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IAS Success Story: पढ़ाई के खिलाफ था परिवार लेकिन बेटी को थी IAS बनने की जिद, 8वीं रैंक लाकर रचा इतिहास

  • Authored by: कुलदीप राघव
  • Updated Oct 3, 2023, 07:51 AM IST

IAS Vandana Singh Chauhan Success Story: 4 अप्रैल, 1989 को जन्मीं वंदना सिंह चौहान के परिवार में लड़कियों को पढ़ाने का चलन नहीं था। गांव में कोई अच्छा स्कूल नहीं था, जिसके कारण उनके भाईयों को पढ़ने के लिए बाहर भेज दिया था। वंदना ने पिता से कहा कि उन्हें भी बाहर भेजें लेकिन पिता टालते रहे। इसी बेटी ने यूपीएससी में 80वीं रैंक लाकर इतिहास रच दिया।

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IAS Vandana Singh Chauhan Success Story

IAS Vandana Singh Chauhan Success Story: हरियाणा के नसरुल्लागढ़ की रहने वाली वंदना सिंह चौहान के परिवार के लोग नहीं चाहते थे कि वह बाहर निकलकर पढ़ाई-लिखाई करें लेकिन उन्हें आईएएस बनने की जिद थी। 4 अप्रैल, 1989 को जन्मीं वंदना के परिवार में लड़कियों को पढ़ाने का चलन नहीं था। गांव में कोई अच्छा स्कूल नहीं था, जिसके कारण उनके भाईयों को पढ़ने के लिए बाहर भेज दिया था। वंदना ने पिता से कहा कि उन्हें भी बाहर भेजें लेकिन पिता टालते रहे। तब उन्होंने पिता से कह दिया कि मैं लड़की हूं, इसलिए मुझे पढ़ने नहीं भेज रहे।

एक इंटरव्यू के दौरान वंदना के पिता महिपाल सिंह चौहान ने बताया था कि गांव में कोई अच्छा स्कूल नहीं था, जिसके कारण उन्होंने अपने बेटे को पढ़ने के लिए बाहर भेज दिया था। वंदना के पिता बताते हैं, “उस दिन के बाद से ही उसने रट लगा ली थी कि मुझे कब पढ़ने भेजोगे?” एक दिन जब वंदना के सब्र का बांध टूट गया तो उन्होंने गुस्से में आकर पिता से कह दिया कि मैं लड़की हूं, इसलिए मुझे पढ़ने नहीं भेज रहे।

बेटी की यह बात पिता को इस कदर चुभी कि उन्होंने वंदना का एडमिशन मुरादाबाद के एक गुरुकुल में करवा दिया। परिवार के लोग नहीं चाहते थे कि वंदना सिंह चौहान बाहर निकलकर पढ़ाई-लिखाई करें लेकिन उन्हें आईएएस बनने की जिद थी। इसी जिद के लिए वह परिवार के खिलाफ जाकर पढ़ीं और यूपीएससी में 8वीं रैंक लाकर इतिहास रच दिया।

आईएएस बनने से पहले वकालत

वंदना को बाहर भेजने के फैसले का उनके दादा, ताऊ और चाचा समेत परिवार के सभी सदस्यों ने विरोध किया लेकिन इसी प्रतिभाशाली बेटी ने पूरे परिवार का नाम रोशन किया। 12वीं की परीक्षा के बाद वंदना ने घर पर रहकर यूपीएससी की तैयारी शुरू कर दी। 12वीं की पढ़ाई के बाद वंदना ने वकालत की पढ़ाई की!

हिंदी मीडियम से पढ़ी वंदना

वंदना परिवार के खिलाफ जाकर पढ़ीं और यूपीएससी में 8वीं रैंक लाकर इतिहास रच दिया। हिंदी मीडियम से पढ़ी वंदना ने साल 2012 में यूपीएससी में आठवीं रैंक पाई थी! वंदना ने सेल्फ स्टडी से मुकाम पाया। वो दिन में 18-20 घंटों तक खुद को कमरे में बंद करके सिर्फ़ पढ़ाई करती।

कुलदीप राघव
कुलदीप राघवauthor

कुलदीप राघव प्रिंट और डिजिटल पत्रकारिता में 13 वर्षों से अधिक अनुभव का रखने वाले पत्रकार हैं। टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में वह एजुकेशन सेक्शन को लीड कर रहे हैं। एजुकेशन सेक्टर की गहरी समझ और लगातार फील्ड-ओरिएंटेड रिपोर्टिंग के कारण कुलदीप इस बीट के भरोसेमंद पत्रकारों में गिने जाते हैं। वे स्कूल और उच्च शिक्षा, प्रतियोगी परीक्षाएं, एडमिशन और काउंसलिंग प्रोसेस, स्कॉलरशिप, करियर गाइडेंस, जॉब अलर्ट, स्किल डेवलपमेंट और युवाओं से जुड़े सामाजिक-शैक्षणिक मुद्दों पर तथ्यात्मक और आसान भाषा में खबरें पब्लिश करते हैं। कुलदीप ने अब तक 18,000 से अधिक बाइलाइन स्टोरीज लिखी हैं, जिनमें कई एक्सक्लूसिव रिपोर्ट्स, विश्लेषण, डेटा आधारित रिपोर्ट्स और एक्सप्लेनर शामिल हैं।

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