NAAC: कथित भ्रष्टाचार के लिए एक बार फिर जांच के दायरे में आने के बाद नेशनल एसेसमेंट एंड एक्रिडिटेशन काउंसिल (NAAC) सुधारों पर काम कर रही है। डॉ. राधाकृष्णन समिति की सिफारिशों के अनुसार, NAAC ने अप्रैल/मई 2025 में बेसिक (बाइनरी) एक्रीडिटेशन और उसके बाद मैच्योरिटी बेस्ड ग्रेडेड लेवल (MBGL) लॉन्च करने का प्रस्ताव दिया है। एमबीजीएल की कार्यप्रणाली और रूपरेखा तैयार करने पर विशेष समितियां काम कर रही हैं। दरअसल, सीबीआई मामले की वजह से NAAC की पीयर रिव्यू प्रणाली को एक चुनौतीपूर्ण स्थिति का सामना करना पड़ा है। वर्तमान स्थिति को देखते हुए NAAC अतिरिक्त कदम उठाने की योजना बना रही है। इससे सिस्टम में अनुचित प्रथाओं की गुंजाइश खत्म करके इसे बेहतर बनाया जा सकेगा।
NAAC की कार्यकारी समिति ने सीबीआई मामले में शामिल विश्वविद्यालय की मान्यता प्रक्रिया सरसरी तौर पर रद्द करने का निर्णय लिया है। साथ ही विश्वविद्यालय को मान्यता के लिए आवेदन करने से 5 साल के लिए प्रतिबंधित कर दिया है। वहीं, पीयर टीम के सभी सात सदस्यों को तत्काल प्रभाव से मूल्यांकन या NAAC की कोई भी अन्य गतिविधियों से जीवन भर के लिए प्रतिबंधित कर दिया गया है। यदि सात सदस्यों में से किसी ने भी एचईआई का दौरा किया है तो NAAC की स्थायी समिति इसकी समीक्षा करने के बाद ही ऐसे संस्थानों का परिणाम जारी करेगी। साथ ही बीते एक साल के दौरों की भी समीक्षा की जाएगी और आगे की आवश्यक कार्रवाई के लिए ईसी के समक्ष रखा जाएगा।
दूसरी तरफ रिवाइज्ड एक्रिडिटेशन फ्रेमवर्क (आरएएफ) के तहत जिन एचईआई ने आवेदन किया था और उनकी मान्यता की प्रक्रिया लंबित है, NAAC की कार्यकारी समिति ने ऐसी संस्थाओं के लिए ये निर्णय लिया है -
साइकिल 2 और उससे ऊपर के HEI को बेसिक (बाइनरी) एक्रीडिटेशन और मैच्योरिटी बेस्ड ग्रेडेड लेवल (MBGL) लॉन्च होने तक उनके वर्तमान ग्रेड की वैधता बनाए रखने की अनुमति दी जाएगी। फिर वे इनमें (बेसिक या एमबीजीएल) से किसी एक का चुनाव कर सकेंगे।
वहीं, साइकिल 1 में HEI को बेसिक एक्रीडिटेशन को चुनने का विकल्प दिया जाएगा और पहले भुगतान की गई फीस (यदि कोई हो) को उनके भविष्य के आवेदन में समायोजित किया जा सकता है।
वहीं, अगर उपरोक्त श्रेणियों में से कोई भी एचईआई मौजूदा आरएएफ के अनुसार असेसमेंट कराना चाहता है तो कॉलेजों का ऑनलाइन मोड और विश्वविद्यालयों का हाइब्रिड मोड में पीयर टीम असेसमेंट किया जाएगा।
