देश में हर साल लाखों छात्र JEE Main और JEE Advanced जैसी कठिन परीक्षाओं में भाग लेते हैं। उनके लिए इस परीक्षा को पास करना किसी सपने से कम नहीं होता, लेकिन कुछ छात्र ऐसे भी होते हैं, जो एक उपलब्धि हासिल करने के बाद रुकते नहीं, बल्कि नए कीर्तिमान बनाते रहते हैं। ऐसी ही प्रेरणादायक कहानी है कबीर चिल्लर की, जिन्होंने न सिर्फ भारत की सबसे कठिन इंजीनियरिंग प्रवेश परीक्षाओं में शानदार प्रदर्शन किया, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी देश का नाम रोशन किया है। इनका अब तक का सफर बहुत प्रेरणादायक है, जिसे हर छात्र को जरूर पढ़ना चाहिए।
JEE Main 2026 में हासिल किए पूरे 300 में 300 अंक
कबीर चिल्लर ने JEE Main 2026 में इतिहास रचते हुए पूरे 300 में 300 अंक हासिल किए और ऑल इंडिया रैंक (AIR) 1 प्राप्त की। इसके बाद उन्होंने JEE Advanced 2026 में भी शानदार प्रदर्शन करते हुए 360 में से 329 अंक हासिल किए और AIR 2 हासिल की। उनकी इस सफलता के बाद उन्हें देश के प्रतिष्ठित संस्थान IIT Bombay में कंप्यूटर साइंस ब्रांच में दाखिला मिला, जो हर इंजीनियरिंग छात्र के सपना पूरा होने जैसा है।
अंतरराष्ट्रीय मंच पर जीता गोल्ड
अधिकांश छात्र IIT में प्रवेश मिलने के बाद अपने अकादमिक जीवन पर ध्यान देते हैं, लेकिन कबीर ने खुद को केवल एक परीक्षा तक सीमित नहीं रखा। उन्होंने अपनी वैज्ञानिक सोच और मेहनत को आगे बढ़ाते हुए 58वें इंटरनेशनल केमिस्ट्री ओलंपियाड (International Chemistry Olympiad-IChO 2026) में हिस्सा लिया।
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ताशकंद में रचा इतिहास
उज्बेकिस्तान की राजधानी ताशकंद में आयोजित इस प्रतिष्ठित प्रतियोगिता में कबीर चिल्लर ने गोल्ड मेडल जीतकर पूरी दुनिया में भारत का गौरव बढ़ाया। दरअसल, भारत ने इंटरनेशनल केमिस्ट्री ओलंपियाड में अपना अब तक का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया। भारतीय टीम के चारों प्रतिभागियों ने गोल्ड मेडल अपने नाम किए।
टीम में कौन-कौन था शामिल?
- कबीर चिल्लर
- देबदत्ता प्रियदर्शी
- हर्षित सिंगला
- संदीप कुची
चारों छात्रों ने शानदार प्रदर्शन करते हुए भारत को प्रतियोगिता में ऐतिहासिक सफलता दिलाई। यह पहली बार है जब भारत ने IChO में सभी प्रतिभागियों के साथ गोल्ड मेडल जीतकर क्लीन स्वीप किया।
कबीर चिल्लर की कहानी क्यों है खास?
कबीर की सफलता केवल अच्छे अंकों की कहानी नहीं है, बल्कि यह इस बात का उदाहरण है कि सीखने की कोई सीमा नहीं होती। उन्होंने यह साबित किया कि यदि लक्ष्य बड़ा हो और मेहनत लगातार जारी रहे, तो राष्ट्रीय स्तर से लेकर अंतरराष्ट्रीय मंच तक सफलता हासिल की जा सकती है।
JEE Main में परफेक्ट स्कोर, JEE Advanced में टॉप रैंक और फिर इंटरनेशनल केमिस्ट्री ओलंपियाड में गोल्ड मेडल-ये उपलब्धियां दिखाती हैं कि प्रतिभा के साथ अनुशासन, अभ्यास और सीखने का जुनून हो तो कोई भी लक्ष्य असंभव नहीं।
छात्रों के लिए सीख?
कबीर चिल्लर की यात्रा हर छात्र को यह संदेश देती है कि किसी एक उपलब्धि को अपनी मंजिल न समझें। सफलता का असली अर्थ लगातार खुद को बेहतर बनाना और नए लक्ष्य हासिल करना है। प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्रों के लिए यह कहानी प्रेरणा है कि मेहनत, सही रणनीति और आत्मविश्वास के दम पर राष्ट्रीय ही नहीं, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी पहचान बनाई जा सकती है।
कबीर चिल्लर और पूरी भारतीय टीम ने यह साबित कर दिया कि भारतीय युवा प्रतिभाएं दुनिया के सबसे कठिन वैज्ञानिक मंचों पर भी अपना परचम लहरा सकती हैं। उनकी यह उपलब्धि आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनी रहेगी।
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