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हरियाणा चुनाव से पहले अनिल विज ने बढ़ाई BJP की टेंशन, मुख्यमंत्री पद के लिए ठोका दावा

Haryana Assembly elections: भाजपा नेता अनिल विज ने कहा, मैं हरियाणा का वरिष्ठ विधायक हूं। मैंने आज तक पार्टी से कभी कुछ नहीं मांगा, लेकिन इस बार मुझ पर पूरे हरियाणा और अंबाला की जनता का मुख्यमंत्री बनने के लिए बहुत दबाव पड़ रहा है।

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भाजपा के वरिष्ठ नेता अनिल विज।

Photo : ANI

Anil Vij: हरियाणा में विधानसभा चुनाव से पहले वरिष्ठ नेता और अंबाला से विधायक अनिल विज ने भारतीय जनता पार्टी की टेंशन बढ़ा दी है। रविवार को उन्होंने चुनाव के बाद मुख्यमंत्री पद के लिए दावेदारी की बात कही है। अनिल विज ने अंबाला में अपने चुनाव कार्यालय में संकल्प पत्र जारी करने के दौरान यह बात कही है। भाजपा नेता ने कहा, मैं हरियाणा का वरिष्ठ विधायक हूं। मैं छह बार विधायक बन चुका हूं और सातवीं बार चुनाव लड़ रहा हूं। मैंने आज तक पार्टी से कभी कुछ नहीं मांगा, लेकिन इस बार मुझ पर पूरे हरियाणा और अंबाला की जनता का मुख्यमंत्री बनने के लिए बहुत दबाव पड़ रहा है।

उन्होंने आगे कहा, इसलिए इस बार मैं वरिष्ठ नेता होने के दम पर मुख्यमंत्री पद का दावा करूंगा। वो मुझे सीएम बनाते हैं या नहीं ये उनका अधिकार क्षेत्र है। यदि मुझे मुख्यमंत्री बना दिया तो मैं हरियाणा की तकदीर बदल दूंगा, मैं हरियाणा की तस्वीर बदल दूंगा। बता दें कि अनिल विज हरियाणा के अंबाला से छह बार से विधायक हैं। इस बार वह सातवीं बार चुनावी मैदान में हैं। इसके अलावा वह हरियाणा सरकार में गृहमंत्री भी रह चुके हैं।

2019 में भी थे दावेदार

ज्ञात हो कि 2019 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने 40 सीटें जीती थीं। तब भी शुरू में उनके सीएम बनने की खबरें पर्दे के पीछे चलती रहीं। हालांकि, बहुमत से छह सीटें कम रहने के कारण भाजपा को दुष्यंत चौटाला के नेतृत्व वाली जननायक जनता पार्टी (जेजेपी) के साथ गठबंधन करना पड़ा था और पार्टी ने फिर से मनोहर लाल खट्टर को सीएम बना दिया था। इसके अलावा 2019 में कांग्रेस ने विधानसभा चुनाव के दौरान 31 सीटें जीती थीं। वहीं इंडियन नेशनल लोकदल (आईएनएलडी) ने 10 सीटों पर जीत हासिल की थी, जबकि सात निर्दलीय, आईएनएलडी और हरियाणा लोकहित पार्टी के एक-एक उम्मीदवार ने भी जीत दर्ज की थी। भाजपा ने साल 2014 के विधानसभा चुनाव में 47 सीटें जीतकर राज्य में पहली बार सरकार बनाई थी।

Pranjul Srivastava
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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