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अमित शाह ने महाराष्ट्र में रद्द कीं चुनावी रैलियां, लौट रहे दिल्ली; आखिर क्या है वजह?

Amit Shah canceled election rallies in Maharashtra: महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव के लिए हो रहा चुनाव प्रचार कुछ ही घंटों के बाद थम जाएगा। इस बीच अमित शाह ने अचानक से अपनी रैलियां रद्द कर दी हैं। इसके अलावा वो दिल्ली लौट रहे हैं, आखिर इसके पीछे की असल वजह क्या है? आपको रिपोर्ट में समझाते हैं।

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अमित शाह ने महाराष्ट्र में रैलियां रद्द कीं।

Maharashtra Assembly Elections 2024: महाराष्ट्र की जनता इस बार के चुनाव में किस पर सबसे ज्यादा भरोसा दिखाएगी? इस सवाल का जवाब 23 नवंबर को मिल जाएगा। इससे पहले फिलहाल चुनाव प्रचार का सिलसिला जारी है। इसी बीच केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने मणिपुर में अस्थिर हालात के मद्देनजर चुनावी राज्य महाराष्ट्र में अपनी रैलियां रद्द कर दीं और वह दिल्ली लौट रहे हैं।

पूर्वोत्तर राज्य में स्थिति की समीक्षा के लिए बैठक कर सकते हैं शाह

सूत्रों ने बताया कि गृह मंत्री इस पूर्वोत्तर राज्य में स्थिति की समीक्षा के लिए एक बैठक कर सकते हैं। मणिपुर में उग्र भीड़ ने इंफाल घाटी के विभिन्न जिलों में शनिवार रात भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के तीन और विधायकों तथा कांग्रेस के एक विधायक के आवास में आग लगा दी। साथ ही, सुरक्षाबलों ने मुख्यमंत्री एन. बीरेन सिंह के पैतृक आवास में घुसने की प्रदर्शनकारियों की कोशिश को नाकाम कर दिया।

अमित शाह ने प्रचार अभियान के लिए चुनावी रैलियों को रद्द किया

सूत्रों ने बताया कि शाह को महाराष्ट्र में भाजपा के प्रचार अभियान के तहत कुछ चुनावी रैलियों में भाग लेना था लेकिन उन्होंने रैलियां रद्द कर दीं और वह दिल्ली लौट रहे हैं। उनकी रैलियां रद्द करने के पीछे कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है लेकिन सूत्रों ने बताया कि यह मणिपुर में अस्थिर हालात की वजह से हो सकता है। सूत्रों ने कहा कि गृह मंत्री मणिपुर में स्थिति की समीक्षा के लिए दिल्ली में शीर्ष अधिकारियों के साथ बैठक कर सकते हैं। उन्होंने बताया कि केंद्रीय सुरक्षा अधिकारियों का एक दल स्थिति का आकलन करने और स्थिति से निपटने में राज्य सरकार की मदद करने के लिए जल्द ही मणिपुर का दौरा कर सकता है।

मणिपुर में तीन मंत्रियों और छह विधायकों के आवास पर हमला

हिंसा की ताजा घटनाएं शनिवार रात हुईं जब जिरीबाम जिले में उग्रवादियों द्वारा तीन महिलाओं तथा तीन बच्चों की हत्या से गुस्साए लोगों ने राज्य के तीन मंत्रियों और छह विधायकों के आवास पर हमला कर दिया। इसके बाद राज्य में अनिश्चितकालीन कर्फ्यू लागू किया गया है।

अधिकारियों के अनुसार, उग्र भीड़ ने निंगथोखोंग में लोक निर्माण मंत्री गोविंदास कोन्थुजाम, लंगमेइदोंग बाजार में हियांगलाम से भाजपा विधायक वाई राधेश्याम, थौबल जिले में वांगजिंग टेंथा से भाजपा विधायक पी. ब्रोजेन तथा इंफाल पूर्वी जिले में खुंद्राकपाम से कांग्रेस विधायक थोकचोम लोकेश्वर के आवास को आग के हवाले कर दिया। रविवार सुबह इंफाल घाटी के सभी पांच जिलों में स्थिति शांत लेकिन तनावपूर्ण रही। जिरिबाम में छह लोगों के शव मिलने पर हिंसक प्रदर्शनों के बाद कर्फ्यू लगाया गया है और इंटरनेट सेवाएं निलंबित कर दी गई हैं।

Ayush Sinha
आयुष सिन्हाauthor

मैं टाइम्स नाउ नवभारत (Timesnowhindi.com) से जुड़ा हुआ हूं। कलम और कागज से लगाव तो बचपन से ही था, जो धीरे-धीरे आदत और जरूरत बन गई। मुख्य धारा की पत्रकारिता से जुड़े हुए 10 साल पूरे हो चुके हैं। लोकसभा चुनाव 2014 से पहले ही मैंने पत्रकारिता की पढ़ाई के बीच में ही देश की राजधानी दिल्ली आने की ठान ली थी। उससे पहले मैंने कभी ये सोचा तक नहीं था कि मैं बनारस बोले तो वाराणसी शहर से बाहर भी जा सकता हूं। जी हां, मेरा नाता काशी से है। जन्म के साथ-साथ शिक्षा दीक्षा भी बनारस में ही हुई। राष्ट्रपिता मोहनदास करमचंद गांधी (बापू) द्वारा स्थापित किए गए विश्वविद्यालय- 'महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ' से मैंने पत्रकारिता में स्नातक किया है। ग्रेजुएशन के दौरान ही विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के अध्यापकों ने बड़ी ही सख्ती से मेरी नक्काशी करने की कोशिश की। ग्रेजुएशन के आखिरी वर्ष आते-आते मैंने दिल्ली की ट्रेन पकड़ी और यहां पहुंच गया। आव देखा न ताव, दिल्ली NCR में बड़े-बड़े मीडिया समूहों के दफ्तरों के बाहर अपना बायोडेटा डाल कर प्रयास में जुट गया। काफी धैर्य के बाद ZEE मीडिया समूह से जुड़ने का मौका मिला। मेरे पत्रकारिता के सफर की शुरुआत टेलीविजन के इनपुट डिपार्टमेंट से हुई। यहां मैं असाइनमेंट डेस्क पर था। कुछ महीनों तक खुद को इस समूह के साथ जोड़े रखने के बाद वर्ष 2015 में मैंने प्रिंट मीडिया का रुख कर लिया और ALL RIGHTS नाम की मैगज़ीन के साथ जुड़ गया। बतौर विशेष संवाददाता (Special Correspondent) मेरे कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई थी। मैं उन दिनों देशभर के अलग-अलग लोकसभा क्षेत्र के सांसदों, केंद्रीय मंत्रियों और दिल्ली सरकार के विधायकों और मंत्रियों का साक्षात्कार करता था। मैगज़ीन के संपादकीय पृष्ठ के लिए मैं लेख भी लिखता था। राजनीतिक खबरों से लगाव होने के चलते मैंने इस बीट को ही अपना हमसाया बना लिया। मैगजीन के बाद फिर टेलीविजन का रुख किया और इसी साल दोबारा ज़ी मीडिया से जुड़ गया। यहां साढ़े 3 सालों तक काम करने के बाद मैंने डिजिटल मीडिया में कदम रखने की ठान ली। रिपब्लिक भारत की लॉन्चिंग से पहले मुझे इसकी वेबसाइट से जुड़ने का मौका मिला। रिपब्लिक से जुड़ने के साथ ही मैंने दिल्ली छोड़कर मुंबई का रुख कर लिया। समंदर किनारे बसे इस शहर में मैंने डिजिटल पत्रकारिता के गुर को सीखा। इस संस्थान में मुझे रिपोर्टर के तौर पर मौका दिया था। कुछ ही महीने बाद मैं वापस दिल्ली आ गया और मैंने न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में एसोसिएट प्रोड्यूसर और रिपोर्टर की भूमिका में काम किया। चंद महीने बाद ही ज़ी मीडिया समूह के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम करने का अवसर मिला। ज़ी हिन्दुस्तान के लिए मैंने स्पेशल खबरों पर काम किया और इस समूह का पहला डिजिटल रिपोर्टर बन गया। इसके बाद मुझे वीडियो सेक्शन का हेड बना दिया गया। मैंने चुनावी कवरेज की, ग्राउंड रिपोर्टिंग की और साथ ही साथ वीडियो सेक्शन को नए शिखर पर पहुंचाने की कोशिश की। मैं कविताएं और किस्से-कहानियां भी लिखता रहता हूं। पढ़ाई के दौरान ही मैंने दो किताबें भी लिखी, एक नॉवेल और दूसरी पोएट्री बुक। पत्रकारिता में रहते हुए मैंने कई "स्टिंग ऑपरेशन" भी किए। मेरे सफर को और भी खूबसूरत बनाने के लिए टाइम्स समूह ने मुझे मौका दिया। मैं जुलाई, 2023 में इस संस्थान से जुड़ा और मुझे मेन डेस्क पर खबरों से दो-चार होते रहने की जिम्मेदारी सौंपी गई। राजनीतिक विश्लेषण के साथ विस्तार से खबरों को परोसता हूं और अपने पाठकों को कुछ नया देने का प्रयास करता हूं।

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