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महाराष्ट्र चुनाव: NCP में टूट के बाद पहली बार शरद और अजित पवार की अलग-अलग दिवाली, दल के बाद दिल भी हुए जुदा

Baramati Assembly Election: शरद पवार हर साल गोविंदबाग आवास पर दिवाली पाडवा कार्यक्रम का आयोजन करते हैं। इसमें राज्यभर से लोग उन्हें बधाई देने पहुंचते हैं। कार्यक्रम में अजित पवार भी शामिल होते आए हैं। हालांकि, एनसीपी में टूट के बाद यह पहली बाद है कि दोनों चाचा-भतीजे अलग-अलग इस कार्यक्रम का आयोजन कर रहे हैं।

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अजित पवार और शरद पवान ने अलग-अलग मनाई दिवाली।

Baramati Assembly Election: महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में बारामती से अजित पवार के खिलाफ उम्मीदवार उतारने के बाद चाचा शरद पवार से उनकी नाराजगी साफ दिखाई दे रही है। इसका मजमून दिवाली के मौके पर होने वाले कार्यक्रम 'दिवाली पाडवा' पर दिखाई दिया। एनसीपी में टूट के बाद यह पहली बार है जब अजित पवार और शरद पवार इस कार्यक्रम को अलग-अलग आयोजित कर रहे हैं।

अजित पवार ने ऐलान किया है कि वह अपने पैतृक गांव काटेवाड़ी में दिवाली पाडवा (पर्व) उत्सव का आयोजन करेंगे। शनिवार सुबह उन्हें बधाई देने के लिए भारी संख्या में समर्थक पहुंचे। वहीं दूसरी तरफ शरद पवार के गोविंदबाग आवास पर भी दिवाली पड़वा मनाया। कार्यक्रम में शरद पवार की बेटी सुप्रिया सुले भी मौजूद रहीं। बता दें, शरद पवार हर साल गोविंदबाग आवास पर इस कार्यक्रम का आयोजन करते हैं। इसमें राज्यभर से लोग उन्हें बधाई देने पहुंचते हैं। कार्यक्रम में अजित पवार भी शामिल होते आए हैं।

अजित पवार पर कसा तंज

शरद पवार की बेटी सुप्रिया सुले ने अजित पवार के दिवाली पाडवा कार्यक्रम को लेकर तंज कसा है। उन्होंने कहा, मुझे उपमुख्यमंत्री द्वारा आयोजित कार्यक्रम की जानकारी नहीं है। बारामती में कई जगह दिवाली पाडवा मनाया जा रहा है। उन्होंने कहा, शरद पवार के 1967 में पहली बार चुने जाने के बाद से पिछले 57 वर्षों से यह एक घर की परंपरा है। हर किसी को इस कार्यक्रम का इंतजार रहता है।

महाराष्ट्र में एक बार फिर होगा पवार vs पवार

महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में एक बार फिर पवार फैमिली के बीच कड़ा मुकाबला देखने को मिला है। दरअसल, बारामती में अजित पवार के खिलाफ शरद पवार ने बड़ा दांव चला है। शदर पवार ने अजित पवार के भतीजे युगेंद्र पवार को मैदान में उतारा है। इससे पहले इस साल हुए लोकसभा चुनाव के दौरान बारामती में अजित पवार की पत्नी सुनेत्रा पवार मौजूदा सांसद सुले के खिलाफ मैदान में उतरी थीं।

Pranjul Srivastava
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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