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अब कितना अहम होगा शरद पवार का रोल? मराठा चाणक्य पर टिकी 'INDIA' की निगाहें

Plan of Sharad Pawar: माना जा रहा है कि 83 वर्षीय दिग्गज नेता विपक्षी गठबंधन की भविष्य की रणनीति बनाने में अहम भूमिका निभा सकते हैं। चुनावी परिणाम के बाद विपक्षी गठबंधन INDIA में शामिल पार्टियां तमाम रणनीतियां तैयार करने में जुट गई हैं। सभी की निगाहें राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एसपी) के अध्यक्ष शरद पवार पर टिकी हैं।

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शरद पवार का क्या होगा प्लान?

Photo : Times Now Digital

Political News: लोकसभा चुनाव 2024 के नतीजे आ चुके हैं, भले ही भाजपा देश में सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है, लेकिन उसके खाते में बहुमत के आंकड़े 272 से 32 सीटें कम आई हैं। हालांकि एनडीए को 292 सीटें हासिल हुई हैं, ऐसे में नरेंद्र मोदी सरकार की एक बार फिर वापसी होती दिख रही है। हालांकि विपक्षी दलों के गठबंधन इंडियन नेशनल डेवलपमेंट इंक्लूजिव अलायंस (INDIA) भी सियासी जोड़तोड़ में जुट गई है।

शरद पवार की रणनीति पर होगी सभी की निगाहें

लोकसभा चुनाव परिणाम के बाद विपक्षी गठबंधन INDIA में शामिल पार्टियां तमाम रणनीतियां तैयार करने में जुट गई हैं। इस बीच सभी की निगाहें राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एसपी) के अध्यक्ष शरद पवार पर टिकी हैं। माना जा रहा है कि 83 वर्षीय दिग्गज नेता विपक्षी गठबंधन की भविष्य की रणनीति बनाने में अहम भूमिका निभा सकते हैं। शरद पवार इस वक्त दिल्ली में हैं, उन्होंने चुनावी नतीजों को लेकर कहा कि लोकसभा चुनाव परिणामों ने दिखा दिया है कि देश में स्थिति राजनीतिक बदलाव के लिए अनुकूल है। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि विपक्षी गठबंधन के केंद्र में सरकार बनाने की संभावना नहीं है।

अक्सर चौंकाने के लिए जाने जाते हैं शरद पवार

यूं ही शरद पवार को राजनीति का चाणक्य नहीं कहा जाता है। 38 साल की उम्र में जब पवार वर्ष 1978 में महाराष्ट्र के सबसे युवा मुख्यमंत्री बने थे, तो उन्होंने बड़ी घातक चाल चली थी। उस वक्त वसंतराव दादा पाटील सूबे के मुख्यमंत्री थे, उनकी सरकार में पवार उद्योग मंत्री थे। सीएम पाटील ने पवार को लंच के लिए अपने घर बुलाया। इसी बीच शरद पवार ने खाते वक्त सीएम पाटील से कहा, दादा भूल चूक माफ करना...। इसके जवाब में वसंतदादा ने कहा- तू बच्चा है अपना। हालांकि उन्हें ये मालूम नहीं था कि शरद पवार किस बात की माफी मांग रहे हैं।

पवार सीएम के घर से निकलते हैं और शाम होते-होते उनके 38 विधायक तोड़ लेते हैं। वसंतदादा पाटील के होश फाख्ता हो गए। उस वक्त चंद्रशेखर की पार्टी के साथ मिलकर उन्होंने महाराष्ट्र में नई सरकार बनाई और खुद सीएम बन गए। शरद पवार को हल्के में आंकना आसान नहीं है। साल 2019 में पवार के साथ उनके भतीजे अजित पवार ने धोखा करने की कोशिश की, जिसके बाद उन्होंने कुछ ही घंटों में उन्हें लाइन पर ला दिया। इसके बाद हाल ही में अजित पवार ने शरद पवार की पार्टी तोड़ ली। इस बार के चुनावी नतीजों में उन्होंने ये समझा दिया कि आखिर असली एनसीपी कौन है।

तीसरी बार सरकार बनाने के लिए तैयार हैं मोदी

लोकसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) नीत राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) के बहुमत के जादुई आंकड़े को पार करने के बाद प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी तीसरी बार सरकार बनाने को तैयार हैं। इस चुनाव में राजग और ‘इंडिया’ गठबंधन के बीच कड़ा मुकाबला था और इसे मोदी की लोकप्रियता पर जनमत संग्रह के रूप में पेश किया गया था।

क्या हो सकता है शरद पवार का अगला कदम?

इस बीच राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एसपी) के प्रमुख शरद पवार ने बुधवार को कहा कि सरकार गठन के वास्ते ‘इंडिया’ गठबंधन के लिए संख्याबल जुटाने को लेकर तेलुगू देशम पार्टी (तेदेपा) या जनता दल यूनाइटेड (जदयू) से संपर्क करने के मुद्दे पर इस गठबंधन के अंदर अभी कोई चर्चा नहीं हुई है। उनका यह बयान लोकसभा चुनाव नतीजे पर चर्चा करने के लिए आज शाम यहां कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के निवास पर होने वाली ‘इंडिया’ गठबंधन की बैठक से पहले आया है। इस बैठक में इस पर भी चर्चा होगी कि सरकार गठन के लिए संख्याबल जुटाने के मकसद से जदयू और तेदेपा को साथ लाया जाए या नहीं।

लोकसभा चुनाव परिणाम पर अपनी बात रखते हुए पवार (83) ने कहा कि मोदी सरकार के कामकाज के प्रति आक्रोश के अलावा मतदाता बढ़ती महंगाई, किसानों की मुसीबतों और बढ़ती बेरोजगारी जैसे मुद्दों से निपटने के उसके तौर तरीकों से भी नाराज थे। जब उनसे ‘इंडिया’ गठबंधन के वास्ते संख्याबल जुटाने के सिलसिले में तेदेपा या जदयू से संपर्क करने के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा कि इस गठबंधन में अब तक इस पर कोई ऐसी चर्चा नहीं हुई है। उन्होंने कहा, ‘हमने इस पर अब तक कोई बातचीत नहीं की है।’ पवार ने कहा कि गठबंधन के नेता बुधवार को बैठक कर रहे हैं और वे सामूहिक निर्णय लेंगे।

उन्होंने कहा , 'मेरी कोई व्यक्तिगत राय नहीं है। लेकिन हम जो भी निर्णय लेंगे वह सामूहिक निर्णय होगा।' ऐसी संभावना है कि पूर्व केंद्रीय मंत्री पवार इस विपक्षी गठबंधन की भावी कार्ययोजना तय करने में अहम भूमिका निभा सकते हैं। उनकी पार्टी राकांपा (शरदचंद्र पवार) ने महाराष्ट्र में लोकसभा की 48 में से 10 पर चुनाव लड़ा और आठ पर वह विजयी रही।

Ayush Sinha
आयुष सिन्हाauthor

मैं टाइम्स नाउ नवभारत (Timesnowhindi.com) से जुड़ा हुआ हूं। कलम और कागज से लगाव तो बचपन से ही था, जो धीरे-धीरे आदत और जरूरत बन गई। मुख्य धारा की पत्रकारिता से जुड़े हुए 10 साल पूरे हो चुके हैं। लोकसभा चुनाव 2014 से पहले ही मैंने पत्रकारिता की पढ़ाई के बीच में ही देश की राजधानी दिल्ली आने की ठान ली थी। उससे पहले मैंने कभी ये सोचा तक नहीं था कि मैं बनारस बोले तो वाराणसी शहर से बाहर भी जा सकता हूं। जी हां, मेरा नाता काशी से है। जन्म के साथ-साथ शिक्षा दीक्षा भी बनारस में ही हुई। राष्ट्रपिता मोहनदास करमचंद गांधी (बापू) द्वारा स्थापित किए गए विश्वविद्यालय- 'महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ' से मैंने पत्रकारिता में स्नातक किया है। ग्रेजुएशन के दौरान ही विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के अध्यापकों ने बड़ी ही सख्ती से मेरी नक्काशी करने की कोशिश की। ग्रेजुएशन के आखिरी वर्ष आते-आते मैंने दिल्ली की ट्रेन पकड़ी और यहां पहुंच गया। आव देखा न ताव, दिल्ली NCR में बड़े-बड़े मीडिया समूहों के दफ्तरों के बाहर अपना बायोडेटा डाल कर प्रयास में जुट गया। काफी धैर्य के बाद ZEE मीडिया समूह से जुड़ने का मौका मिला। मेरे पत्रकारिता के सफर की शुरुआत टेलीविजन के इनपुट डिपार्टमेंट से हुई। यहां मैं असाइनमेंट डेस्क पर था। कुछ महीनों तक खुद को इस समूह के साथ जोड़े रखने के बाद वर्ष 2015 में मैंने प्रिंट मीडिया का रुख कर लिया और ALL RIGHTS नाम की मैगज़ीन के साथ जुड़ गया। बतौर विशेष संवाददाता (Special Correspondent) मेरे कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई थी। मैं उन दिनों देशभर के अलग-अलग लोकसभा क्षेत्र के सांसदों, केंद्रीय मंत्रियों और दिल्ली सरकार के विधायकों और मंत्रियों का साक्षात्कार करता था। मैगज़ीन के संपादकीय पृष्ठ के लिए मैं लेख भी लिखता था। राजनीतिक खबरों से लगाव होने के चलते मैंने इस बीट को ही अपना हमसाया बना लिया। मैगजीन के बाद फिर टेलीविजन का रुख किया और इसी साल दोबारा ज़ी मीडिया से जुड़ गया। यहां साढ़े 3 सालों तक काम करने के बाद मैंने डिजिटल मीडिया में कदम रखने की ठान ली। रिपब्लिक भारत की लॉन्चिंग से पहले मुझे इसकी वेबसाइट से जुड़ने का मौका मिला। रिपब्लिक से जुड़ने के साथ ही मैंने दिल्ली छोड़कर मुंबई का रुख कर लिया। समंदर किनारे बसे इस शहर में मैंने डिजिटल पत्रकारिता के गुर को सीखा। इस संस्थान में मुझे रिपोर्टर के तौर पर मौका दिया था। कुछ ही महीने बाद मैं वापस दिल्ली आ गया और मैंने न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में एसोसिएट प्रोड्यूसर और रिपोर्टर की भूमिका में काम किया। चंद महीने बाद ही ज़ी मीडिया समूह के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम करने का अवसर मिला। ज़ी हिन्दुस्तान के लिए मैंने स्पेशल खबरों पर काम किया और इस समूह का पहला डिजिटल रिपोर्टर बन गया। इसके बाद मुझे वीडियो सेक्शन का हेड बना दिया गया। मैंने चुनावी कवरेज की, ग्राउंड रिपोर्टिंग की और साथ ही साथ वीडियो सेक्शन को नए शिखर पर पहुंचाने की कोशिश की। मैं कविताएं और किस्से-कहानियां भी लिखता रहता हूं। पढ़ाई के दौरान ही मैंने दो किताबें भी लिखी, एक नॉवेल और दूसरी पोएट्री बुक। पत्रकारिता में रहते हुए मैंने कई "स्टिंग ऑपरेशन" भी किए। मेरे सफर को और भी खूबसूरत बनाने के लिए टाइम्स समूह ने मुझे मौका दिया। मैं जुलाई, 2023 में इस संस्थान से जुड़ा और मुझे मेन डेस्क पर खबरों से दो-चार होते रहने की जिम्मेदारी सौंपी गई। राजनीतिक विश्लेषण के साथ विस्तार से खबरों को परोसता हूं और अपने पाठकों को कुछ नया देने का प्रयास करता हूं।

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