Dr Ganesh Baraiya Success Story: गुजरात के भावनगर में स्थित सर तख्तासिंह जी अस्पताल के ट्रॉमा सेंटर में 3 फीट के युवक के गले में स्टेथोस्कोप टांगा देखा और उसे मरीजों की जांच करता हुआ देखा तो लोग दंग रह गए। जी हां, वह एक डॉक्टर है, जिसने कई चुनौतियों का सामना करते हुए सफलता हासिल की है। यह कहानी है वहां काम करने वाले डॉ. गणेश बरैया की, जिन्होंने अपनी शारीरिक अक्षमता और समाज की रूढ़ियों (Stereotypes) को हराकर मेडिकल के क्षेत्र में एक नई मिसाल पेश की है। और साबित किया है कि कुछ पाने की इच्छाशक्ति आपको कितना आगे पहुंचा सकती है। 72% दिव्यांगता के बावजूद डॉ. गणेश आज देश के सबसे छोटे कद वाले डॉक्टर के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे हैं।
कौन है डॉक्टर गणेश बरैया?
गणेश बरैया, गोरखी गांव में एक किसान परिवार में पैदा हुए। वह अपने 9 भाई-बहनों में 8वें स्थान पर हैं। और अपने परिवार में इकलौते हैं, जो ड्वार्फिज्म यानी बौनेपन का शिकार हैं। गणेश को बचपन से कई तकलीफों का सामना करना पड़ा है। एक समय ऐसा भी था जब सर्कस वालों ने उन्हें खरीदने तक का प्रयास किया था।
सर्कस वाले गणेश को खरीदना चाहते थे
इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के अनुसार, जब गणेश करीब 10 साल के थे तो उन्हें सर्कस मंडली के लोग खरीदना चाहते थे। उन्हें 5 लाख रुपये में का ऑफर भी किया था, लेकिन गणेश के पिता ने इससे साफ इंकार कर दिया।

डॉक्टर गणेश बरैया से
पिता ने ठाना सम्मान से जिएगा बेटा
सर्कस वाले मामले के बाद गणेश के पिता ने तय कर लिया था कि उनका बेटा किसी की दया का पात्र तो बिल्कुल नहीं बनेगा। वह भी आम बच्चों की तरह ही पढ़ाई करेगा और सम्मान से जिएगा। रिपोर्ट के अनुसार, उनकी बहनें उन्हें गोद में उठाकर स्कूल ले जाती थीं और पिता कंधे पर बिठाकर पढ़ने भेजते थे।
नीट परीक्षा की पास करने के बाद एडमिशन से मना
गणेश के जीवन ने नया मोड़ लिया जब उन्होंने दिव्यांग कोट से तहत 2018 में नीट की परीक्षा दी और उसे पास कर दिखाया। नीट परीक्षा पास करने के बाद भी मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया ने गणेश को एमबीबीएस में दाखिला देने से मना कर दिया था। लेकिन गणेश ने हार नहीं मानी और मेडिकल काउंसिल के फैसले के खिलाफ कोर्ट में अर्जी दी। लेकिन गुजरात कोर्ट ने काउंसिल के फैसले को दोहराया।
हताश गणेश के जीवन में आई रोशनी की किरण
हाईकोर्ट के फैसले के बाद हताश गणेश के जीवन ने एक बार फिर मोड़ लिया, जिसमें डॉ दलपत कटारिया ने बताया कि उनकी याचिका को सुप्रीम कोर्ट में डाला गया है। एक साल की लंबी सुनवाई के बाद सुप्रीम कोर्ट ने गणेश के हक में फैसला सुनाते, जिसके बाद उन्होंने 2019 में भावनगर में स्थित मेडिकल कॉलेज से एमबीबीएस की शिक्षा प्राप्त की।

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मेडिकल की पढ़ाई के दौरान आई कई चुनौतियां
मेडिकल की शिक्षा प्राप्त करने के दौरान गणेश को स्पीड में लिख पाने में दिक्कत का सामना करना पड़ रहा था। पेपर लंबे होते थे और उसके अनुसार, उनके पास समय कम होता था। लेकिन शिक्षकों, सीनियर और अन्य साथियों ने उनकी सहायता की। उन्हें परीक्षा के समय एक राइटर के साथ अतिरिक्त समय भी दिया गया। एक बार में सारे सेमेस्टर की परीक्षा पास कर उन्होंने साबित किया कि वह मेडिकल के लिए ही बने हैं। मेडिकल की शिक्षा प्राप्त करते हुए उनके साथियों और शिक्षकों ने उनकी बहुत सहायता की है। पहली सीट रोकने से लेकर नोट्स को पढ़कर सुनाने तक दोस्तों ने उनका साथ देने का हर मुमकिन प्रयास किया है।
डॉक्टर बनने पर गणेश ने क्या कहा
डॉक्टर गणेश आज अपनी सफलता का पूरा श्रेय उन सभी लोगों को देते हैं, जो उनके साथ हर स्थिति में खड़े रहे। माता-पिता के साथ डॉ कटारिया और कॉलेज के प्रिंसिपल को खास धन्यवाद करते हैं।
आगे क्या है डॉक्टर गणेश का प्लान
गणेश ने डॉक्टर बनने का अपना सपना तो पूरा कर लिया है। लेकिन वह अपनी सीमाओं को अच्छे से जानते हैं। यही कारण है कि वह आगे नॉन सर्जिकल फील्ड में पोस्टग्रेजुएशन कोर्स करना चाहते हैं। वह जानते हैं कि सर्जरी के लिए शारीरिक क्षमता चाहिए और वह किसी भी मरीज को जोखिम में नहीं डाल सकते हैं, इसलिए वह नॉन सर्जिकल फील्ड में आगे बढ़ने की तैयारी कर रहे हैं। फिलहाल वह भावनगर के सिर टी जनरल अस्पताल में नौकरी कर रहे हैं।
