NEET UG 2027: देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा नीट यूजी एक बार फिर चर्चा में है। डॉक्टर बनने का सपना पूरा करने वाली इस परीक्षा में हर साल 20 से 22 लाख छात्र बैठते हैं। ऐसे में लाखों छात्रों के लिए यह खबर बेहद महत्वपूर्ण है। दरअसल, NEET 2027 को लेकर ऐसी तैयारियां चल रही हैं, जो इस परीक्षा के इतिहास का सबसे बड़ा बदलाव साबित हो सकती हैं। पेपर लीक विवाद के बाद अब केवल परीक्षा का तरीका ही नहीं, बल्कि पूरी व्यवस्था बदलने की तैयारी है।
बता दें कि बीते 21 जून को भारत के 551 शहरों में 5,400 से ज्यादा परीक्षा केंद्रों पर नीट यूजी री-एग्जाम का आयोजन किया गया था। इस परीक्षा में 20 लाख से ज्यादा छात्र शामिल हुए। इससे पहले 3 मई को यह परीक्षा आयोजित की गई थी, लेकिन पेपर लीक की घटना सामने आने के बाद इस परीक्षा को रद्द कर दिया गया था। इस घटना के बाद नीट परीक्षा कराने वाली संस्था नेशनल टेस्टिंग एजेंसी यानी NTA और देश की परीक्षा प्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए गए। देशभर में छात्रों के प्रदर्शन हुए, विपक्ष ने शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा भी मांगा। इसके बाद नीट जैसी परीक्षा के फ्यूचर प्लान को लेकर बातचीत शुरू हुई।
अब OMR शीट नहीं, पूरी तरह Computer Based Test
2027 में सबसे बड़ा बदलाव परीक्षा के मोड में होगा। अब तक NEET ऑफलाइन यानी पेन और पेपर मोड में आयोजित होती रही है। लेकिन 2027 से इसे पूरी तरह Computer Based Test यानी CBT मोड में कराने की तैयारी है। इस बदलाव का सबसे बड़ा उद्देश्य परीक्षा को अधिक सुरक्षित बनाना और पेपर लीक जैसी घटनाओं पर रोक लगाना माना जा रहा है।
एक दिन नहीं, 5 से 6 दिन चलेगी परीक्षा
अब तक NEET एक ही दिन आयोजित होती थी। पूरे देश में लाखों छात्र एक साथ परीक्षा देते थे। लेकिन 2027 से यह परीक्षा 5 से 6 दिनों में कराई जा सकती है। रिपोर्ट के मुताबिक, हर दिन लगभग 5 लाख अभ्यर्थी परीक्षा देंगे। यानी सभी छात्रों को अलग-अलग दिनों और अलग-अलग शिफ्ट में परीक्षा देनी पड़ सकती है। यह बदलाव इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे एक ही दिन पूरे देश में पेपर भेजने की जरूरत नहीं पड़ेगी। सुरक्षा बढ़ेगी, भीड़ कम होगी और परीक्षा प्रबंधन आसान हो जाएगा।
5000 नहीं, केवल करीब 1000 परीक्षा केंद्र
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, अभी जहां देशभर में लगभग 5000 परीक्षा केंद्रों पर NEET आयोजित होती है, वहीं 2027 से यह संख्या घटाकर करीब 1000 केंद्र की जा सकती है। ये केंद्र लगभग 500 शहरों में होंगे और इनमें प्राथमिकता सरकारी संस्थानों जैसे केंद्रीय विद्यालय और नवोदय विद्यालय को दी जाएगी। कुछ चुनिंदा प्रतिष्ठित निजी संस्थानों को भी परीक्षा केंद्र बनाया जा सकता है।
NTA का होगा Top to Bottom रीफॉर्म
अब केवल परीक्षा ही नहीं, बल्कि परीक्षा कराने वाली एजेंसी भी बदलने वाली है। रिपोर्ट के मुताबिक, National Testing Agency यानी NTA में ऊपर से नीचे तक बड़े प्रशासनिक बदलाव करने की तैयारी है। बताया जा रहा है कि एजेंसी में लगभग कई नई नियुक्तियां होंगी और पूरी व्यवस्था को नए सिरे से मजबूत किया जाएगा।
राधाकृष्णन समिति की सिफारिशों का असर
फिलहाल ये पांचों बदलाव मीडिया रिपोर्ट और सूत्रों के हवाले से सामने आए हैं। सरकार और NTA की ओर से विस्तृत आधिकारिक अधिसूचना जारी होने के बाद ही यह नियम लागू माने जाएंगे। लेकिन इतना तय है कि अगर ये बदलाव लागू होते हैं, तो NEET का पूरा स्वरूप बदल जाएगा। अब सवाल उठता है कि आखिर इतने बड़े बदलाव क्यों किए जा रहे हैं? इसका जवाब मिलता है हाई पावर राधाकृष्णन समिति की सिफारिशों में। पेपर लीक विवाद के बाद केंद्र सरकार ने विशेषज्ञ समिति बनाई थी, जिसने परीक्षा प्रणाली को अधिक सुरक्षित, पारदर्शी और तकनीक आधारित बनाने की कई सिफारिशें की थीं। अब सामने आ रहे बदलाव उन्हीं सिफारिशों के अनुरूप बताए जा रहे हैं।
