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Karnataka Election 2023: किसका घोषणा पत्र पड़ेगा भारी? BJP और Congress के 5 वादों में समझिए कर्नाटक की पूरी कहानी

  • Authored by: प्रांजुल श्रीवास्तव
  • Updated May 2, 2023, 11:37 AM IST

Karnataka Election 2023: भाजपा और कांग्रेस की ओर से जारी किए गए घोषणापत्र में जनता को लुभाने की पूरी कोशिश की गई है। घोषणापत्र में कई ऐसे वादे भी हुए हैं तो चुनाव में जीत-हार तय कर सकते हैं। ऐसे में आइए जानते हैं भाजपा और कांग्रेस के किए गए पांच-पांच बड़े वादे और किसका घोषणा पत्र पड़ेगा भारी...

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कर्नाटक में भाजपा और कांग्रेस के पांच बड़े वादे

Photo : BCCL

Karnataka Election 2023: कर्नाटक विधानसभा चुनाव के लिए 10 मई को मतदान होना है। 13 मई को नतीजे जारी होंगे, इसके बाद तय हो जाएगा कि भाजपा कर्नाटक की सत्ता में वापसी करती है या फिर कांग्रेस बाजी मारती है। दोनों पार्टियों की ओर से चुनाव की तैयारियां लगभग पूरी कर ली गई हैं। भाजपा ने जहां सोमवार को अपना घोषणा पत्र जारी किया तो कांग्रेस ने भी मंगलवार को अपने मेनिफेस्टो में वादों की झड़ी लगा दी।

भाजपा और कांग्रेस की ओर से जारी किए गए घोषणापत्र में जनता को लुभाने की पूरी कोशिश की गई है। इस बार सियासत का केंद्र रहा नंदिनी दूध भी दोनों के मेनिफेस्टो का हिस्सा है। हालांकि, घोषणापत्र में कई ऐसे वादे भी हुए हैं तो चुनाव में जीत-हार तय कर सकते हैं। ऐसे में आइए जानते हैं भाजपा और कांग्रेस के किए गए पांच-पांच बड़े वादे और किसका घोषणा पत्र पड़ेगा भारी...

पहले भाजपा की बात

भारतीय जनता पार्टी ने अपने घोषणा पत्र में हर राज्य की तरह समान नागरिक संहिता को केंद्र में रखा है। पार्टी ने वादा किया है कि सरकार में लौटने के बाद वह राज्य में समान नागरिक संहिता (UCC) को लागू करेगी। इसके अलावा नंदिनी दूध को भी केंद्र में रखा गया है। भाजपा ने बीपीएल परिवारों के लिए हर दिन आधा लीटर नंदिनी दूध देने का वादा किया है।

अब भाजपा के पांच बड़े वादे

  • बीपीएल परिवारों को साल में तीन घरेलू सिलेंडर फ्री।
  • नगर परिषद के प्रत्येक वार्ड में 'अटल आहार योजना' की शुरुआत।
  • एससी-एसटी महिलाओं को पांच साल के लिए 10 हजार की एफडी।
  • गरीबों के लिए 10 लाख आवास
  • कल्याण सर्किट, बनवासी सर्किट, परशुराम सर्किट एवं गनगपुरा कॉरीडोर के लिए 1,500 करोड़ रुपए का आवंटन।

अब कांग्रेस का घोषणा पत्र

कांग्रेस पार्टी की ओर से भी मंगलवार को घोषणा पत्र जारी किया गया है। इसमें अलग-अलग समुदायों को साधने के लिए पार्टी ने आरक्षण दांव खेला है तो यूथ वोटर्स का भी खास ध्यान रखा गया है। पार्टी ने डेयरी प्रोडक्ट को भी घोषणा पत्र के केंद्र में रखा है, इसके अलावा महिलाओं के लिए बड़ी घोषणा की है।

अब कांग्रेस के पांच बड़े वादे

  • डेयरी किसानों को 50,000 का कृषि क्रांति क्रेडिट कार्ड।
  • SC का रिजर्वेशन 15% से 17% और ST आरक्षण 3% से 7% किया जाएगा।
  • 200 यूनिट मुफ्त बिजली।
  • महिला मुखिया को 2000 हजार रुपये प्रति माह।
  • बेरोजगार ग्रेजुएट युवाओं को दो साल तक 3000 रुपये प्रति माह।
प्रांजुल श्रीवास्तव
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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