NCP Clock Symbol Case: सुप्रीम कोर्ट ने अजित पवार की अगुवाई वाली एनसीपी को 36 घंटे के भीतर अखबारों में यह डिस्क्लेमर जारी करने को कहा कि उसे ‘घड़ी’ चुनाव चिन्ह आवंटित करने का मामला अदालत में विचाराधीन है। अदालत ने शरद पवार और अजित पवार गुटों से कहा कि वे अदालतों में अपनी ऊर्जा बर्बाद न करें, बल्कि मतदाताओं को लुभाएं।
36 घंटे के भीतर डिस्क्लेमर प्रकाशित करने का निर्देश
सुप्रीम कोर्ट ने महाराष्ट्र के उप मुख्यमंत्री अजित पवार के नेतृत्व वाले धड़े को निर्देश दिया कि वह मराठी सहित समाचार पत्रों में एक अस्वीकरण प्रकाशित करे कि घड़ी चुनाव चिन्ह के आवंटन का मुद्दा अदालत में लंबित है। अदालत के आदेश के 36 घंटे के भीतर अस्वीकरण को दैनिक समाचार पत्रों में प्रकाशित करने का निर्देश दिया गया है।
न्यायमूर्ति सूर्य कांत, न्यायमूर्ति दीपांकर दत्ता और न्यायमूर्ति उज्जल भुइयां की पीठ घड़ी चिन्ह के कथित उपयोग और दुरुपयोग पर शरद पवार और अजित पवार के नेतृत्व वाले गुटों की सुनवाई कर रही थी। अदालत ने दोनों समूहों को इसके बजाय मतदाताओं पर ध्यान केंद्रित करने का सुझाव दिया। सुप्रीम कोर्ट ने कहा, अदालतों में अपनी ऊर्जा बर्बाद न करें। आप दोनों को मतदाताओं को लुभाने का काम करना चाहिए।
अजित पवार गुट ने लगाया ये आरोप
अदालत ने अजित पवार गुट की ओर से पेश वरिष्ठ वकील बलबीर सिंह से 36 घंटे के भीतर मराठी समाचार पत्रों सहित समाचार पत्रों में एक प्रमुख अस्वीकरण देने को कहा। बलबीर सिंह ने दावा किया कि उम्मीदवारों ने अपना नामांकन दाखिल कर दिया है और नाम वापस लेने का चरण समाप्त हो गया है, लेकिन शरद पवार गुट पूरी चुनाव प्रक्रिया को बाधित करने का प्रयास कर रहा है।
शरद पवार गुट का प्रतिनिधित्व करने वाले वरिष्ठ वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने तर्क दिया कि घड़ी प्रतीक पिछले 30 वर्षों से अनुभवी नेता के साथ जुड़ा हुआ है और विरोधी पक्ष इसका दुरुपयोग करने की कोशिश कर रहा है। इसलिए, सिंघवी ने अजित पवार के नेतृत्व वाले समूह को एक नया प्रतीक तलाशने का निर्देश देने की मांग की।
