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Madhepura Election 2025: यादव बहुल सीट पर NDA के लिए राह मुश्किल! मधेपुरा से RJD दबदबा रखेगी कायम? जानें क्या है समीकरण

Madhepura Assembly Election 2025: मधेपुरा यादव बहुल इस सीट है, जहां से भारतीय जनता पार्टी को कभी जीत नशीब नहीं हुई। हालांकि, कांग्रेस पार्टी ने यहां चार बार जीत हासिल की, लेकिन 1985 के बाद बिहार में उसकी जीत का ग्राफ डाउन हो गया। इस बार इस बार आरजेडी ने मौजूदा विधायक चंद्र शेखर को मैदान में उतारा है तो जेडीयू ने कविता कुमारी साहा को अपना उम्मीदवार बनाया है।

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मधेपुरा सीट

Madhepura Election 2025: बिहार के 243 विधानसभा निर्वाचन क्षेत्रों में से मधेपुरा हाई प्रोफाइल विधानसभा सीट है। पिछले तीन चुनावों में लगातार मधेपुरा विधानसभा सीट पर आरजेडी (राष्ट्रीय जनता दल) का दबदबा रहा है। यह सीट यादव राजनीति और चर्चित नाम पप्पू यादव के नाम से ज्यादा जानी जाती रही है। इस बार फिर आरजेडी, जेडीयू और भाजपा जैसे दलों की प्रतिस्पर्धा रहेगी। इस बार आरजेडी ने मौजूदा विधायक चंद्र शेखर को मैदान में उतारा है तो जेडीयू ने कविता कुमारी साहा को अपना उम्मीदवार बनाया है। इस सीट पर 6 नवंबर को पहले चरण में मतदान होगा और 14 नवंबर को परिणाम घोषित किए जाएंगे।

मधेपुरा विधानसभा का राजनीतिक इतिहास

यह जिला बाहुबलियों और कानून व्यवस्था की खराब स्थिति के लिए भी चर्चित रहा है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, मधेपुरा की सबसे बड़ी पहचान राजनीति में उसके महत्त्व से जुड़ी है, जहां कभी करीबी दोस्त रहे लालू प्रसाद यादव और शरद यादव कट्टर प्रतिद्वंद्वी बन गए। हालांकि, इन दोनों नेताओं का मधेपुरा से पहले कोई सीधा संबंध नहीं था। लालू गोपालगंज जिले में जन्में, जबकि शरद यादव मध्य प्रदेश के रहने वाले थे। बिहार का सीएम बनने के बाद लालू यादव शरद यादव को मधेपुरा की राजनीति में लेकर आए, लेकिन बाद में दोनों के बीच इतनी कड़वाहट आ गई कि 1999 के लोकसभा चुनाव में लालू को शरद यादव के हाथों करारी हार का सामना करना पड़ा।

मधेपुरा का इतिहास

मधेपुरा 1981 में जिला बना, हालांकि 1845 से यह एक अनुमंडल के रूप में अस्तित्व में था। यह मधेपुरा लोकसभा सीट के अंतर्गत आने वाले छह विधानसभा क्षेत्रों में से एक है। 1957 में इसके गठन के बाद से अब तक हुए 17 विधानसभा चुनावों में केवल यादव समुदाय के नेताओं को ही चुना गया है। यही प्रवृत्ति लोकसभा चुनावों में भी देखने को मिलती है। 1967 और 1968 के पहले दो चुनावों को छोड़कर, तब से लेकर अब तक हर बार यहां से यादव उम्मीदवार ही विजयी रहे हैं।

यादव बहुल सीट का समीकरण

यादव बहुल इस सीट पर भारतीय जनता पार्टी (BJP) कभी भी जीत नशीब नहीं हुई। हालांकि, कांग्रेस पार्टी ने यहां चार बार जीत हासिल की, लेकिन 1985 के बाद बिहार में उसकी जीत का ग्राफ डाउन हो गया। संयुक्त सोशलिस्ट पार्टी, जनता पार्टी, जनता दल और जनता दल (यूनाइटेड) ने यहां से दो-दो बार जीत दर्ज कीं, एक बार एक निर्दलीय उम्मीदवार भी विधायक बना, जबकि लालू प्रसाद यादव की राष्ट्रीय जनता दल (RJD) ने अब तक चार बार जीत दर्ज की है। मौजूदा वक्त में आरजेडी इस सीट पर जीत की हैट्रिक बना चुकी है, जिसमें चंद्रशेखर यादव ने 2015, 2020 और 2021 के विधानसभा चुनावों में जीत कर विधानसभा पहुंचते रहे हैं।

मधेपुरा में 2025 का रिजल्ट

साल 2015 में हुए बिहार विधानसभा चुनाव में भी आरजेडी के चंद्रशेखर ने यहां से जीत हासिल की। इस चुनाव में उनका मुकाबला भाजपा के विजय कुमार से था। उन्होंने विजय कुमार को 37,642 वोटों के बड़े अंतर से हराया था। तब चंद्रशेखर को 50.52% वोट मिले थे। इस चुनाव में महागठबंधन का प्रभाव स्पष्ट रूप से दिखा, और यादव, मुस्लिम और ओबीसी वर्ग के वोटों का समर्थन उन्हें जीत दिलाने में कामयाब रहा। यह चुनाव विशेष रूप से इसलिए महत्वपूर्ण था क्योंकि बिहार में नीतीश कुमार के नेतृत्व में महागठबंधन की सरकार बनी थी, और इसका फायदा आरजेडी को भी मिला था।

2024 के लोकसभा चुनावों में बीजेपी की सहयोगी जदयू (JD(U)) ने मधेपुरा की सभी छह विधानसभा सीटों पर बढ़त हासिल की थी। जदयू ने लगातार दो बार मधेपुरा लोकसभा सीट पर जीत दर्ज की है। यहां की जनता आमतौर पर विधानसभा चुनावों में आरजेडी का समर्थन करती है, जबकि लोकसभा चुनावों में जदयू के पक्ष में मतदान करती है। लेकिन इस बार देखना है कि बीजेपी के नेतृत्व वाला एनडीए इस रुझान को बदलने में सफल हो पाता है या नहीं।

मधेपुरा विधानसभा क्षेत्र कितने मतदाता

मधेपुरा विधानसभा क्षेत्र में यादव मतदाता सबसे अधिक संख्या में हैं, जो कुल मतदाताओं का लगभग 32% हैं। वहीं, अनुसूचित जाति के मतदाता लगभग 17.51% हैं, जबकि मुस्लिम मतदाता करीब 11.1% हैं। यहां के 88.78% मतदाता ग्रामीण क्षेत्र से हैं, जबकि केवल 11.23% मतदाता शहरी क्षेत्र से आते हैं। साल 2020 के विधानसभा चुनावों में मधेपुरा में कुल 3,30,734 पंजीकृत मतदाता थे, जिनमें से 62.13% ने अपने मत का प्रयोग किया था। लेकिन 2024 के लोकसभा चुनावों तक यह संख्या बढ़कर 3,51,561 हो गई।

Pushpendra kumar
पुष्पेंद्र कुमारauthor

पुष्पेंद्र कुमार टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में चीफ कॉपी एडिटर के रूप में सिटी डेस्क पर कार्यरत हैं। जर्नलिज्म में मास्टर्स डिग्री हासिल करने के बाद से वे पिछले 7 वर्षों से सक्रिय पत्रकारिता में जुड़े हैं। इस दौरान उन्होंने 10,000 से अधिक खबरें लिखी हैं। पुष्पेंद्र हाइपर-लोकल मुद्दों, रेलवे, रोड, इंफ्रास्ट्रक्चर, डेवलपमेंट, कृषि और मौसम से जुड़ी खबरों पर गहरी पकड़ रखते हैं। शहर से लेकर गांव-देहात तक की संवेदनशीलताओं को समझते हुए वे लोकल खबरों को ऐसा रूप देते हैं जो न केवल तथ्यपूर्ण होता है, बल्कि पाठकों से भावनात्मक रूप से भी जुड़ता है।

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