नहीं किया; जो अधिकारी पहली नज़र में दोषी पाए गए, उन्हें तुरंत सस्पेंड कर दिया गया, और जो मुख्य रूप से ज़िम्मेदार थे, उनके खिलाफ FIR दर्ज की गई। यह सरकार किसी को बचाती नहीं है, न ही कुछ छिपाती है। अगर कोई गलत काम करता है, तो यह सरकार उसे कभी नहीं बचाएगी।'
फडणवीस ने आगे कहा, 'पार्टियों के बीच एक एग्रीमेंट हुआ था, लेकिन पैसे का लेन-देन अभी बाकी था। हालांकि, रजिस्ट्री पहले ही पूरी हो चुकी थी। अब दोनों पार्टियों ने रजिस्ट्री कैंसिल करने के लिए एप्लीकेशन दी है। प्रोसेस के अनुसार, उन्हें इसे कैंसिल करने के लिए कुछ फीस देनी होगी, और उसी के अनुसार उन्हें नोटिस जारी किया गया है। इसके बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी। अगर ऐसा होता भी है, तो भी जो क्रिमिनल केस फाइल किया गया है, वह खत्म नहीं होगा। जो भी गड़बड़ियां हुई हैं, उनकी जांच अभी भी की जाएगी, और जो भी ज़िम्मेदार होगा, उसके खिलाफ कार्रवाई होगी। इसके साथ ही, ACS के तहत एक पैरेलल जांच भी चल रही है। पूरी जांच एक महीने के अंदर पूरी हो जाएगी, जिसमें शामिल सभी लोगों की पहचान की जाएगी और उसके आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।'
