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चित्तौड़गढ़ सीट पर माथापच्ची! टिकट कटा तो मोदी-नड्डा की फोटो लगाकर चुनाव प्रचार कर रहा ये विधायक

Rajasthan Assembly Election 2023: राजस्थान के चित्तौड़गढ़ विधानसभा सीट से विधायक चंद्रभान सिंह आक्या को भाजपा ने इस बार टिकट नहीं दिया तो वो अपने अजब-गजब फैसले से इस सीट पर पार्टी की टेंशन बढ़ा रहे हैं। सवाल ये उठ रहा है कि क्या भाजपा उन्हें टिकट देने पर मजबूर हो जाएगी? आपको समीकरण समझाते हैं।

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क्या चंद्रभान सिंह आक्या को टिकट देने पर मजबूर होगी भाजपा?

Rajasthan Chunav: राजस्थान में विधानसभा चुनाव को लेकर सरगर्मी इस कदर बढ़ चुकी है कि भाजपा और कांग्रेस दोनों ही पार्टी की अंदरूनी कलह सामने आने लगी है। भाजपा में टिकट को लेकर काफी माथापच्ची देखी जा रही है। चित्तौड़गढ़ विधानसभा सीट पर इस बार बेहद दिलचस्प लड़ाई होने के आसार नजर आ रहे हैं। इस सीट पर भाजपा ने मौजूदा विधायक चंद्रभान सिंह आक्या का टिकट काटकर भैरो सिंह शेखावत के दामाद नरपत सिंह राजवी को उम्मीदवार बनाया गया। फिर वही हुआ जो सियासत का चरित्र है, भाजपा विधायक का टिकट कटा तो पहले उनके समर्थकों ने विरोध किया, इसके बाद उन्होंने पार्टी को अल्टीमेटम दिया, अब उन्होंने ये ऐलान कर दिया है कि आगामी 2 नवंबर को वो नामांकन भरेंगे। इतना ही नहीं उन्होंने टिकट नहीं मिलने के बाद भी अपने पोस्टर पर पीएम मोदी, भाजपा के चुनाव चिन्ह कमल और पार्टी अध्यक्ष जेपी नड्डा की फोटो लगाकर प्रचार करना शुरू कर दिया है।

चित्तौड़गढ़ के विधायक ने बढ़ाई भाजपा की टेंशन!

भाजपा की दूसरी लिस्ट जैसे ही जारी हुई, पार्टी के कई नेताओं की नाराजगी खुलकर सामने आ गई। सीटिंग विधायक चंद्रभान सिंह का टिकट कटने के बाद पहले तो उनके समर्थकों ने विरोध किया, मगर जैसे-जैसे वक्त बीतता गया उनके विरोध का तरीका भी बदलता चला गया। उन्होंने टिकट कटते ही ये ऐलान किया कि आपका चंद्रभान आपके विश्वास पर एक बार फिर खरा उतरेगा। चित्तौड़गढ़ विधानसभा क्षेत्र मेरा परिवार है और परिवार का उज्ज्वल भविष्य मेरी एकमात्र चिंता..!

Chittorgarh MLA Chandrabhan Singh Aakya

टिकट कटने के बावजूद मैदान में भाजपा विधायक।

क्या विधायक को टिकट देने पर मजबूर हो जाएगी भाजपा?

विधायक आक्या ने रैलियां कीं और कहा कि मेरे चित्तौड़गढ़वासियों इस "स्वाभिमान के संघर्ष" में आप सभी का साथ मैं कभी नहीं भूलूंगा। इसी कड़ी में उन्होंने बाबोसा भैरो सिंह शेखावत की 100 वीं जयंती पर भारत के प्रथम केंद्रीय सहकारिता मंत्री माननीय अमित शाह द्वारा देश में सहकारिता के क्षेत्र में किए गए कार्यों को मेरे द्वारा पुस्तक लिख कर टेबल बुक के रूप में प्रकाशित कर विमोचन किया। विजयादशमी के मौके पर विधायक चंद्रभान राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ चित्तौड़गढ़ नगर के पथसंचलन में शामिल हुए। सबसे खास बात तो ये कि उन्होंने ऐलान किया है कि वो दो नवम्बर को चित्तौड़गढ़ सीट से अपने दो नामांकन दाखिल करेंगे, जिसमें एक भाजपा से होगा और दूसरा निर्दलीय। उन्होंने चित्तौड़गढ़ विधानसभा कार्यालय बनाया है जिसमें भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा, पीएम मोदी और पार्टी के चुनाव चिन्ह वाली तस्वीरों वाले पोस्ट लगाए गए हैं।

Chittorgarh BJP MLA Chandrabhan Singh Aakya

टिकट कटने के बाद RSS के पथसंचलन चित्तौड़गढ़ विधायक।

टिकट काटे जाने पर समर्थकों ने किया प्रदर्शन

पार्टी ने बीते शनिवार को विधानसभा चुनाव के लिए 83 उम्मीदवारों की दूसरी सूची जारी की। इसमें पार्टी ने चित्तौड़गढ़ से नरपत सिंह राजवी को उम्मीदवार बनाया है। इसकी जानकारी मिलते ही चित्तौड़गढ़ से मौजूदा विधायक आक्या के समर्थक बड़ी संख्या में पार्टी के कार्यालय पर इकट्ठे हो गए एवं उन्होंने भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष सी पी जोशी के खिलाफ नारेबाजी की। इस दौरान उन्होंने कार्यालय पर लगे जोशी के पोस्टर को भी फाड़ दिया। पार्टी ने पांच बार के विधायक और भैरो सिंह शेखावत के दामाद राजवी को पहली सूची में उनकी मौजूदा सीट विद्याधर नगर सीट से टिकट नहीं दिया था। राजवी द्वारा नाराजगी जताए जाने एवं पारिवारिक विरासत के हवाले से पार्टी पर निशाना साधने के बाद पार्टी ने शनिवार को उन्हें चित्तौड़गढ़ से टिकट देने की घोषणा की जिसे 'नुकसान भरपाई' की कवायद के रूप में देखा जा रहा है।

सीपी जोशी से पुरानी दुश्मनी के चलते कटा टिकट

लगातार दो बार जीतने वाले आक्या के समर्थक खुलकर विरोध पर उतर आए हैं। आक्या ने मीडिया से बातचीत में आरोप लगाया कि चित्तौड़गढ़ से सांसद, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष जोशी उनसे पुरानी दुश्मनी रखते हैं इसलिए उनका टिकट काटा गया है। आक्या ने कहा कि क्षेत्र की जनता उनके साथ है और वह आगे के कदम के बारे में कार्यकर्ताओं के साथ चर्चा कर फैसला करेंगे। पार्टी के एक प्रवक्ता ने बयान जारी कर कहा कि राजवी को चित्तौड़गढ़ से भाजपा प्रत्याशी बनाए जाने पर स्थानीय कार्यकर्ताओं एवं पदाधिकारियों ने आतिशबाजी कर खुशी जताई। राजवी पहले भी चित्तौड़गढ़ से विधायक रह चुके हैं।

Ayush Sinha
आयुष सिन्हाauthor

मैं टाइम्स नाउ नवभारत (Timesnowhindi.com) से जुड़ा हुआ हूं। कलम और कागज से लगाव तो बचपन से ही था, जो धीरे-धीरे आदत और जरूरत बन गई। मुख्य धारा की पत्रकारिता से जुड़े हुए 10 साल पूरे हो चुके हैं। लोकसभा चुनाव 2014 से पहले ही मैंने पत्रकारिता की पढ़ाई के बीच में ही देश की राजधानी दिल्ली आने की ठान ली थी। उससे पहले मैंने कभी ये सोचा तक नहीं था कि मैं बनारस बोले तो वाराणसी शहर से बाहर भी जा सकता हूं। जी हां, मेरा नाता काशी से है। जन्म के साथ-साथ शिक्षा दीक्षा भी बनारस में ही हुई। राष्ट्रपिता मोहनदास करमचंद गांधी (बापू) द्वारा स्थापित किए गए विश्वविद्यालय- 'महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ' से मैंने पत्रकारिता में स्नातक किया है। ग्रेजुएशन के दौरान ही विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के अध्यापकों ने बड़ी ही सख्ती से मेरी नक्काशी करने की कोशिश की। ग्रेजुएशन के आखिरी वर्ष आते-आते मैंने दिल्ली की ट्रेन पकड़ी और यहां पहुंच गया। आव देखा न ताव, दिल्ली NCR में बड़े-बड़े मीडिया समूहों के दफ्तरों के बाहर अपना बायोडेटा डाल कर प्रयास में जुट गया। काफी धैर्य के बाद ZEE मीडिया समूह से जुड़ने का मौका मिला। मेरे पत्रकारिता के सफर की शुरुआत टेलीविजन के इनपुट डिपार्टमेंट से हुई। यहां मैं असाइनमेंट डेस्क पर था। कुछ महीनों तक खुद को इस समूह के साथ जोड़े रखने के बाद वर्ष 2015 में मैंने प्रिंट मीडिया का रुख कर लिया और ALL RIGHTS नाम की मैगज़ीन के साथ जुड़ गया। बतौर विशेष संवाददाता (Special Correspondent) मेरे कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई थी। मैं उन दिनों देशभर के अलग-अलग लोकसभा क्षेत्र के सांसदों, केंद्रीय मंत्रियों और दिल्ली सरकार के विधायकों और मंत्रियों का साक्षात्कार करता था। मैगज़ीन के संपादकीय पृष्ठ के लिए मैं लेख भी लिखता था। राजनीतिक खबरों से लगाव होने के चलते मैंने इस बीट को ही अपना हमसाया बना लिया। मैगजीन के बाद फिर टेलीविजन का रुख किया और इसी साल दोबारा ज़ी मीडिया से जुड़ गया। यहां साढ़े 3 सालों तक काम करने के बाद मैंने डिजिटल मीडिया में कदम रखने की ठान ली। रिपब्लिक भारत की लॉन्चिंग से पहले मुझे इसकी वेबसाइट से जुड़ने का मौका मिला। रिपब्लिक से जुड़ने के साथ ही मैंने दिल्ली छोड़कर मुंबई का रुख कर लिया। समंदर किनारे बसे इस शहर में मैंने डिजिटल पत्रकारिता के गुर को सीखा। इस संस्थान में मुझे रिपोर्टर के तौर पर मौका दिया था। कुछ ही महीने बाद मैं वापस दिल्ली आ गया और मैंने न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में एसोसिएट प्रोड्यूसर और रिपोर्टर की भूमिका में काम किया। चंद महीने बाद ही ज़ी मीडिया समूह के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम करने का अवसर मिला। ज़ी हिन्दुस्तान के लिए मैंने स्पेशल खबरों पर काम किया और इस समूह का पहला डिजिटल रिपोर्टर बन गया। इसके बाद मुझे वीडियो सेक्शन का हेड बना दिया गया। मैंने चुनावी कवरेज की, ग्राउंड रिपोर्टिंग की और साथ ही साथ वीडियो सेक्शन को नए शिखर पर पहुंचाने की कोशिश की। मैं कविताएं और किस्से-कहानियां भी लिखता रहता हूं। पढ़ाई के दौरान ही मैंने दो किताबें भी लिखी, एक नॉवेल और दूसरी पोएट्री बुक। पत्रकारिता में रहते हुए मैंने कई "स्टिंग ऑपरेशन" भी किए। मेरे सफर को और भी खूबसूरत बनाने के लिए टाइम्स समूह ने मुझे मौका दिया। मैं जुलाई, 2023 में इस संस्थान से जुड़ा और मुझे मेन डेस्क पर खबरों से दो-चार होते रहने की जिम्मेदारी सौंपी गई। राजनीतिक विश्लेषण के साथ विस्तार से खबरों को परोसता हूं और अपने पाठकों को कुछ नया देने का प्रयास करता हूं।

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