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मिजोरम में किंग मेकर बनेगी 'कांग्रेस'!, एग्जिट पोल ने दिए बड़े संकेत

  • Authored by: प्रांजुल श्रीवास्तव
  • Updated Dec 1, 2023, 12:09 PM IST

Mizoram Exit Poll Results: अलग-अलग एजेंसियों के आंकड़ों को देखा जाए तो यहां सरकार बनाने के लिए पार्टियों को गठबंधन की जरूरत पड़ेगी, ऐसे में कांग्रेस यहां किंग मेकर की भूमिका में आ सकती है।

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मिजोरम एग्जिट पोल

Photo : Times Now Digital

Mizoram Exit Poll Results: उत्तर-पूर्वी राज्य मिजोरम की 40 विधानसभा सीटों पर 7 नवंबर को मतदान हुआ था। यहां सत्ताधारी मिजो नेशनल फ्रंट (एमएनएफ), जोराम पीपुल्स मूवमेंट और कांग्रेस के बीच मुकाबला देखा जा रहा था। इस राज्य में सत्ता में आने को बेताब कांग्रेस ने सभीा 40 सीटों पर प्रत्याशी खड़े किए थे, लेकिन मतदान के बाद जो एग्जिट पोल जारी हुए हैं, उसमें किसी पार्टी को बहुमत मिलता नहीं दिख रहा है। ऐसे में यहां त्रिशंकु विधानसभा के आसार लगाए जा रहे हैं।

मिजोरम विधानसभा की स्थिति को देखें तो यहां 40 विधानसभा सीटें हैं और किसी भी पार्टी को सत्ता में आने के लिए बहुमत के आंकड़े (21 सीटें) को छूना होगा। लेकिन गुरुवार को एग्जिट पोल के जो आंकड़े सामने आए, उसमें कोई भी पार्टी बहुमत तक पहुंचती नहीं दिखाई दे रही है। ऐसे में कांग्रेस यहां किंग मेकर की भूमिका निभा सकती है।

कैसी रही एग्जिट पोल की स्थिति

अगल-अलग एजेंसियों ने जो आंकड़े जारी किए है, उसमें किसी भी पार्टी को खुशखबरी मिलती नहीं दिख रही है। टाइम्स नाउ - ईटीजी ने सत्तारूढ़ एमएनएफ को 14 से 18 सीटें दी हैं, तो जेडपीएम को 10 से 14 सीटें मिलती दिख रही हैं। इसके अलावा कांग्रेस यहां 9 से 13 सीटें हासिल कर सकती है। वहीं जन की बात ने एमएनएफ को 10 से 14, कांग्रेस केा 5 से 9 और जेडीपएम को 15 से 25 सीटें मिलने आ अनुमान जताया है। सिर्फ आज तक- एक्सिस माय इंउिया के एग्जिट पोल में जेडपीएम को 28 से 35 सीटें मिलती दिख रही हैं। इसके अनुसार पार्टी यहां सत्ता में आ रही है। वहीं एमएनएफ 3 से 7 सीटों तक सिमट सकती है। कांग्रेस को 2 से 4 सीटें मिल सकती हैं।

कांग्रेस के बिना सत्ता अधूरी!

ज्यादातर एजेंसियों के आंकड़ों को देखा जाए तो यहां सरकार बनाने के लिए पार्टियों को गठबंधन की जरूरत पड़ेगी, ऐसे में कांग्रेस यहां किंग मेकर की भूमिका में आ सकती है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता प्रमोद तिवारी ने भी कहा है कि मिजोरम में हमारे बिना सरकार का गठन नहीं हो सकता है। उन्होंने कहा, यहां हम गठबंधन कर सरकार का गठन करेंगे।

प्रांजुल श्रीवास्तव
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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