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एशियाई खेलों में भारतीय दल के प्रदर्शन की समीक्षा करेगा खेल मंत्रालय, निशानेबाजी और बैडमिंटन पर रहेगा फोकस

खेल मंत्रालय 20वें एशियाई खेलों में भारतीय दल के प्रदर्शन की समीक्षा करेगा। मंत्रालय समीक्षा के आधार पर अपनी नीति में बदलाव करेगा।

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मनसुख मांडविया (फोटो क्रेडिट Mansukh Mandaviya X)

नई दिल्ली: खेल मंत्रालय 13 अक्टूबर को राष्ट्रीय महासंघों के साथ एक दिवसीय बैठक में हाल में संपन्न एशियाई खेलों में भारत के प्रदर्शन की समीक्षा करेगा जिसमें फोकस बैडमिंटन, निशानेबाजी और एथलेटिक्स में कुछ ’अनुभवी’ खिलाड़ियों के निराशाजनक प्रदर्शन पर रहेगा। इसके साथ ही ’टारगेट ओलंपिक पोडियम स्कीम’ (टॉप्स) के जरिए धनराशि जारी करने की भी फिर से समीक्षा की जाएगी। भारत ने आइची-नागोया खेलों में 21 स्वर्ण सहित 85 पदक जीते जो हांग्झोउ में पिछले चरण में हासिल किए गए 106 पदकों से काफी कम था।

जीतने चाहिए थे 150 पदक

खेल मंत्रालय के एक सूत्र ने गुरुवार को कहा,'हमें कम से कम 150 पदक जीतने चाहिये थे और हम जीत भी सकते थे। कुछ अनुभवी खिलाड़ी स्पष्ट रूप से ’कम्फर्ट जोन’ में थे और इसका असर उनके प्रदर्शन में दिखा। मंत्रालय 13 अक्टूबर को राष्ट्रीय खेल महासंघों के साथ बैठक में इसकी समीक्षा करेगा।'

बैडमिंटन में मिला केवल एक कांस्य

भारत को 2026 एशियाई खेलों में बैडमिंटन में सिर्फ एक टीम कांस्य पदक मिला जबकि पिछले खेलों में एक स्वर्ण,एक रजत और कांस्य पदक जीता था। निशानेबाजों (विशेषकर पिस्टल में) का प्रदर्शन अपेक्षाकृत खराब रहा जबकि दोनों खेलों के भारतीय दल में ओलंपिक पदक विजेता शामिल थे। सूत्र ने कहा,'यह ताज्जुब की बात है कि ओलंपिक पदक विजेता एशियाड में पदक नहीं जीत पाये जबकि एशियाई खेलों में पदार्पण करने वाले भारत के 310 खिलाड़ियों में से 106 ने पदक जीते। 23 स्पर्धाओं में करीब 89 अनुभवी खिलाड़ी नाकाम रहे। बैठक में समीक्षा की जायेगी कि नीति में क्या बदलाव करने की जरूरत है । इतना पैसा खर्च करने के बाद भी कुछ खेलों में अपेक्षित परिणाम क्यो नहीं मिले।'

एथलेटिक्स में मिला केवल एक गोल्ड

एथलेटिक्स में भारत को पिछले एशियाई खेलों में छह स्वर्ण पदक मिले थे जबकि इस बार सिर्फ एक पदक महिला चार गुणा 400 मीटर रिले टीम हासिल कर सकी। खेलों के दौरान खिलाड़ियों के चोटिल होने को लेकर भी सवाल उठे हैं। एथलेटिक्स में ज्योति याराजी ने चोट के कारण महिलाओं की 100 मीटर बाधा दौड़ में हिस्सा ही नहीं लिया और त्रिकूद में प्रवीण चित्रावेल पहले प्रयास में ही चोटिल हो गए। वहीं 400 मीटर बाधादौड़ में यशस पलाक्षा अपनी हीट के बीच से हट गए थे। इसके अलावा एमएमए में वरुण सान्याल स्पर्धा से पहले अनफिट हो गए।

टॉप्स स्कीम की होगी समीक्षा

सूत्र ने कहा,'कुछ खिलाड़ी खेलों में पहुंचने के बाद चोटों की घोषणा कर रहे थे। अगर एथलीट चोटिल थे तो वे गए कैसे। उन्हें तैयार करने में करोड़ों रुपये खर्च किए गए हैं।' टॉप्स के जरिये खिलाड़ियों को मनचाही धनराशि आवंटित करने की भी समीक्षा का जिक्र करते हुए सूत्र ने कहा,'टॉप्स फंडिंग की समीक्षा निश्चित तौर पर होगी। टॉप्स के खिलाड़ियों को मनचाहे कोचों, विदेश में अभ्यास और हर सुविधा के लिये सरकार ने भारी खर्च किया लेकिन नतीजे अपेक्षित नहीं मिले।' उन्होंने आगे कहा,'टॉप्स के तहत नौ स्पर्धाओं के 34 खिलाड़ियों पर 27 करोड़ रुपये से अधिक खर्च हुए लेकिन प्रदर्शन निराशाजनक रहा जिनमें बैडमिंटन और निशानेबाजी के प्रमुख खिलाड़ी हैं।

14 खेलों में भारत ने पहली बार जीते पदक

' खेल मंत्रालय ने एशियाई खेलों से पहले कहा था कि तीन साल के चक्र में खिलाड़ियों को तैयार करने में 700 करोड़ रुपये से अधिक खर्च किए गए थे। भारत ने 14 खेलों में पहली बार पदक जीते जिनमें साफ्ट टेनिस, एमएमए, रिकर्व तीरंदाजी शामिल है जबकि क्रिकेट, कबड्डी और हॉकी जैसे टीम खेलों में महिला और पुरूष दोनों वर्गों में भारत को स्वर्ण पदक मिले। महिला हॉकी टीम ने 44 साल बाद एशियाई खेलों में स्वर्ण जीता। पहली बार भारत की महिला और पुरुष दोनों हॉकी टीमों ने एक साथ स्वर्ण जीता और ओलंपिक के लिये भी क्वालीफाई कर लिया।

Navin Chauhan
नवीन चौहानauthor

नवीन चौहान टाइम्स नाउ नवभारत की स्पोर्ट्स टीम में कार्यरत एक अनुभवी पत्रकार हैं। जर्नलिज़्म में पीजी डिप्लोमा प्राप्त करने के बाद वे पिछले 15 वर्षों से सक्रिय रूप से मीडिया जगत में जुड़े हैं। प्रिंट मीडिया और डिजिटल—दोनों माध्यमों में काम करने के अनुभव ने उन्हें खेल पत्रकारिता में व्यापक दृष्टिकोण और गहरी समझ प्रदान की है। अपने लंबे करियर में नवीन ने कई बड़े राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय खेल आयोजनों को कवर किया है। इनमें आईपीएल, बैडमिंटन प्रीमियर लीग, इंडियन सुपर लीग, टी20 विश्व कप, आईसीसी विश्व कप, और तीन ओलंपिक—लंदन, रियो और टोक्यो—जैसे प्रतिष्ठित टूर्नामेंट शामिल हैं। नवीन चौहान ने अपने करियर में कई प्रसिद्ध भारतीय खिलाड़ियों और कोचों के इंटरव्यू भी किए हैं, जिनमें पीवी सिंधू, विजेंदर सिंह और पुलेला गोपीचंद जैसे नाम शामिल हैं। अब तक नवीन 15,000 से अधिक आर्टिकल्स लिख चुके हैं, जिनमें ग्राउंड रिपोर्टिंग, विश्लेषणात्मक लेख, स्पेशल स्टोरीज़, प्लेयर प्रोफाइल और टूर्नामेंट-आधारित एक्सप्लेनर शामिल हैं।

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