अजित पवार के बेटे पार्थ मुश्किल में फंसे
महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम अजित पवार के बेटे से जुड़ी बड़ी खबर सामने आई है, पार्थ पवार पर जमीन सौदे में बड़े घोटाले का आरोप लग रहा है। वहीं इस मामले में अब तीन आरोपियों के खिलाफ FIR दर्ज की गई है। बता दें कि विपक्ष पहले से ही इसको लेकर फडणवीस सरकार पर हमलावर हैं।
राज्य के डिप्टी सीएम अजित पवार के बेटे से जुड़ा होने की वजह से यह मामला और गर्मा गया है। वहीं दूसरी ओर महाराष्ट्र के सीएम फडणवीस ने इस केस में जांच के आदेश भी दे दिए हैं। माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में पार्थ पवार की कठिनाई बढ़ सकती है।
वहीं कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने भी हमला बोलते हुए कहा, 'महाराष्ट्र में ₹1800 करोड़ की सरकारी जमीन, जो दलितों के लिए आरक्षित थी, सिर्फ ₹300 करोड़ में मंत्री जी के बेटे की कंपनी को बेच दी गई. ऊपर से स्टांप ड्यूटी भी हटा दी गई. मतलब एक तो लूट और उसपर कानूनी मुहर में भी छूट!'
गौर हो कि पुणे में कीमती जमीन के विवादास्पद सौदे ने महाराष्ट्र की राजनीति में भूचाल ला दिया है। करीब ₹1,800 करोड़ मूल्य की इस संपत्ति को मात्र ₹300 करोड़ में बेचे जाने और केवल ₹500 की स्टाम्प ड्यूटी चुकाने का खुलासा हुआ है। मामला उजागर होते ही मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने तत्काल कार्रवाई करते हुए जांच के आदेश दिए और संबंधित अधिकारियों को निलंबित कर दिया।मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने तत्काल जांच के आदेश दिए। कार्रवाई करते हुए पुणे के तहसीलदार सूर्यकांत येवले को निलंबित कर दिया गया। साथ ही मुख्यमंत्री ने बताया कि इस पूरे प्रकरण की जांच के लिए अतिरिक्त मुख्य सचिव विकास खड़गे की अध्यक्षता में एक उच्च स्तरीय समिति गठित की जाएगी।
इससे पहले अपने बयान में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने मामले में सामने आई अनियमितताओं पर कड़ी नाराजगी जताते हुए कहा कि यदि किसी भी तरह की गड़बड़ी पाई गई, तो सख्त कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने स्पष्ट किया, “जहां भी अनियमितताएं होंगी, उन्हें बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।” मुख्यमंत्री द्वारा जांच के आदेश देने के महज दो घंटे के भीतर ही पुणे के तहसीलदार को निलंबित कर दिया गया। सरकार की इस त्वरित कार्रवाई ने महाराष्ट्र की राजनीति में हलचल पैदा कर दी है, खासकर इसलिए क्योंकि मामले में उपमुख्यमंत्री के बेटे का नाम भी सामने आया है। सूत्रों के अनुसार, स्टाम्प और पंजीयन विभाग की प्रारंभिक जांच में यह सौदा पूरी तरह अवैध प्रतीत हो रहा है। जांच में यह भी खुलासा हुआ कि भूमि का विक्रय मात्र ₹500 के स्टाम्प पेपर पर दर्ज किया गया था, जिससे संपत्ति का मूल्यांकन वास्तविक कीमत की तुलना में बहुत कम बताया गया।
इस पूरे प्रकरण के बाद अब पुणे के उप-पंजीयक रवींद्र तारू को भी निलंबित कर दिया गया है। अधिकारियों ने उन पर आरोप लगाया है कि उन्होंने नियमों की अनदेखी करते हुए अवैध रूप से इस भूमि लेन-देन को पंजीकृत किया, जिससे न केवल मूल भूमि मालिक बल्कि राज्य के राजस्व को भी नुकसान पहुंचा। बताया जा रहा है कि यह भूमि पुणे के कोरेगांव पार्क क्षेत्र में स्थित है, जो शहर के सबसे महंगे और प्रतिष्ठित इलाकों में से एक है। जांच अधिकारियों का कहना है कि यह सौदा कई सरकारी नियमों और मानकों का उल्लंघन करते हुए किया गया था, जिसमें जरूरी स्वीकृतियों और मूल्यांकनों को जानबूझकर नजरअंदाज किया गया।