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26 सितंबर तक के लिए स्थगित हो गई NEET PG की सुनवाई, जानें नीट पीजी मामला सुप्रीम कोर्ट तक क्यों पहुंचा

Supreme Court Postponed the NEET PG Transparency Plea: सुप्रीम कोर्ट ने नीट पीजी पारदर्शिता याचिका पर सुनवाई 26 सितंबर तक के लिए स्थगित कर दी है। इस महीने याचिका पर सुनवाई कई बार स्थगित हो चुकी है। इस पर स्पष्टता की प्रतीक्षा में, मेडिकल काउंसलिंग कमेटी (MCC) ने अभी तक काउंसलिंग शेड्यूल जारी नहीं किया है।

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26 सितंबर तक के लिए स्थगित हो गई NEET PG की सुनवाई

Supreme Court Postponed the NEET PG Transparency Plea: नीट पीजी 2025 आंसर की के खिलाफ दायर पारदर्शिता याचिका पर नया अपडेट आया है, सुप्रीम कोर्ट ने नीट पीजी पारदर्शिता याचिका पर सुनवाई 26 सितंबर तक के लिए स्थगित कर दी है। इस महीने याचिका पर सुनवाई कई बार स्थगित हो चुकी है। इस पर स्पष्टता की प्रतीक्षा में, मेडिकल काउंसलिंग कमेटी (MCC) ने अभी तक काउंसलिंग शेड्यूल जारी नहीं किया है। इस बीच, नेशनल बोर्ड ऑफ एग्जामिनेशन इन मेडिकल साइंसेज (NBEMS) ने राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (NEET PG 2025) का रोका हुआ परिणाम जारी कर दिया है। परिणाम दूसरे बैच के लिए जारी किया गया है और इसे आधिकारिक वेबसाइट natboard.edu.in पर देखा जा सकता है।

परिणाम नोटिस में लिखा है, "नेशनल बोर्ड ऑफ एग्जामिनेशन इन मेडिकल साइंसेज (NBEMS) ने राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (NEET PG 2025) का रोका हुआ परिणाम जारी कर दिया है। परिणाम दूसरे बैच के लिए जारी किया गया है और इसे आधिकारिक वेबसाइट natboard.edu.in पर देखा जा सकता है।"

नीट पीजी रिजल्ट 2025 जारी होने के बाद कैसे देख सकेंगे?

  • एनबीईएमएस की आधिकारिक वेबसाइट पर जाएं
  • होमपेज पर, नीट पीजी टैब देखें
  • 'विदहेल्ड रिजल्ट्स लॉट 2: नीट पीजी 2025' लिंक पर क्लिक करें
  • रिजल्ट पीडीएफ स्क्रीन पर खुल जाएगा
  • इसमें आवेदन आईडी, रोल नंबर और अंक देखें
  • इसे डाउनलोड करें और भविष्य के संदर्भ के लिए इसका प्रिंटआउट ले लें।

नीट पीजी मामला सुप्रीम कोर्ट में क्यों है?

भारत का सर्वोच्च न्यायालय जल्द ही नीट पीजी उम्मीदवारों द्वारा दायर एक जनहित याचिका पर सुनवाई करेगा, जिसमें राष्ट्रीय आयुर्विज्ञान परीक्षा बोर्ड (एनबीईएमएस) द्वारा 21 अगस्त को जारी एक 'सुधारात्मक नोटिस' को चुनौती दी गई है। इस नोटिस में आंसर की के प्रकटीकरण के तरीके में बदलाव किया गया है, जिसमें मास्टर सेट से केवल 'प्रश्न आईडी नंबर' के आधार पर उत्तर दिखाए गए हैं। याचिका में, याचिकाकर्ताओं का तर्क है कि प्रश्नों और विकल्पों में फेरबदल के कारण, यह प्रारूप अपारदर्शी है, और उत्तरों के सार्थक सत्यापन को रोकता है। मुख्य न्यायाधीश बीआर गवई और न्यायमूर्ति के. विनोद चंद्रन की पीठ पहले भी इस मामले की सुनवाई कर चुकी है।

Neelaksh Singh
नीलाक्ष सिंहauthor

नीलाक्ष सिंह 2021 से टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल से जुड़े हैं और एजुकेशन सेक्शन के लिए कंटेंट लिखते हैं। लखनऊ विश्वविद्यालय से मास कम्युनिकेशन की पढ़ाई के दौरान ही उन्होंने प्रिंट मीडिया में इंटर्नशिप की, जहां फील्ड रिपोर्टिंग, स्टूडेंट-इश्यू बेस्ड ग्राउंड स्टोरीज और सटीक न्यूजराइटिंग की बुनियादी समझ हासिल की। प्रिंट के बाद डिजिटल मीडिया में भी वह एजुकेशन बीट पर ही लगातार काम करते रहे हैं। पत्रकारिता में 10 सालों से सक्रिय नीलाक्ष सिंह 12 हजार से अधिक खबरें लिख चुके हैं। वह एग्जाम अपडेट्स, एडमिशन प्रोसेस, करियर गाइडेंस, स्टूडेंट वेलफेयर, बोर्ड रिजल्ट्स और नीतिगत बदलावों पर गहन और बेहद उपयोगी कंटेंट तैयार करते हैं।

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