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Delhi Vidhan Sabha Chunav 2025: दिल्ली को ‘‘आप-दा’’ से मुक्ति दिलाने का आह्वान, BJP की ‘परिवर्तन रैली’ में पीएम मोदी ने कही ये 5 बड़ी बात

Delhi Assembly Election 2025: प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि दिल्ली में भाजपा की सरकार बनी तो जनहित की कोई भी योजना नहीं रोकी जाएगी। पीएम मोदी ने भाजपा की परिवर्तन रैली में कहा कि दिल्ली के लोग अब कह रहे हैं, ‘आपदा नहीं सहेंगे, बदल कर रहेंगे’। यह आरोप गलत है कि केंद्र उन्हें (आप सरकार) काम नहीं करने देता, ‘शीश महल’ उनके झूठ का उदाहरण है।

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नरेंद्र मोदी, प्रधानमंत्री।

Delhi Vidhan Sabha Chunav 2025: प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने रविवार को दिल्ली में आम आदमी पार्टी (आप) के दस साल के शासन को ‘‘आपदा’’ करार दिया करार दिया और कहा कि इसके सत्ता से हटने से ही राजधानी में सुशासन का राज स्थापित होगा। राजधानी के रोहिणी में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की ‘परिवर्तन रैली’ को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने पार्टी उम्मीदवारों के लिए आगामी विधानसभा चुनाव में दिल्ली का दिल जीतने का सबसे ‘‘स्वर्णिम अवसर’’ बताया और जनता से दिल्ली को ‘‘आप-दा’’ से मुक्ति दिलाने का आह्वान किया।

'किसी ‘आप-दा’ से कम नहीं है दिल्ली सरकार'

उन्होंने कहा, ‘‘बीते 10 साल में दिल्ली ने जिस तरह की राज्य सरकार देखी है, वो किसी ‘आप-दा’ से कम नहीं है। यह एहसास आज दिल्ली वालों को अच्छे से हो चुका है। इसलिए अब दिल्ली में एक ही आवाज़ गूंज रही है- ‘आप-दा’ नहीं सहेंगे... बदल के रहेंगे।’’ प्रधानमंत्री ने मतदाताओं से कहा कि दिल्ली के उज्ज्वल भविष्य के लिए वह भाजपा को अवसर दें क्योंकि केंद्र की सत्ताधारी पार्टी ही राजधानी का विकास कर सकती है।

पीएम मोदी ने दिल्ली में जीत का विश्वास जताया

पूर्वोत्तर भारत के राज्यों, ओडिशा, महाराष्ट्र सहित कई राज्यों में भाजपा की चुनावी जीत का जिक्र करते हुए मोदी ने विश्वास जताया कि इस बार दिल्ली विधानसभा चुनाव में भी भाजपा की जीत होगी। उन्होंने कहा, ‘‘भाजपा ही दिल्ली को दुनिया की बेहतरीन राजधानी का गौरव दिला सकती है। भाजपा ने अपने बेहतरीन उम्मीदवार उतारे हैं। मैं सभी उम्मीदवारों से भी कहूंगा कि दिल्ली का दिल जीतने का यह सबसे स्वर्णिम अवसर है। आप जुट जाइए और दिल्ली को ‘आप-दा’ से मुक्ति दिलाइए।’’

'वह दिल्ली के लोगों का विकास नहीं कर सकते'

मोदी ने कहा कि जिस ‘आप-दा’ सरकार के पास दिल्ली के लिए कोई दृष्टिकोण न हो और जिसे दिल्ली की परवाह न हो, वह दिल्ली के लोगों का विकास नहीं कर सकते। उन्होंने कहा कि आज भी दिल्ली को आधुनिक बनाने के लिए जितने भी काम हैं, वह केंद्र की भाजपा सरकार ही कर रही है।

'आप-दा वालों के काम का कोई हिसाब नहीं है'

प्रधानमंत्री ने कहा, ‘‘आप-दा वालों के काम का कोई हिसाब नहीं है, लेकिन इनके कारनामे बेहिसाब हैं। ये तब होता है जब नीयत में खोट होता है और जनता के प्रति निष्ठा नहीं होती है। ये ‘आप-दा’ वाले दिल्ली चुनाव में अपनी हार सामने देखकर बौखला गए हैं, झूठ फैला रहे हैं।’’

'इनके झूठ का उदाहरण इनका शीशमहल है'

मोदी ने कहा कि दिल्ली की आम आदमी पार्टी की सरकार झूठे आरोप लगाती है कि केंद्र सरकार उसे काम नहीं करने देती है या फिर केंद्र सरकार उन्हें पैसे नहीं देती है। उन्होंने कहा, ‘‘... ये कितने बड़े झूठे हैं...इसका उदाहरण इनका शीशमहल है। आज ही एक बड़े अखबार ने सीएजी रिपोर्ट के आधार पर शीशमहल पर हुए खर्च का खुलासा किया है। जब दिल्ली के लोग कोरोना से जूझ रहे थे, तब दिल्ली के लोग ऑक्सीजन और दवाओं के लिए भटक रहे थे, तब इन लोगों का पूरा फोकस अपना शीशमहल बनवाने पर था।’’ मोदी ने कहा, ‘‘इन्होंने शीशमहल का भारी भरकम बजट बनाया। यही इनकी सच्चाई है... इन्हें दिल्ली के लोगों की कोई परवाह नहीं है।’’

Ayush Sinha
आयुष सिन्हाauthor

मैं टाइम्स नाउ नवभारत (Timesnowhindi.com) से जुड़ा हुआ हूं। कलम और कागज से लगाव तो बचपन से ही था, जो धीरे-धीरे आदत और जरूरत बन गई। मुख्य धारा की पत्रकारिता से जुड़े हुए 10 साल पूरे हो चुके हैं। लोकसभा चुनाव 2014 से पहले ही मैंने पत्रकारिता की पढ़ाई के बीच में ही देश की राजधानी दिल्ली आने की ठान ली थी। उससे पहले मैंने कभी ये सोचा तक नहीं था कि मैं बनारस बोले तो वाराणसी शहर से बाहर भी जा सकता हूं। जी हां, मेरा नाता काशी से है। जन्म के साथ-साथ शिक्षा दीक्षा भी बनारस में ही हुई। राष्ट्रपिता मोहनदास करमचंद गांधी (बापू) द्वारा स्थापित किए गए विश्वविद्यालय- 'महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ' से मैंने पत्रकारिता में स्नातक किया है। ग्रेजुएशन के दौरान ही विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के अध्यापकों ने बड़ी ही सख्ती से मेरी नक्काशी करने की कोशिश की। ग्रेजुएशन के आखिरी वर्ष आते-आते मैंने दिल्ली की ट्रेन पकड़ी और यहां पहुंच गया। आव देखा न ताव, दिल्ली NCR में बड़े-बड़े मीडिया समूहों के दफ्तरों के बाहर अपना बायोडेटा डाल कर प्रयास में जुट गया। काफी धैर्य के बाद ZEE मीडिया समूह से जुड़ने का मौका मिला। मेरे पत्रकारिता के सफर की शुरुआत टेलीविजन के इनपुट डिपार्टमेंट से हुई। यहां मैं असाइनमेंट डेस्क पर था। कुछ महीनों तक खुद को इस समूह के साथ जोड़े रखने के बाद वर्ष 2015 में मैंने प्रिंट मीडिया का रुख कर लिया और ALL RIGHTS नाम की मैगज़ीन के साथ जुड़ गया। बतौर विशेष संवाददाता (Special Correspondent) मेरे कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई थी। मैं उन दिनों देशभर के अलग-अलग लोकसभा क्षेत्र के सांसदों, केंद्रीय मंत्रियों और दिल्ली सरकार के विधायकों और मंत्रियों का साक्षात्कार करता था। मैगज़ीन के संपादकीय पृष्ठ के लिए मैं लेख भी लिखता था। राजनीतिक खबरों से लगाव होने के चलते मैंने इस बीट को ही अपना हमसाया बना लिया। मैगजीन के बाद फिर टेलीविजन का रुख किया और इसी साल दोबारा ज़ी मीडिया से जुड़ गया। यहां साढ़े 3 सालों तक काम करने के बाद मैंने डिजिटल मीडिया में कदम रखने की ठान ली। रिपब्लिक भारत की लॉन्चिंग से पहले मुझे इसकी वेबसाइट से जुड़ने का मौका मिला। रिपब्लिक से जुड़ने के साथ ही मैंने दिल्ली छोड़कर मुंबई का रुख कर लिया। समंदर किनारे बसे इस शहर में मैंने डिजिटल पत्रकारिता के गुर को सीखा। इस संस्थान में मुझे रिपोर्टर के तौर पर मौका दिया था। कुछ ही महीने बाद मैं वापस दिल्ली आ गया और मैंने न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में एसोसिएट प्रोड्यूसर और रिपोर्टर की भूमिका में काम किया। चंद महीने बाद ही ज़ी मीडिया समूह के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम करने का अवसर मिला। ज़ी हिन्दुस्तान के लिए मैंने स्पेशल खबरों पर काम किया और इस समूह का पहला डिजिटल रिपोर्टर बन गया। इसके बाद मुझे वीडियो सेक्शन का हेड बना दिया गया। मैंने चुनावी कवरेज की, ग्राउंड रिपोर्टिंग की और साथ ही साथ वीडियो सेक्शन को नए शिखर पर पहुंचाने की कोशिश की। मैं कविताएं और किस्से-कहानियां भी लिखता रहता हूं। पढ़ाई के दौरान ही मैंने दो किताबें भी लिखी, एक नॉवेल और दूसरी पोएट्री बुक। पत्रकारिता में रहते हुए मैंने कई "स्टिंग ऑपरेशन" भी किए। मेरे सफर को और भी खूबसूरत बनाने के लिए टाइम्स समूह ने मुझे मौका दिया। मैं जुलाई, 2023 में इस संस्थान से जुड़ा और मुझे मेन डेस्क पर खबरों से दो-चार होते रहने की जिम्मेदारी सौंपी गई। राजनीतिक विश्लेषण के साथ विस्तार से खबरों को परोसता हूं और अपने पाठकों को कुछ नया देने का प्रयास करता हूं।

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