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शरद पवार, उद्धव ठाकरे और कांग्रेस के बीच बनी सहमति, 85-85 सीटों पर लड़ेंगे चुनाव; जानें फॉर्मूला

Maharashtra: महाराष्ट्र में विपक्षी दलों के गठबंधन महा विकास अघाडी के बीच सीट शेयरिंग का फॉर्मूला सेट हो गया है। इसकी जानकारी शिवसेना नेता संजय राउत ने साझा की है। उन्होंने बताया है कि एमवीए के घटक दल 85-85 सीट पर महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव लड़ेंगे। हालांकि अन्य सीटों पर मंथन अब भी जारी है।

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महाराष्ट्र में एमवीए ने तय किया सीट शेयरिंग का फॉर्मूला।

MVA Seat Sharing Formula: कांग्रेस, राकांपा (एसपी) और शिवसेना (यूबीटी) के गठबंधन ‘महा विकास आघाडी’ (एमवीए) ने बुधवार को महाराष्ट्र में 85-85 सीट पर चुनाव लड़ने की घोषणा की। हालांकि सीट बंटवारे को अंतिम रूप देने को लेकर विचार-विमर्श अब भी जारी है। तीनों सहयोगी दल कुल 288 में से शेष 33 सीट को आपस में तथा छोटी पार्टियों के साथ बांटने पर चर्चा कर रहे हैं।

अब तक 270 सीटों पर बन गई है सहमति

शिवसेना (यूबीटी) सांसद संजय राउत ने संवाददाता सम्मेलन में कहा कि 20 नवंबर को होने वाले ‍‍विधानसभा चुनाव के लिए कुल 288 सीट में से 270 पर सहमति बन गई है। राउत ने कहा, “हम समाजवादी पार्टी, पीडब्ल्यूपी, माकपा, भाकपा और ‘आप’ को शामिल करेंगे। शेष सीट के लिए अब भी चर्चा चल रही है। हम सौहार्दपूर्ण ढंग से 270 सीट पर सहमति पर पहुंचे हैं। महायुति सरकार को हराने के लिए एमवीए एकजुट है।”

15 सीटें छोटे दलों को आवंटित की जाएंगी

महाराष्ट्र कांग्रेस प्रमुख नाना पटोले ने कहा कि बाकी सीट छोटी पार्टियों के लिए छोड़ी जाएंगी। शिवसेना (यूबीटी) नेता अनिल देसाई ने संवाददाताओं से अलग से बातचीत में सीट बंटवारे के बारे में बताया। देसाई ने कहा, “एमवीए के तीनों घटक दल 85-85 सीट (कुल 255) पर सहमति पर पहुंच गए हैं। शेष 33 सीट में से सहयोगी दल आपस में 18 सीट पर चर्चा कर रहे हैं, जबकि शेष (15 सीट) छोटे दलों को आवंटित की जाएंगी।”

कुछ सीटों, विशेषकर विदर्भ क्षेत्र और मुंबई में शिवसेना (यूबीटी) और कांग्रेस के बीच विवाद के कारण विपक्षी सदस्यों के बीच सीट बंटवारे पर बातचीत कई सप्ताह तक चलती रही। हाल के लोकसभा चुनावों में अपने बेहतर प्रदर्शन के कारण कांग्रेस विदर्भ में अपनी जमीन खोने को इच्छुक नहीं है।

सपा ने एमवीए से 12 सीट की मांग की थी

सीट बंटवारे पर गतिरोध जारी रहने के कारण, विपक्षी खेमे में समाजवादी पार्टी (सपा), आम आदमी पार्टी (आप), वामपंथी दल और पीजेंट एंड वर्कर्स पार्टी (पीडब्ल्यूपी) सहित छोटी पार्टियों में बेचैनी बढ़ रही थी। अखिलेश यादव के नेतृत्व वाली सपा ने एमवीए से 12 सीट की मांग की थी और पांच निर्वाचन क्षेत्रों में उम्मीदवारों की घोषणा कर दी थी।

48 लोकसभा सीट में से 31 पर मिली थी जीत

विभिन्न दलों के उम्मीदवार टिकट पाने के लिए एमवीए शामिल दलों के कार्यालयों में उमड़ रहे हैं, क्योंकि नामांकन दाखिल करने की प्रक्रिया शुरू हो गई है - जिसकी अंतिम तिथि 29 अक्टूबर है। सीट आवंटन में लगातार हो रही देरी उनकी चुनावी संभावनाओं को नुकसान पहुंचा सकती है।

इस साल हुए आम चुनाव में महाराष्ट्र में एमवीए को 48 लोकसभा सीट में से 31 सीट मिली थीं, इसलिए छोटी पार्टियां ‘इंडिया’ गठबंधन के बैनर तले चुनाव लड़ने की इच्छुक हैं। राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) को मात्र 17 सीट मिली थीं।

Ayush Sinha
आयुष सिन्हाauthor

मैं टाइम्स नाउ नवभारत (Timesnowhindi.com) से जुड़ा हुआ हूं। कलम और कागज से लगाव तो बचपन से ही था, जो धीरे-धीरे आदत और जरूरत बन गई। मुख्य धारा की पत्रकारिता से जुड़े हुए 10 साल पूरे हो चुके हैं। लोकसभा चुनाव 2014 से पहले ही मैंने पत्रकारिता की पढ़ाई के बीच में ही देश की राजधानी दिल्ली आने की ठान ली थी। उससे पहले मैंने कभी ये सोचा तक नहीं था कि मैं बनारस बोले तो वाराणसी शहर से बाहर भी जा सकता हूं। जी हां, मेरा नाता काशी से है। जन्म के साथ-साथ शिक्षा दीक्षा भी बनारस में ही हुई। राष्ट्रपिता मोहनदास करमचंद गांधी (बापू) द्वारा स्थापित किए गए विश्वविद्यालय- 'महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ' से मैंने पत्रकारिता में स्नातक किया है। ग्रेजुएशन के दौरान ही विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के अध्यापकों ने बड़ी ही सख्ती से मेरी नक्काशी करने की कोशिश की। ग्रेजुएशन के आखिरी वर्ष आते-आते मैंने दिल्ली की ट्रेन पकड़ी और यहां पहुंच गया। आव देखा न ताव, दिल्ली NCR में बड़े-बड़े मीडिया समूहों के दफ्तरों के बाहर अपना बायोडेटा डाल कर प्रयास में जुट गया। काफी धैर्य के बाद ZEE मीडिया समूह से जुड़ने का मौका मिला। मेरे पत्रकारिता के सफर की शुरुआत टेलीविजन के इनपुट डिपार्टमेंट से हुई। यहां मैं असाइनमेंट डेस्क पर था। कुछ महीनों तक खुद को इस समूह के साथ जोड़े रखने के बाद वर्ष 2015 में मैंने प्रिंट मीडिया का रुख कर लिया और ALL RIGHTS नाम की मैगज़ीन के साथ जुड़ गया। बतौर विशेष संवाददाता (Special Correspondent) मेरे कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई थी। मैं उन दिनों देशभर के अलग-अलग लोकसभा क्षेत्र के सांसदों, केंद्रीय मंत्रियों और दिल्ली सरकार के विधायकों और मंत्रियों का साक्षात्कार करता था। मैगज़ीन के संपादकीय पृष्ठ के लिए मैं लेख भी लिखता था। राजनीतिक खबरों से लगाव होने के चलते मैंने इस बीट को ही अपना हमसाया बना लिया। मैगजीन के बाद फिर टेलीविजन का रुख किया और इसी साल दोबारा ज़ी मीडिया से जुड़ गया। यहां साढ़े 3 सालों तक काम करने के बाद मैंने डिजिटल मीडिया में कदम रखने की ठान ली। रिपब्लिक भारत की लॉन्चिंग से पहले मुझे इसकी वेबसाइट से जुड़ने का मौका मिला। रिपब्लिक से जुड़ने के साथ ही मैंने दिल्ली छोड़कर मुंबई का रुख कर लिया। समंदर किनारे बसे इस शहर में मैंने डिजिटल पत्रकारिता के गुर को सीखा। इस संस्थान में मुझे रिपोर्टर के तौर पर मौका दिया था। कुछ ही महीने बाद मैं वापस दिल्ली आ गया और मैंने न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में एसोसिएट प्रोड्यूसर और रिपोर्टर की भूमिका में काम किया। चंद महीने बाद ही ज़ी मीडिया समूह के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम करने का अवसर मिला। ज़ी हिन्दुस्तान के लिए मैंने स्पेशल खबरों पर काम किया और इस समूह का पहला डिजिटल रिपोर्टर बन गया। इसके बाद मुझे वीडियो सेक्शन का हेड बना दिया गया। मैंने चुनावी कवरेज की, ग्राउंड रिपोर्टिंग की और साथ ही साथ वीडियो सेक्शन को नए शिखर पर पहुंचाने की कोशिश की। मैं कविताएं और किस्से-कहानियां भी लिखता रहता हूं। पढ़ाई के दौरान ही मैंने दो किताबें भी लिखी, एक नॉवेल और दूसरी पोएट्री बुक। पत्रकारिता में रहते हुए मैंने कई "स्टिंग ऑपरेशन" भी किए। मेरे सफर को और भी खूबसूरत बनाने के लिए टाइम्स समूह ने मुझे मौका दिया। मैं जुलाई, 2023 में इस संस्थान से जुड़ा और मुझे मेन डेस्क पर खबरों से दो-चार होते रहने की जिम्मेदारी सौंपी गई। राजनीतिक विश्लेषण के साथ विस्तार से खबरों को परोसता हूं और अपने पाठकों को कुछ नया देने का प्रयास करता हूं।

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