देश के युवाओं को नई तकनीक से जोड़ने के साथ-साथ भारतीय संस्कृति और विरासत से भी जोड़े रखने की दिशा में केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय (दिल्ली) ने बड़ा कदम उठाया है। विश्वविद्यालय ने शैक्षणिक सत्र 2026-27 से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और डेटा साइंस में AICTE से मान्यता प्राप्त B.Tech पाठ्यक्रम शुरू करने की घोषणा की है। यह भारत का पहला संस्कृत विश्वविद्यालय होगा जो इंजीनियरिंग शिक्षा के क्षेत्र में प्रवेश कर रहा है। इस कोर्स में कुल 66 सीटें होंगी, जिनमें 60 नियमित और 6 सुपरन्यूमेरेरी सीटें शामिल हैं।
यह नया पाठ्यक्रम राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 की सोच के अनुरूप तैयार किया गया है, जिसका उद्देश्य संस्कृत संस्थानों को बहुविषयक शिक्षा केंद्रों के रूप में विकसित करना है। इस कोर्स में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, मशीन लर्निंग, डेटा साइंस, पाइथन प्रोग्रामिंग, सांख्यिकी, क्लाउड कंप्यूटिंग, डेटा एनालिटिक्स और डीप लर्निंग जैसे आधुनिक तकनीकी विषय पढ़ाए जाएंगे। साथ ही नेचुरल लैंग्वेज प्रोसेसिंग (NLP), कंप्यूटेशनल लिंग्विस्टिक्स, मशीन ट्रांसलेशन, स्पीच रिकग्निशन, कन्वर्सेशनल AI, लैंग्वेज टेक्नोलॉजी, नॉलेज रिप्रेजेंटेशन और प्राचीन पांडुलिपियों के लिए OCR जैसी भाषा आधारित तकनीकों पर भी विशेष ध्यान दिया जाएगा।
इस कार्यक्रम का उद्देश्य संस्कृत और भारतीय भाषाओं के लिए नए AI टूल विकसित करना, प्राचीन ग्रंथों और पांडुलिपियों का डिजिटलीकरण एवं संरक्षण तेज करना तथा भारतीय ज्ञान परंपरा और आधुनिक तकनीक के बीच मजबूत सेतु बनाना है। इसके अलावा छात्र आयुर्वेद, योग, ज्योतिष, वास्तु और न्याय जैसे पारंपरिक विषयों में भी आधुनिक कंप्यूटेशनल तकनीकों का उपयोग सीख सकेंगे।
इस पहल की सराहना करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि यह प्रयास युवाओं को नई तकनीक के लिए तैयार करने के साथ-साथ उन्हें अपनी जड़ों और विरासत से भी जोड़े रखेगा। उन्होंने कहा कि यह पहल भारतीय भाषाओं के लिए नए AI टूल विकसित करने और हमारे प्राचीन ग्रंथों व पांडुलिपियों के डिजिटलीकरण और संरक्षण को गति देगी। प्रधानमंत्री ने इस महत्वपूर्ण पहल के लिए केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय को शुभकामनाएं भी दीं।
