Ganderbal Jammu Kashmir Vidhan Sabha Chunav 2024: जम्मू कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटने के बाद राज्य में पहली बार विधानसभा चुनाव हो रहे हैं। विधानसभा की 90 सीटों में से कई ऐसे सीटें हैं जिन पर दिग्गज चुनाव लड़ रहे हैं। इन्हीं सीटों में से एक सीट गांदरबल है। इस सीट पर जम्मू कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री और नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेता उमर अब्दुल्ला चुनाव मैदान में हैं। गांदरबल के अलावा वह बडगाम सीट से भी चुनाव लड़ रहे हैं। गांदरबल को नेशनल कॉन्फ्रेंस का गढ़ माना जाता है। इस सीट से अब्दुल्ला परिवार की तीन पीढ़िया चुनी जाती रही हैं। नेशनल कॉन्फ्रेंस के संस्थापक शेख मोहम्मद अब्दुल्ला 1977 में इस सीट पर विजयी हुए। इसके बाद 1983, 1987 और 1996 में फारूक अब्दुल्ला इस सीट से चुने गए। 2008 के विधानसभा चुनाव में इस सीट से उमर विजयी हुए।
पीडीपी के उम्मीदवार से मुकाबला
इस सीट पर उमर का मुकाबला पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) के बशीर अहमद मीर से है। यही नहीं कश्मीर के मौलवी सरजन अहमद वगाय उर्फ सर्जन बरकती भी इस सीट से ताल ठोक रहे हैं। बरकती जेल से चुनाव लड़ रहे हैं। उमर ने 2024 का लोकसभा चुनाव बारामूला सीट से लड़ा था लेकिन इस सीट पर उन्हें हार का सामना करना पड़ा। उमर को तिहाड़ जेल में बंद राशिद इंजीनियर ने हराया। राशिद की पार्टी इस बार चुनाव लड़ रही है। पार्टी का चुनाव प्रचार करने के लिए राशिद जमानत पर बाहर हैं।
बडगाम सीट पर भी कड़ी टक्कर
बडगाम सीट पर भी उमर अब्दुल्ला की राह आसान नहीं है। इस सीट पर उनका मुकाबला पीडीपी के उम्मीवार आगा सईद मुंतजिर मेहदी और आवामी नेशनल कॉन्फ्रेंस के आगा सईद अहमद मूसवी से है। इनके अलावा सात अन्य उम्मीदवार भी हैं जिन्होंने उमर की मुश्किलें बढ़ाई हैं।
2014 का चुनाव रिजल्ट
2014 के विधानसभा चुनाव में यह सीट जेकेएनसी के खाते में गई। इस सीट पर इश्फाक अहमद शेख विजयी हुए। उन्होंने मात्र 597 वोटों से जीत जर्द की। शेख को 19,478 वोट मिले। उन्होंने जेकेपीडीपी के उम्मीदवार काजी मोहम्मद अफजल को शिकस्त दी। अफजल को इस सीट पर 18,881 वोट मिले। निर्दलीय उम्मीदवार शेख गुलाम अहमद 6009 वोटों के साथ तीसरे स्थान पर रहे। कांग्रेस के प्रत्याशी मोहम्मद यूसुफ भट को केवल 3,190 वोट मिले। वह चौथे स्थान पर रहे।
उमर के लिए प्रतिष्ठा की लड़ाई
अब्दुल्ला परिवार का गढ़ माने जाने वाली गांदरबल विधानसभा सीट उमर अब्दुल्ला के लिए प्रतिष्ठा की लड़ाई बन गई है। गांदरबल सीट को लेकर उमर अब्दुल्ला किस तरह मशक्कत रहे हैं, इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि उन्होंने नामांकन भरते वक्त लोगों से एक भावुक अपील की थी। उन्होंने अपनी टोपी उतारकर अपनी हथेलियों में पकड़कर लोगों से उन्हें वोट देने का आग्रह किया और कहा कि उनका सम्मान उनके (लोगों के) हाथों में है। इतना ही नहीं उमर के बेटे ने भी अपने पिता को जिताने के लिए पूरी ताकत लगा रखी है।
