इलेक्शन

महाराष्ट्र में किसका बजेगा डंका? जानें विधानसभा चुनाव से पहले कितना अहम है विधान परिषद चुनाव

Maharashtra Election: महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव 2024 से पहले राजनीतिक दलों के लिए विधान परिषद चुनाव किसी महत्वपूर्ण परीक्षा से कम नहीं है। राज्य विधानमंडल के निचले सदन में एमवीए और महायुति के संख्या बल को देखते हुए, एमवीए को 11 में से दो और सत्तारूढ़ गठबंधन को नौ सीट मिल सकती हैं।

Image

महाराष्ट्र में क्या होगा?

Photo : Times Now Digital

Assembly Election 2024: महाराष्ट्र विधान परिषद में विधायक कोटे से 11 सीट के लिए होने वाले द्विवार्षिक चुनाव इस साल के अंत में होने वाले राज्य विधानसभा चुनाव से पहले सत्तारूढ़ महायुति और विपक्षी महा विकास आघाडी (एमवीए) के लिए एक महत्वपूर्ण परीक्षा होगी। प्रदेश के 288 सदस्यीय सदन में 14 सीट रिक्त होने के चलते, निर्वाचकों की संख्या 274 है, तथा विजयी उम्मीदवार के लिए कोटा 23 है।

विधान परिषद में किसे मिलेगी कितनी सीट?

राज्य विधानमंडल के निचले सदन में एमवीए और महायुति के संख्या बल को देखते हुए, एमवीए को 11 में से दो और सत्तारूढ़ गठबंधन को नौ सीट मिल सकती हैं। कांग्रेस एक उम्मीदवार को एमएलसी के रूप में निर्वाचित करा सकती है, जबकि शिवसेना (यूबीटी) और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) एक उम्मीदवार को एमएलसी के रूप में निर्वाचित करा सकती हैं। भाजपा पांच उम्मीदवार को एमएलसी के रूप में निर्वाचित करा सकती है, जबकि शेष चार को सहयोगी शिवसेना और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के लिए छोड़ सकती है।

25 जून से नामांकन, 12 जुलाई को चुनाव

चुनाव 12 जुलाई को होने हैं और नामांकन 25 जून से शुरू होंगे। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के 103 विधायक हैं, अजित पवार के नेतृत्व वाली राकांपा के 40, एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना के 38 विधायक हैं। वहीं कांग्रेस के 37 विधायक हैं, शिवसेना (यूबीटी) के 15 और शरद पवार के नेतृत्व वाली राकांपा के 10 विधायक हैं।

लोकसभा चुनाव में सांसद चुने गए हैं ये विधायक

राकांपा विधायकों अशोक पवार और नवाब मलिक ने दोनों में से किसी भी गुट के समर्थन में हलफनामा नहीं दिया है। शिवसेना विधायकों संदीपन बुमरे और रवींद्र वायकर, राकांपा (एसपी) के नीलेश लंके तथा प्रतिभा धानोरकर, वर्षा गायकवाड़, बलवंत वानखड़े, प्रणीति शिंदे (सभी कांग्रेस से) हाल ही में हुए लोकसभा चुनाव में सांसद चुने गए हैं।

चुनाव का जोखिम नहीं उठाना चाहेंगे सियासी दल

कांग्रेस के अशोक चव्हाण और राजू परवे इस्तीफा दे चुके हैं। कांग्रेस के सुनील केदार को अयोग्य करार दिया जा चुका है। वहीं भाजपा के गोवर्धन शर्मा, राजेंद्र पाटनी, कांग्रेस के पी एन पाटिल, शिवसेना के अनिल बाबर का निधन हो गया है। राकांपा (एसपी) के एक नेता ने कहा कि विधान परिषद चुनाव निर्विरोध होने की संभावना है क्योंकि राजनीतिक दल उच्च सदन के लिए चुनाव का जोखिम नहीं उठाना चाहेंगे।

25 जून को कांग्रेस करेगी अहम बैठक

शिवसेना (यूबीटी) ने घोषणा की है कि वह चुनाव पर रोक लगाने के लिए उच्चतम न्यायालय का रुख करेगी क्योंकि शिवसेना और राकांपा के कई विधायक अयोग्यता की कार्यवाही का सामना कर रहे हैं। वहीं भाजपा के एक नेता ने कहा कि चुनाव तभी टाला जा सकता है जब 12वां उम्मीदवार न हो। राकांपा (एसपी) ने पीजेंट्स एंड वर्कर्स पार्टी (पीडब्ल्यूपी) के जयंत पाटिल को अपना समर्थन देने की घोषणा की है। कांग्रेस 25 जून को अपनी बैठक में यह तय करेगी कि मैदान में एक उम्मीदवार को उतारा जाए या दो को।

किस पार्टी के कितने विधायक, देखें आकड़ें

सदन के संख्या बल के अनुसार, भाजपा के 105 विधायक, कांग्रेस के 45, (अविभाजित) राकांपा के 53 और (अविभाजित) शिवसेना के 56 विधायक थे। बहुजन विकास अघाडी (बीवीए) के तीन विधायक हैं, समाजवादी पार्टी के दो, ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) के दो, प्रहार जनशक्ति पार्टी के दो, महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (एमएनएस), मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी, स्वाभिमानी पक्ष, राष्ट्रीय समाज पक्ष (आरएसपी), जनसुराज्य शक्ति पार्टी, क्रांतिकारी शेतकरी पक्ष और पीडब्ल्यूपी के एक-एक, जबकि 13 निर्दलीय हैं।

द्विवार्षिक चुनाव कराना इसलिए जरूरी हैं क्योंकि 11 विधान पार्षदों का कार्यकाल समाप्त हो रहा है। ये विधायक हैं मनीषा कायंदे (शिवसेना), अनिल परब (शिवसेना-यूबीटी), विजय गिरकर, निलय नाइक, रमेश पाटिल, रामराव पाटिल (भाजपा), अब्दुल्ला दुर्रानी (राकांपा), वजाहत मिर्जा और प्रज्ञा सातव (कांग्रेस), महादेव जानकर (आरएसपी) और जयंत पाटिल (पीडब्ल्यूपी)।

Ayush Sinha
आयुष सिन्हाauthor

मैं टाइम्स नाउ नवभारत (Timesnowhindi.com) से जुड़ा हुआ हूं। कलम और कागज से लगाव तो बचपन से ही था, जो धीरे-धीरे आदत और जरूरत बन गई। मुख्य धारा की पत्रकारिता से जुड़े हुए 10 साल पूरे हो चुके हैं। लोकसभा चुनाव 2014 से पहले ही मैंने पत्रकारिता की पढ़ाई के बीच में ही देश की राजधानी दिल्ली आने की ठान ली थी। उससे पहले मैंने कभी ये सोचा तक नहीं था कि मैं बनारस बोले तो वाराणसी शहर से बाहर भी जा सकता हूं। जी हां, मेरा नाता काशी से है। जन्म के साथ-साथ शिक्षा दीक्षा भी बनारस में ही हुई। राष्ट्रपिता मोहनदास करमचंद गांधी (बापू) द्वारा स्थापित किए गए विश्वविद्यालय- 'महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ' से मैंने पत्रकारिता में स्नातक किया है। ग्रेजुएशन के दौरान ही विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के अध्यापकों ने बड़ी ही सख्ती से मेरी नक्काशी करने की कोशिश की। ग्रेजुएशन के आखिरी वर्ष आते-आते मैंने दिल्ली की ट्रेन पकड़ी और यहां पहुंच गया। आव देखा न ताव, दिल्ली NCR में बड़े-बड़े मीडिया समूहों के दफ्तरों के बाहर अपना बायोडेटा डाल कर प्रयास में जुट गया। काफी धैर्य के बाद ZEE मीडिया समूह से जुड़ने का मौका मिला। मेरे पत्रकारिता के सफर की शुरुआत टेलीविजन के इनपुट डिपार्टमेंट से हुई। यहां मैं असाइनमेंट डेस्क पर था। कुछ महीनों तक खुद को इस समूह के साथ जोड़े रखने के बाद वर्ष 2015 में मैंने प्रिंट मीडिया का रुख कर लिया और ALL RIGHTS नाम की मैगज़ीन के साथ जुड़ गया। बतौर विशेष संवाददाता (Special Correspondent) मेरे कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई थी। मैं उन दिनों देशभर के अलग-अलग लोकसभा क्षेत्र के सांसदों, केंद्रीय मंत्रियों और दिल्ली सरकार के विधायकों और मंत्रियों का साक्षात्कार करता था। मैगज़ीन के संपादकीय पृष्ठ के लिए मैं लेख भी लिखता था। राजनीतिक खबरों से लगाव होने के चलते मैंने इस बीट को ही अपना हमसाया बना लिया। मैगजीन के बाद फिर टेलीविजन का रुख किया और इसी साल दोबारा ज़ी मीडिया से जुड़ गया। यहां साढ़े 3 सालों तक काम करने के बाद मैंने डिजिटल मीडिया में कदम रखने की ठान ली। रिपब्लिक भारत की लॉन्चिंग से पहले मुझे इसकी वेबसाइट से जुड़ने का मौका मिला। रिपब्लिक से जुड़ने के साथ ही मैंने दिल्ली छोड़कर मुंबई का रुख कर लिया। समंदर किनारे बसे इस शहर में मैंने डिजिटल पत्रकारिता के गुर को सीखा। इस संस्थान में मुझे रिपोर्टर के तौर पर मौका दिया था। कुछ ही महीने बाद मैं वापस दिल्ली आ गया और मैंने न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में एसोसिएट प्रोड्यूसर और रिपोर्टर की भूमिका में काम किया। चंद महीने बाद ही ज़ी मीडिया समूह के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम करने का अवसर मिला। ज़ी हिन्दुस्तान के लिए मैंने स्पेशल खबरों पर काम किया और इस समूह का पहला डिजिटल रिपोर्टर बन गया। इसके बाद मुझे वीडियो सेक्शन का हेड बना दिया गया। मैंने चुनावी कवरेज की, ग्राउंड रिपोर्टिंग की और साथ ही साथ वीडियो सेक्शन को नए शिखर पर पहुंचाने की कोशिश की। मैं कविताएं और किस्से-कहानियां भी लिखता रहता हूं। पढ़ाई के दौरान ही मैंने दो किताबें भी लिखी, एक नॉवेल और दूसरी पोएट्री बुक। पत्रकारिता में रहते हुए मैंने कई "स्टिंग ऑपरेशन" भी किए। मेरे सफर को और भी खूबसूरत बनाने के लिए टाइम्स समूह ने मुझे मौका दिया। मैं जुलाई, 2023 में इस संस्थान से जुड़ा और मुझे मेन डेस्क पर खबरों से दो-चार होते रहने की जिम्मेदारी सौंपी गई। राजनीतिक विश्लेषण के साथ विस्तार से खबरों को परोसता हूं और अपने पाठकों को कुछ नया देने का प्रयास करता हूं।

और पढ़ें
End of Article