GK: देश का पहला 'भिखारी मुक्त शहर', जानें क्या हुआ छोटे से बड़े भिखारियों के साथ

आपने लगभग हर शहर में भिखारी देखें होंगे, भारत में भीख मांगना एक व्यापक समस्या का रूप लेता जा रहा है, अनुमान है कि 400,000 से ज्यादा भिखारी नियमित रूप से भीख मांगते हैं। भीख मांगने के कई कारण हैं, जिनमें गरीबी, विकलांगता और विस्थापन के साथ-साथ संगठित भीख मांगने वाले गिरोहों द्वारा शोषण शामिल है। कुछ भिखारी दुर्व्यवहार के शिकार भी होते हैं या उनके पास सहारे का कोई दूसरा साधन नहीं होता। चलिए जानते हैं भारत का कौन सा शहर 'भिखारी मुक्त शहर' घोषित किया गया है।

Authored by: नीलाक्ष सिंहUpdated May 12 2025, 06:00 IST
भारत का पहला 'भिखारी मुक्त शहर'Image Credit : Meta ai01 / 05

भारत का पहला 'भिखारी मुक्त शहर'

इंदौर देश का पहला भिखारी मुक्त शहर बन गया है। प्रशासन द्वारा अभियान शुरू करने से एक साल पहले शहर की सड़कों पर करीब 5,000 भिखारी थे।

क्या हुआ भीख मांगने वालों के साथImage Credit : Meta ai02 / 05

क्या हुआ भीख मांगने वालों के साथ

जिला मजिस्ट्रेट आशीष सिंह ने संवाददाताओं से कहा, "इंदौर देश का पहला भिखारी मुक्त शहर बन गया है।" उन्होंने बताया कि शहर में भिखारियों को रोजगार दिलाने में मदद करके उनका पुनर्वास किया गया।

भीख मांगने वाले बच्चों का क्या?Image Credit : Meta ai03 / 05

भीख मांगने वाले बच्चों का क्या?

भीख मांगने वाले बच्चों को स्कूलों में दाखिला दिलाया गया है। बता दें, इंदौर उन 10 शहरों में शामिल है, जहाँ केंद्रीय मंत्रालय ने भीख मांगने की प्रथा को खत्म करने के लिए पायलट प्रोजेक्ट शुरू किया है।

कब शुरू हुआ था ये अभियानImage Credit : Meta ai04 / 05

कब शुरू हुआ था ये अभियान

महिला एवं बाल विकास विभाग के जिला कार्यक्रम अधिकारी रामनिवास बुधौलिया ने बताया कि फरवरी 2024 में भीख मांगने के खिलाफ अभियान शुरू किया गया था।

शहर में भीख देने पर है प्रतिबंधImage Credit : Meta ai05 / 05

शहर में भीख देने पर है प्रतिबंध

शहर में करीब 5,000 भिखारी थे, जिनमें 500 बच्चे भी शामिल थे। पहले चरण में जागरूकता अभियान चलाया गया, फिर भिखारियों का पुनर्वास किया गया। बता दें, शहर में भिखारियों को पैसे देना या उनसे कुछ खरीदना प्रतिबंधित है।

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