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'कांग्रेस सत्ता में आई तो हर महीने मिलेंगे 26 हजार रुपये', जानें किसने किससे किया ये वादा

Election News: लोकसभा चुनाव के साथ-साथ ओडिशा में हो रहे विधानसभा चुनाव के लिए तमाम वादे किए जा रहे हैं। इसी बीच एक नेता ने ये दावा किया है कि कांग्रेस सत्ता में आई तो ओडिशा में गरीब परिवारों को हर महीने 26 हजार रुपये मिलेंगे। राज्य में सरकार बनने पर मुफ्त बिजली देने का भी वादा किया है।

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खाते में हर महीने 16,000 रुपये डालने का वादा।

Photo : Times Now Digital

Odisha Election: देशभर में चुनावी माहौल के बीच उठापटक का दौर जारी है। अपनी-अपनी शाख मजबूत रखने के लिए सभी सियासी पार्टियां पूरी ताकत झोंक रही हैं, साथ ही वादों का सिलसिला भी चल रहा है। लोकसभा चुनाव और ओडिशा विधानसभा चुनाव के आखिरी चरण के लिए 1 जून को मतदान होना है, जिसे लेकर भाजपा और कांग्रेस दोनों ही अपनी ओर झुकाने की कोशिश में जुटी हुई हैं। जहां भाजपा इस बार ओडिशा जीतने का दंभ भर रही है, तो वहीं कांग्रेस भी ओडिशा के लोगों से लगातार वादें कर रही है।

गरीब परिवार को 26 हजार रुपये की मदद देने का वादा

ओडिशा में लंबे वक्त से नवीन पटनायक की बीजेडी का कब्जा है, ऐसे में भाजपा और कांग्रेस दोनों ही इस बार अपने शाख मजबूत करने की कोशिश कर रही हैं। कांग्रेस के एक नेता ने कहा कि यदि ओडिशा और केंद्र में पार्टी सत्ता में आती है तो राज्य में प्रत्येक गरीब परिवार को कम से कम 26,000 रुपये महीने की आर्थिक मदद दी जाएगी।

'ओडिशा के लोगों को देंगे 200 यूनिट मुफ्त बिजली'

कांग्रेस नेता अजय कुमार ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि अगर पार्टी ओडिशा में सरकार बनाती है तो वह गरीब महिलाओं को ‘गृह लक्ष्मी योजना’ के तहत 2,000 रुपये और किसानों, विधवाओं, दिव्यांगों तथा बुजुर्गों को 2,000 रुपये देगी। उन्होंने कहा कि इसी तरह कांग्रेस ने राज्य के लोगों को 200 यूनिट मुफ्त बिजली देने का वादा किया है जिसकी लागत करीब 2,000 प्रति माह होगी।

500 रुपये का एलपीजी सिलेंडर देने का वादा

कांग्रेस के ओडिशा प्रभारी कुमार ने कहा कि धान की एमएसपी बढ़ाकर 3,000 रुपये प्रति कुंतल कर दी जाएगी, वहीं एलपीजी सिलेंडर 500 रुपये का मिलेगा। उन्होंने कहा कि अगर कांग्रेस यहां सत्ता में आई तो वह राज्य के हर गरीब परिवार को करीब 10,000 रुपये प्रति महीने देगी। कुमार ने कहा कि इसी तरह यदि केंद्र में ‘इंडिया’ की सरकार बनती है तो केंद्र सरकार प्रत्येक गरीब परिवार के खाते में हर महीने 16,000 रुपये से अधिक डालेगी।

कांग्रेस नेता अजय कुमार ने कहा कि इसी तरह की सहायता राशि को देखें तो प्रत्येक गरीब परिवार को 26,000 रुपये से अधिक मिलेंगे।

(इनपुट- भाषा)

Ayush Sinha
आयुष सिन्हाauthor

मैं टाइम्स नाउ नवभारत (Timesnowhindi.com) से जुड़ा हुआ हूं। कलम और कागज से लगाव तो बचपन से ही था, जो धीरे-धीरे आदत और जरूरत बन गई। मुख्य धारा की पत्रकारिता से जुड़े हुए 10 साल पूरे हो चुके हैं। लोकसभा चुनाव 2014 से पहले ही मैंने पत्रकारिता की पढ़ाई के बीच में ही देश की राजधानी दिल्ली आने की ठान ली थी। उससे पहले मैंने कभी ये सोचा तक नहीं था कि मैं बनारस बोले तो वाराणसी शहर से बाहर भी जा सकता हूं। जी हां, मेरा नाता काशी से है। जन्म के साथ-साथ शिक्षा दीक्षा भी बनारस में ही हुई। राष्ट्रपिता मोहनदास करमचंद गांधी (बापू) द्वारा स्थापित किए गए विश्वविद्यालय- 'महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ' से मैंने पत्रकारिता में स्नातक किया है। ग्रेजुएशन के दौरान ही विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के अध्यापकों ने बड़ी ही सख्ती से मेरी नक्काशी करने की कोशिश की। ग्रेजुएशन के आखिरी वर्ष आते-आते मैंने दिल्ली की ट्रेन पकड़ी और यहां पहुंच गया। आव देखा न ताव, दिल्ली NCR में बड़े-बड़े मीडिया समूहों के दफ्तरों के बाहर अपना बायोडेटा डाल कर प्रयास में जुट गया। काफी धैर्य के बाद ZEE मीडिया समूह से जुड़ने का मौका मिला। मेरे पत्रकारिता के सफर की शुरुआत टेलीविजन के इनपुट डिपार्टमेंट से हुई। यहां मैं असाइनमेंट डेस्क पर था। कुछ महीनों तक खुद को इस समूह के साथ जोड़े रखने के बाद वर्ष 2015 में मैंने प्रिंट मीडिया का रुख कर लिया और ALL RIGHTS नाम की मैगज़ीन के साथ जुड़ गया। बतौर विशेष संवाददाता (Special Correspondent) मेरे कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई थी। मैं उन दिनों देशभर के अलग-अलग लोकसभा क्षेत्र के सांसदों, केंद्रीय मंत्रियों और दिल्ली सरकार के विधायकों और मंत्रियों का साक्षात्कार करता था। मैगज़ीन के संपादकीय पृष्ठ के लिए मैं लेख भी लिखता था। राजनीतिक खबरों से लगाव होने के चलते मैंने इस बीट को ही अपना हमसाया बना लिया। मैगजीन के बाद फिर टेलीविजन का रुख किया और इसी साल दोबारा ज़ी मीडिया से जुड़ गया। यहां साढ़े 3 सालों तक काम करने के बाद मैंने डिजिटल मीडिया में कदम रखने की ठान ली। रिपब्लिक भारत की लॉन्चिंग से पहले मुझे इसकी वेबसाइट से जुड़ने का मौका मिला। रिपब्लिक से जुड़ने के साथ ही मैंने दिल्ली छोड़कर मुंबई का रुख कर लिया। समंदर किनारे बसे इस शहर में मैंने डिजिटल पत्रकारिता के गुर को सीखा। इस संस्थान में मुझे रिपोर्टर के तौर पर मौका दिया था। कुछ ही महीने बाद मैं वापस दिल्ली आ गया और मैंने न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में एसोसिएट प्रोड्यूसर और रिपोर्टर की भूमिका में काम किया। चंद महीने बाद ही ज़ी मीडिया समूह के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम करने का अवसर मिला। ज़ी हिन्दुस्तान के लिए मैंने स्पेशल खबरों पर काम किया और इस समूह का पहला डिजिटल रिपोर्टर बन गया। इसके बाद मुझे वीडियो सेक्शन का हेड बना दिया गया। मैंने चुनावी कवरेज की, ग्राउंड रिपोर्टिंग की और साथ ही साथ वीडियो सेक्शन को नए शिखर पर पहुंचाने की कोशिश की। मैं कविताएं और किस्से-कहानियां भी लिखता रहता हूं। पढ़ाई के दौरान ही मैंने दो किताबें भी लिखी, एक नॉवेल और दूसरी पोएट्री बुक। पत्रकारिता में रहते हुए मैंने कई "स्टिंग ऑपरेशन" भी किए। मेरे सफर को और भी खूबसूरत बनाने के लिए टाइम्स समूह ने मुझे मौका दिया। मैं जुलाई, 2023 में इस संस्थान से जुड़ा और मुझे मेन डेस्क पर खबरों से दो-चार होते रहने की जिम्मेदारी सौंपी गई। राजनीतिक विश्लेषण के साथ विस्तार से खबरों को परोसता हूं और अपने पाठकों को कुछ नया देने का प्रयास करता हूं।

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