भारत: भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान दिल्ली (आईआईटी दिल्ली) ने हेल्थकेयर प्रोडक्ट डेवलपमेंट एंड मैनेजमेंट में अपने ऑनलाइन पोस्टग्रेजुएट डिप्लोमा के दूसरे बैच के लिए एडमिशन शुरू कर दिए हैं। आईआईटी दिल्ली के सेंटर फॉर बायोमेडिकल इंजीनियरिंग द्वारा पेश किया गया। यह कार्यक्रम बायोमेडिकल इनोवेशन, रेगुलेटरी साइंस, कमर्शियलाइजेशन स्ट्रैटेजी और प्रोडक्ट मैनेजमेंट सहित बहु-विषयक शिक्षण अनुभव प्रदान करता है। इस पाठ्यक्रम के माध्यम से शिक्षार्थियों को हेल्थकेयर मार्केट के लिए तैयार करना है।
12 महीने का कोर्स
हेल्थकेयर प्रोडक्ट डेवलपमेंट एंड मैनेजमेंट में 12 महीने का यह ऑनलाइन पोस्टग्रेजुएट डिप्लोमा उन लोगों के लिए बेहतरीन है जो हेल्थकेयर के क्षेत्र में अपना भविष्य बनाना चाहते हैं, चाहे वे रिसर्च, बिजनेस या मेडिकल टेक्नोलॉजी में काम कर रहे हों। यह कोर्स आपको बायोटेक, मेडिकल डिवाइस, फार्मा और डिजिटल हेल्थ जैसे क्षेत्रों में नौकरी के लिए है। इसमें आपको मानव शरीर और बीमारियों की बुनियादी समझ दी जाती है ताकि आप बेहतर मेडिकल प्रोडक्ट बना सकें।
तेजी से बढ़ रहा है भारत का हेल्थकेयर सेक्टर
भारत का हेल्थकेयर सेक्टर बहुत तेजी से बढ़ रहा है, जिसका मुख्य कारण बड़ी आबादी और तकनीक का बढ़ता इस्तेमाल है। एक अनुमान के मुताबिक, दुनिया के बड़े देशों की बराबरी करने के लिए भारत को अभी लगभग 24 लाख और अस्पताल बेड की जरूरत है, जिसके लिए करीब 2 अरब वर्ग फुट जगह में नया बुनियादी ढांचा तैयार करना होगा। ब्रिकवर्क रेटिंग्स का मानना है कि भारत का हॉस्पीटल सेक्टर 2025 के 122 अरब डॉलर से बढ़कर 2030 तक 202.5 अरब डॉलर से भी ज्यादा का हो सकता है। इस तरक्की में बढ़ती मांग, निजी निवेश, सरकारी योजनाओं और एआई व टेलीमेडिसिन जैसी नई तकनीकों की बड़ी भूमिका है।
हेल्थकेयर मार्केट में एआई का इस्तेमाल
हेल्थकेयर मार्केट में एआई का इस्तेमाल भी 15% से बढ़कर 2030 तक 30% से ज्यादा होने की उम्मीद है। इसके अलावा, वियरेबल मेडिकल डिवाइसेस का मार्केट भी 2033 तक बढ़कर 184.75 अरब डॉलर पहुंचने का अनुमान है जोकि 2024 में 42.1 अरब डॉलर का था। ऐसा इसलिए क्योंकि लोग अब अपनी सेहत को लेकर ज्यादा जागरूक हो रहे हैं और डिजिटल तकनीकों को अपना रहे हैं।
दूसरे बैच की घोषणा के बारे में प्रो. अर्णब चंदा, प्रोग्राम कोऑर्डिनेटर, आईआईटी दिल्ली ने कहा, “भारत के हेल्थकेयर क्षेत्र में हो रही तरक्की की वजह से अब ऐसे प्रोफेशनल्स की भारी मांग है, जो साइंस की गहरी समझ के साथ-साथ असल जिंदगी में काम आने वाले मेडिकल प्रोडक्ट्स बना सकें। यह डिप्लोमा कोर्स छात्रों को सिखाता है कि कैसे अस्पताल की जरूरतों को समझकर ऐसे सॉल्यूशन तैयार किए
जाएं जो नियमों के मुताबिक हों और जिन्हें बड़े स्तर पर बाजार में उतारा जा सके। हम इंजीनियरिंग, डॉक्टरी सलाह और बिजनेस की रणनीति को एक साथ जोड़कर पढ़ाते हैं। प्रैक्टिकल प्रोजेक्ट्स और एक्सपर्ट्स की मदद से हम आपको इस काबिल बनाते हैं कि आप ऐसे नए आविष्कार कर सकें जो सरकारी मानकों और बाज़ार की उम्मीदों, दोनों पर पूरी तरह खरे उतरें।”
कौन कर सकता है आवेदन
स्नातक, स्नातकोत्तर और कार्यरत पेशेवर जिनके पास किसी भी इंजीनियरिंग अनुशासन में BE/BTech/BCA/BIT या समकक्ष, लाइफ साइंसेज और संबंधित बेसिक साइंसेज में BSc (या समकक्ष), तथा MBBS, BDS, B Pharm या संबद्धित योग्यता है, वे आवेदन कर सकते हैं। कार्यक्रम हेल्थकेयर, बायोमेडिकल, बायोटेक या संबंधित उद्योगों के प्रोफेशनल्स जिनके पास BE/BTech/BSc/डिप्लोमा इन इंजीनियरिंग/MBA/MCA योग्यताएं हैं, वे भी आवेदन कर सकते हैं।
450+ घंटे की लर्निंग शामिल
इस एक वर्षीय कार्यक्रम में 450+ घंटे की लर्निंग शामिल है, जिसमें 200 घंटे के लाइव ऑनलाइन सेशन्स, 120 घंटे का प्रैक्टिकल वर्क और प्रोजेक्ट्स तथा दो दिवसीय कैंपस इमर्शन शामिल हैं। पाठ्यक्रम दो सेमेस्टर में 18 अकादमिक क्रेडिट्स का है और इसमें आठ मॉड्यूल्स शामिल हैं, जो मैकेनिक्स ऑफ बायोमटेरियल्स, बायोफैब्रिकेशन, रिसर्च टेक्नीक्स इन बायोमेडिकल इंजीनियरिंग, सॉफ्ट टिश्यू कैरेक्टराइजेशन एंड एप्लिकेशन्स, हेल्थकेयर वियरेबल्स डिजाइन एंड एप्लिकेशन्स, तथा हेल्थकेयर एंटरप्रेन्योरशिप एंड मैनेजमेंट आदि विषयों को कवर करते हैं।
यह कार्यक्रम आईआईटी दिल्ली के फैकल्टी और हेल्थकेयर इंडस्ट्री के अनुभवी विशेषज्ञों द्वारा संचालित किया जाता है। इसकी कक्षाएं लाइव और इंटरैक्टिव ऑनलाइन माध्यम से होती हैं, जहां पढ़ाई को व्यावहारिक अनुभव से जोड़ा जाता है। प्रतिभागी रियल-टाइम सिमुलेशन, केस स्टडी और प्रोजेक्ट्स पर काम करते हैं, जिससे उन्हें विषय की गहरी समझ मिलती है। इसके अलावा, दो दिन का वैकल्पिक कैंपस इमर्शन कार्यक्रम भी होता है, जहां प्रतिभागियों को साथियों से सीखने और पेशेवर अनुभव साझा करने का अवसर मिलता है। कोर्स सफलतापूर्वक पूरा करने पर शिक्षार्थियों को एफिलिएट अलुमनाई स्टेटस दिया जाता है।
