Maharashtra Election: महाराष्ट्र विधानसभा 2024 के लिए भले ही तारीखों का ऐलान न हुआ हो, लेकिन जमीन पर पार्टियां एक्टिव दिख रही हैं, जोड़-तोड़ चल रहा है। एनसीपी (शरद गुट) के मुखिया शरद पवार ने एक बार फिर से बीजेपी को झटका दे दिया है। बीजेपी नेता बापुसाहेब पाठारे शरद पवार के नेतृत्व वाली एनसीपी में शामिल हो गए हैं।
पुणे के बड़े नेता हैं बापूसाहेब पठारे
पुणे के राजनीतिक परिदृश्य में बापूसाहेब पठारे बडे़ नाम हैं। पठारे 2009 से 2014 तक वडगांव शेरी विधानसभा क्षेत्र के विधायक रह चुके हैं। हाल ही में उन्होंने शरद पवार के नेतृत्व वाली राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) में शामिल होने और उसी निर्वाचन क्षेत्र से आगामी चुनाव लड़ने के अपने निर्णय की घोषणा की थी। जिसके बाद आज उन्होंने शरद पवार का दामन थाम लिया।
बापूसाहेब पठारे की राजनीतिक यात्रा
पठारे शुरुआत में अविभाजित एनसीपी से जुड़े, वे 2009 में विधायक चुने गए, लेकिन 2014 के चुनावों में भाजपा के जगदीश मुलिक से अपनी सीट हार गए। पठारे ने 2019 का चुनाव नहीं लड़ा और बाद में भाजपा में शामिल हो गए। अब वापस उसी पार्टी में आ गए हैं, जहां से उन्होंने राजनीति की शुरुआत की थी, हालांकि अब एनसीपी टूट चुकी है और असली एनसीपी का बैनर शरद पवार के भतीजे अजीत पवार के पास है।
बीजेपी के लिए मुश्किलें
वडगांव शेरी में स्थिति इस समय बागियों से बीजेपी के महायुति गठबंधन पर खतरा है, महायुति गठबंधन के भीतर सीट के लिए लड़ाई गर्मा रही है। एनसीपी के अजित पवार गुट के मौजूदा विधायक सुनील टिंगरे को भाजपा कार्यकर्ताओं के विरोध का सामना करना पड़ रहा है। हाल ही में, वडगांव शेरी में भाजपा कार्यकर्ताओं ने महाराष्ट्र विधान परिषद सदस्य पंकजा मुंडे को पत्र लिखकर कहा कि अगर महायुति द्वारा आगामी चुनावों के लिए टिंगरे को नामित किया जाता है, तो वे उनके लिए प्रचार करने में अनिच्छा व्यक्त करेंगे। उन्होंने जगदीश मुलिक को अपना समर्थन दिया है, जिनके बारे में उनका मानना है कि उन्होंने क्षेत्र में भाजपा की विचारधारा को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
