Supreme Court OBC Creamy Layer: सुप्रीम कोर्ट ने ओबीसी क्रीमी लेयर आरक्षण के मामले में केंद्र सरकार की संशोधन याचिका खारिज कर (Supreme Court OBC Creamy Layer Judgement) दी है। कोर्ट ने दोहराया कि ओबीसी आरक्षण के लिए क्रीमी लेयर तय करते समय माता-पिता की वेतन से होने वाली आय को शामिल नहीं किया जाएगा। साथ ही यह स्पष्ट किया है कि क्रीमी लेयर से बाहर रखने का निर्धारण माता-पिता की आय के बजाय उनकी सेवा संबंधी स्थिति और पद के आधार पर किया जाएगा।
क्रीमी लेयर का निर्धारण 'स्टेटस-बेस्ड या पद-आधारित है
11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने 'यूनियन ऑफ इंडिया बनाम रोहित नाटन' मामले में OBC नॉन-क्रीमी लेयर के मानदंडों को लेकर बेहद महत्वपूर्ण स्पष्टीकरण दिया था। क्रीमी लेयर का निर्धारण 'स्टेटस-बेस्ड' या पद-आधारित है, न कि पूरी तरह 'इनकम-बेस्ड' (आय-आधारित)। माता-पिता का पद (जैसे Group A, B, C, या D) क्या है, यह देखना जरूरी है।
आमतौर पर माना जाता है कि 8 लाख से अधिक सालाना आय होने पर उम्मीदवार क्रीमी लेयर में आ जाता है। लेकिन मूल नियमों (1993 ऑफिस मेमोरेंडम) के अनुसार, वेतन और खेती की जमीन से होने वाली आय को इस 8 लाख की गणना से कड़ाई से बाहर रखा गया है। अदालत ने 1993 के सरकारी कार्यालय ज्ञापन (Office Memorandum) का हवाला देते हुए स्पष्ट किया कि वेतन और कृषि से होने वाली आय को आय-संपत्ति परीक्षण में शामिल नहीं किया जाना चाहिए।
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OBC उम्मीदवारों के लिए क्या मायने हैं?
बता दें सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले से उन ओबीसी अभ्यर्थियों को राहत मिल सकती है, जिन्हें केवल माता-पिता की सैलरी के आधार पर क्रीमी लेयर में रख दिया गया था। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि क्रीमी लेयर के सभी नियम समाप्त हो गए हैं। उम्मीदवारों की पात्रता निर्धारित सरकारी दिशा-निर्देशों और माता-पिता की सेवा संबंधी स्थिति के आधार पर ही तय होगी।
