Bibhutipur Assembly Election 2025: बिहार के समस्तीपुर जिले की राजनीतिक और सामाजिक गतिविधियां हमेशा ही जीवंत रही हैं। इसी जिले में स्थित विभूतिपुर विधानसभा क्षेत्र पर कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) की मजबूत पकड़ मानी जाती है। चुनाव आयोग के अनुसार, इस विधानसभा क्षेत्र का चुनाव 6 नवंबर को पहले चरण में आयोजित किया जाएगा। उसी दिन राज्य की अन्य 120 सीटों पर भी मतदान होगा, जबकि विभूतिपुर का परिणाम 14 नवंबर को घोषित किया जाएगा। इस क्षेत्र में अब तक केवल एक बार एनडीए की सहयोगी पार्टी जदयू ने जीत दर्ज की है, लेकिन पिछले चुनाव में वह सीट बरकरार रखने में सफल नहीं रही। विभूतिपुर विधानसभा क्षेत्र का इतिहास 1967 में शुरू हुआ। इस क्षेत्र के पहले विधायक भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (CPI) के परमानंद सिंह मदन रहे। इसके बाद 1969 में संयुक्त सोशलिस्ट पार्टी के गंगा प्रसाद श्रीवास्तव ने यहाँ जीत हासिल की। तब से लेकर अब तक इस क्षेत्र में कई पार्टियों ने शासन किया है।
क्या है विभूतिपुर विधानसभा क्षेत्र का चुनावी हाल
विभूतिपुर विधानसभा क्षेत्र का राजनीतिक परिदृश्य हमेशा ही गतिशील रहा है। 1972 और 1977 में बंधू महतो ने भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की ओर से इस सीट पर जीत हासिल की। इसके बाद 1980 में मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (CPI‑M) के रामदेव वर्मा विधायक बने और 1990 के बाद लंबे समय तक इस सीट पर उनका अधिकार बना रहा। 2010 और 2015 में जदयू के रामबालक सिंह ने जीत दर्ज की, लेकिन 2020 के चुनाव में मतदाताओं ने फिर से वामपंथ को चुना। इस बार CPI‑M के अजय कुमार ने रामबालक सिंह को 40,496 वोटों के अंतर से हराया। 2020 के चुनाव में अजय कुमार को 73,822 वोट मिले, जबकि जदयू उम्मीदवार रामबालक सिंह को 33,326 वोट प्राप्त हुए। एलजेपी के चंद्रबली ठाकुर तीसरे स्थान पर रहे और उन्हें 28,811 वोट मिले। उस साल इस सीट पर वोटिंग प्रतिशत 60.93 रहा, और मतदान के लिए 384 केंद्र बनाए गए थे।
क्षेत्र की अर्थव्यवस्था मुख्य रूप से कृषि पर आधारित
भूगोल और जनसंख्या की की बात करें तो विभूतिपुर पूरी तरह ग्रामीण क्षेत्र है। 2011 की जनगणना के अनुसार, यहां अनुसूचित जाति के मतदाता 47,689, अनुसूचित जनजाति 108 और मुस्लिम मतदाता लगभग 16,974 हैं। क्षेत्र की अर्थव्यवस्था मुख्य रूप से कृषि पर आधारित है, जहां धान, गेहूं, मक्का और दालों की खेती प्रमुख है। इसके साथ ही छोटे लघु उद्योग और हस्तशिल्प भी स्थानीय अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण योगदान देते हैं। विभूतिपुर से करीब 9 किलोमीटर दूर रोसड़ा उपखंड का एक छोटा कस्बा है, जो स्थानीय व्यापार और वाणिज्य का केंद्र माना जाता है। वहीं जिला मुख्यालय समस्तीपुर 27 किलोमीटर की दूरी पर है, जबकि मंडल मुख्यालय दरभंगा सड़क मार्ग से लगभग 125 किलोमीटर दूर है। यह दूरी क्षेत्र के विकास और बुनियादी सुविधाओं में कुछ चुनौतियां पैदा करती है।विधानसभा चुनाव में विभूतिपुर सीट पर मुकाबला दिलचस्प
इस साल के अंत में होने वाले बिहार विधानसभा चुनाव में विभूतिपुर सीट पर मुकाबला काफी दिलचस्प रहने वाला है। महागठबंधन, विशेषकर कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (मार्क्सवादी), इस सीट पर फिलहाल मजबूत स्थिति में दिख रही है। हालांकि, यदि एनडीए अपनी रणनीति को ठीक से लागू करे और जातिगत समीकरणों को संतुलित करते हुए उपयुक्त उम्मीदवार को मैदान में उतारे, तो चुनावी परिदृश्य पूरी तरह बदल सकता है। विभूतिपुर में जीत की कुंजी हमेशा जातिगत समीकरण, संगठन की ताकत और चुनावी रणनीति के संतुलन में निहित रही है। ऐसे में उम्मीदवार की छवि, पार्टी की पकड़ और सामाजिक परिदृश्य को समझना इस सीट पर सफलता की मुख्य शर्त होगी।
