Samastipur Assembly Elections 2025: समस्तीपुर जिला केवल एक भौगोलिक क्षेत्र नहीं है, बल्कि यह महान समाजवादी नेताओं की कर्मभूमि और प्राचीन साहित्यिक कथाओं का भी गवाह रहा है। उत्तर बिहार में रेल नेटवर्क का महत्वपूर्ण केंद्र होने के साथ-साथ, यह जिला अपनी राजनीतिक परंपरा और ऐतिहासिक घटनाओं के कारण हमेशा चर्चा में रहता है। भौगोलिक दृष्टि से समस्तीपुर जिला उत्तर में बागमती नदी, पश्चिम में वैशाली और मुजफ्फरपुर, दक्षिण में गंगा और पूर्व में बेगूसराय व खगड़िया से घिरा हुआ है।
यह पूर्वी मध्य रेलवे का मंडल मुख्यालय भी है और पटना, कोलकाता तथा दिल्ली जैसे प्रमुख औद्योगिक शहरों से सीधे रेल मार्ग द्वारा जुड़ा हुआ है। समस्तीपुर जिले में मुख्य रूप से हिंदी और मैथिली भाषाएं बोली जाती हैं। प्रसिद्ध कवि और शिवभक्त विद्यापति ने अपने जीवन के अंतिम समय विद्यापतिनगर में इसी जिले में बिताए। समस्तीपुर में अब बिहार विधानसभा चुनाव की प्रक्रिया शुरू हो गई है और भारत निर्वाचन आयोग ने मतदान की तारीखें घोषित कर दी हैं। जिले की 10 विधानसभा सीटों पर 6 नवंबर को वोट डाले जाएंगे। समस्तीपुर विधानसभा क्षेत्र हर चुनाव में सघन प्रतिस्पर्धा के लिए जाना जाता है। वर्तमान में यह क्षेत्र राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के अधीन है। इस सीट की विशेष पहचान महान समाजवादी नेता जननायक कर्पूरी ठाकुर से जुड़ी है, जिन्होंने 1980 से 1985 तक यहां प्रतिनिधित्व किया था।
2020 के विधानसभा चुनाव का हाल
2020 के बिहार विधानसभा चुनाव में राजद के उम्मीदवार मोहम्मद अख्तरुल इस्लाम शाहिन ने समस्तीपुर सीट पर जीत दर्ज की। यह उनकी लगातार तीसरी विजय थी। उन्होंने जदयू की प्रत्याशी अश्वमेध देवी को हराया, हालांकि जीत का अंतर बहुत छोटा रहा। शाहिन 2010 से लगातार इस सीट के विधायक हैं। 2015 में भी उन्होंने भाजपा की रेणु कुमारी को भारी अंतर से मात दी थी। वहीं, 2000 से 2010 तक यह सीट कर्पूरी ठाकुर के पुत्र रामनाथ ठाकुर (जदयू) के कब्जे में रही। 1957 में स्थापित इस विधानसभा सीट पर अब तक कुल 16 चुनाव हो चुके हैं, जिनमें कांग्रेस ने तीन बार जीत हासिल की। लेकिन असली प्रभाव हमेशा समाजवादी दलों का ही रहा है।
समस्तीपुर विधानसभा क्षेत्र जातिगत समीकरण
समस्तीपुर विधानसभा क्षेत्र का चुनावी परिदृश्य काफी हद तक जातिगत समीकरणों पर आधारित है। यहां मुस्लिम और यादव मतदाताओं की संख्या सबसे अधिक है, जो राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के लिए मजबूत समर्थन का आधार मानी जाती है। इसके अलावा, ब्राह्मण और राजपूत मतदाता भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं और चुनावी नतीजों को प्रभावित करते हैं। पिछले दो चुनावों में राजद की जीत का अंतर लगातार कम होता गया है। 2015 में शाहिन ने 31,000 वोटों से जीत दर्ज की थी, जबकि 2020 में यह अंतर केवल 4,714 वोट तक घट गया। इससे स्पष्ट है कि इस सीट पर मुकाबला हर बार और कड़ा होता जा रहा है।
राजनीतिक विरासत की भूमि रही समस्तीपुर सीट
2 जनवरी 1975 को समस्तीपुर जिले ने एक दर्दनाक घटना का सामना किया। उस समय के रेल मंत्री ललित नारायण मिश्र की स्थानीय रेलवे स्टेशन पर बम विस्फोट में हत्या कर दी गई थी। लगभग 39 साल चले लंबी कानूनी प्रक्रिया के बाद चार लोगों को दोषी पाया गया। यह मामला आज भी भारत की सबसे रहस्यमय राजनीतिक हत्याओं में से एक माना जाता है। समस्तीपुर अपनी राजनीतिक विरासत, महान कवियों की कथाओं और रेलवे की महत्त्वपूर्ण भूमिका के कारण बिहार के नक्शे पर एक विशेष स्थान रखता है। 2025 के विधानसभा चुनाव में यह सीट फिर से राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का केंद्र बन गई है।
(इनपुट - आईएएनएस)
