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Assam Assembly Election: वोटिंग खत्म होते ही CM हिमंता की बड़ी भविष्यवाणी! रिजल्ट से पहले जान लें किन सीटों पर है 'महामुकाबला'

Assam Assembly Election 2026: असम विधानसभा चुनाव संपन्न हो चुका है। राज्य के करीब 2.50 करोड़ मतदाताओं ने अपना फैसला सुना दिया है। 4 मई को नतीजे सामने आएंगे। कुल 722 उम्मीदवार की राजनीतिक किस्मत ईवीएम में कैद हो चुकी है। इसी बीच आइए राज्य सियासी गणित को भी समझते लें।

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असम विधानसभा चुनाव में 5 बजे तक अनुमानित मतदान प्रतिशत 84.42% रिकॉर्ड किया गया। AI IMAGE

Assam Assembly Election 2026: असम विधानसभा चुनाव के लिए मतदान समाप्त हो गया। 5 बजे तक अनुमानित मतदान प्रतिशत 84.42% रिकॉर्ड किया गया। 35 जिलों में 126 सीटों पर हुई वोटिंग के नतीजे 4 मई को घोषित होंगे।

ये तो थी चुनाव से जुड़ी जानकारियां अब बात की जाए राजनेताओं की। चुनावी मैदान में इस बार कुल 722 उम्मीदवार अपनी किस्मत आजमा रहे हैं। इनमें मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा (Himanta Biswa Sarma) प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गौरव गोगोई (Gaurav Gogoi) नेता प्रतिपक्ष देवब्रत सैकिया (Debabrata Saikia) एआईयूडीएफ प्रमुख बदरुद्दीन अजमल (Badruddin Ajmal) राइजोर दल के नेता अखिल गोगोई और असम जातीय परिषद (AJP) के अध्यक्ष लुरिंज्योति गोगोई जैसे प्रमुख चेहरे शामिल हैं।

हॉट सीटों पर एक नजर

बात करें हॉट सीटों की, तो जालुकबाड़ी सीट सबसे चर्चित सीटों में से एक है, जहां मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा लगातार छठी बार जीत हासिल करने की कोशिश कर रहे हैं। इस सीट पर कांग्रेस ने बिदिशा नियोग को मैदान में उतारा है। जोरहाट सीट पर कांग्रेस के गौरव गोगोई का मुकाबला भाजपा के हितेंद्रनाथ गोस्वामी से है। वहीं, नाजिरा सीट पर देवब्रत सैकिया अपनी पारंपरिक सीट बचाने के लिए भाजपा के मयूर बोर्गोहैन के खिलाफ चुनाव लड़ रहे हैं।

बोडोलैंड क्षेत्र की तमुलपुर सीट पर दैमारी और यूपीपीएल प्रमुख प्रमोद बोरो के बीच सीधा मुकाबला देखने को मिला एआईयूडीएफ प्रमुख बदरुद्दीन अजमल (Badruddin Ajmal) बिन्नाकांडी सीट से अगप के शाहाबुद्दीन मजूमदार और एजेपी के रेजाउल करीम चौधरी के खिलाफ मैदान में हैं। शिवसागर सीट पर अखिल गोगोई (Akhil Gogoi) भाजपा के जयंत हजारिका और अगप के प्रदीप हजारिका के बीच त्रिकोणीय मुकाबला है।

खोवांग सीट पर एजेपी के लुरिंज्योति गोगोई और भाजपा के चक्रधर गोगोई आमने-सामने हैं। वहीं, बोकाखाट सीट पर अगप अध्यक्ष और मंत्री अतुल बोरा, राइजोर दल के हरि प्रसाद सैकिया और पूर्व निर्दलीय विधायक जितेन गोगोई के बीच त्रिकोणीय मुकाबला है। इसके अलावा, मंत्री केशव महंत का कलियाबोर सीट पर राइजोर दल के प्रदीप कुमार बरुआ से सीधा मुकाबला है।

अब मतदाताओं का भी जिक्र करना जरूरी है। राज्य में कुल 2.50 करोड़ मतदाता हैं। इनमें से 1.25 करोड़ महिलाएं हैं। बीजेपी 92 सीटों पर तो कांग्रेस 90 सीटों पर चुनाव लड़ रही है। वहीं, राज्य की सहयोगी असम गण परिषद (अगप) और बोडोलैंड पीपुल्स फ्रंट (बीपीएफ) क्रमश: 26 और 11 सीटों पर चुनाव मैदान में हैं।

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असम विधानसभा चुनाव में वोट प्रतिशत का इतिहास। AI IMAGE

मतदान के बाद क्या बोले सीएम हिमंता?

चुनाव खत्म होने के बाद असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा (Himanta Biswa Sarma) ने मतदान प्रतिशत को लेकर अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि इस बार राज्य में मतदान प्रतिशत 86-87% तक पहुंच सकता है, जो पहले के मुकाबले काफी अधिक है। सीएम सरमा ने कहा कि पहले बांग्लादेश मूल के मुस्लिम समुदाय में मतदान प्रतिशत 95-96% तक रहता था, जबकि अन्य असमिया समाज में यह करीब 75-76% होता था। लेकिन इस बार दोनों समुदायों के बीच मतदान को लेकर एक तरह की प्रतिस्पर्धा देखने को मिली।

उन्होंने यह भी बताया कि इस बार पारंपरिक रूप से कम मतदान करने वाले वर्गों ने भी बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया है, जिससे कुल वोटिंग प्रतिशत में बड़ा इजाफा हुआ है।

चुनावी नतीजों पर टिप्पणी करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि अभी कुछ भी कहना जल्दबाजी होगी, लेकिन अगर बीजेपी के नेतृत्व वाला एनडीए (NDA) तीन अंकों तक पहुंच जाए तो यह चौंकाने वाला नहीं होगा।

बीजेपी की मजबूती और कमजोरी पर एक नजर

हिमंता सरकार के कार्यकाल में राज्य में सड़क, ब्रिज, मेडिकल और कनेक्टिविटी प्रोजेक्ट्स पर तेजी से काम हुआ है, जिसे पार्टी ने चुनाव में एक बड़ा मुद्दा बनाया। मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा की मजबूत और एक्टिव छवि भी वोटरों पर सकारात्मक प्रभाव डाला। इसके अलावा बीजेपी का एनडीए गठबंधन AGP और UPPL जैसे सहयोगियों के साथ मजबूत है। इसमें कोई दो राय नहीं कि उच्च मतदान प्रतिशत में अक्सर संगठित पार्टियों को लाभ होता है और बीजेपी का ग्राउंड नेटवर्क इसके लिए तैयार माना जाता है। साथ ही एनआरसी, सीएए और घुसपैठ जैसे मुद्दों पर पार्टी का मजबूत नैरेटिव खास वोटबैंक को एकजुट करने में कामयाब रहा।

वहीं, बात करें बीजेपी के नुकसान की, तो राज्य में लंबे समय तक सत्ता में रहने से एंटी-इंकम्बेंसी की थोड़ी लहर दिखती है। कुछ इलाकों में मुस्लिम और अन्य समुदायों का एकतरफा वोट भी पार्टी के नुकसान का कारण बन सकता है। इसके अलावा ग्रामीण इलाकों में किसानों, चाय बागान मजदूरों और ग्रामीण मतदाताओं के असंतोष भी बीजेपी के वोट शेयर पर असर डाल सकता है।

Piyush Kumar
पीयूष कुमार author

पीयूष कुमार टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल के न्यूज डेस्क पर Senior Copy Editor के रूप में कार्यरत हैं। देश-दुनिया की हलचल पर उनकी पैनी नजर रहती है और इन घट... और देखें

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