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Explained: क्या है Flipped Classroom Model, ‘उल्टी-पुल्टी शिक्षा’ का ये तरीका कैसे करता है काम

Flipped Classroom Model में फ्लिप का मतलब होता है किसी चीज को उलटना। फ्लिप क्लासरूम का मतलब हुआ कि पारंपरिक क्लासरूम के तौर- तरीकों को पूरी तरह से उलट देना। अपने नाम के मतलब की ही तरह ये मॉडल काम भी करता है। मगर एक बार को नाम सुनकर दिमाग में ये ख्याल आता है कि क्या पढ़ाई-लिखाई के तरीकों को ही उलट-पुलट दिया जाता है? तो फिर ये कैसी शिक्षा हुई? इससे बच्चों का सर्वांगीण विकास कैसे संभव है? चलिये इन्हीं सवालों के जवाब देते हुए समझने की कोशिश करते हैं कि आखिर ये फ्लिप्ड क्लासरूम होता क्या है ?

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Flipped Classroom Model

Flipped Classroom Model: शिक्षा की बदलती जरूरतों की वजह से इसमें कई सारे बदलाव हो रहे हैं। पारंपरिक शिक्षा पद्धति को कई तरीकों से बदला गया है और आने वाले समय में समय की बढ़ती मांग को देखते हुए इसमें और भी बहुत से बदलाव किए जाएंगे। शिक्षा से जुड़े कई सारे टर्म हैं, जिनका विदेशों में खूब इस्तेमाल होता है। भारत में भले ही ये पूर्ण रूप से लागू न हुए हों मगर समय की डिमांड कभी न कभी इन्हें लागू करवा ही देगी। हालांकि, इनपर गौर जरूर किया जा रहा है। साथ ही कभी-कभी इनका जिक्र जरूर हो जाता है। ऐसा ही एक टर्म है- Flipped Classroom Model. अब शिक्षा सिर्फ क्लासरूम तक सीमित नहीं रह गई है। ये एक तरह से होमवर्क मॉडल का ही उल्टा है, जिसमें पहले घर पर बच्चे अभ्यास करते हैं और फिर कुछ डाउट होने पर क्लासरूम में शिक्षकों से पूछते हैं। इस तरह का मॉडल बल्कि बच्चों को एंगेज करने पर ज्यादा फोकस रखता है, ताकि उनका सर्वांगीण विकास हो सके और ये फ्लिप्ड क्लासरूम मॉडल इस बात को काफी हद तक सही साबित भी करता है।

क्या है Flip Classroom Model का मतलब ?

जैसा कि इसके नाम से ही कुछ-कुछ क्लीयर होता है- इसका मतलब है उलट देना। फ्लिप का मतलब होता है किसी चीज को उलटना। फ्लिप क्लासरूम का मतलब हुआ कि पारंपरिक क्लासरूम या फिर बढ़ने के तौर तरीकों को पूरी तरह से उलट देना। अपने नाम के मतलब की ही तरह ये मॉडल काम भी करता है। पहले नॉलेज लेने या फिर कुछ सीखने का जरिया सिर्फ बुक्स ही हुआ करती थीं। मगर फ्लिप्ड क्लासरूम मॉडल न सिर्फ ज्ञान देने बल्कि गहरी समझ वाली गतिविधियों पर फोकस करने पर जोर देता है। यहां छात्र सिर्फ क्लासरूम में बुक्स पर निर्भर रहने की बजाय पहले घर पर सीखते हैं और फिर उसके बाद स्कूल कॉलेजों में जाकर अपने सारे डाउट्स को पूछते हैं।

ट्रेंड में फ्लिप्ड क्लासरूम मॉडल

Image: Canva

कैसे काम करता है शिक्षा का ये मॉडल ? How Flipped Classroom Model Works

यानी कि अब पढ़ाई सिर्फ क्लासरूम तक ही सीमित नहीं रह गई है। डिजिटल दौर में शिक्षा का तरीका भी बदल रहा है। और इसी बदलाव को एक नाम दिया गया है-फ्लिप्ड क्लासरूम मॉडल। इसमें छात्र पहले घर पर सीखते हैं और फिर स्कूल कॉलेजों में जाकर उस ज्ञान को समझते, पूछते और उसका अभ्यास करते हैं। इस तरह के मॉडल में पारंपरिक पढ़ाने के तरीके को उलट दिया जाता है। आमतौर पर क्लासरूम में कुछ पढ़ाया जाता है और फिर घर पर काम करने के लिए होमवर्क दिया जाता है। मगर इस फ्लिप मॉडल में सबकुछ उल्टा होता है।

क्या होता है इस Flip Model में ?

इस मॉडल में प्रैक्टिस और चर्चा क्लास में होती है। और पढ़ाई-लिखाई का काम बच्चे को घर पर करने के लिए दिया जाता है। इस तरह के शिक्षा मॉडल के अपने फायदे और नुकसान भी हैं। फायदे की बात करें तो फ्लिप्ड क्लासरूम मॉडल में छात्र अपनी स्पीड से सीखते हैं। साथ ही क्लास में इंटरैक्शन भी खूब होता है। कमजोर छात्रों को क्लास में अपने डाउट सॉल्व करने का मौका दिया जाता है। रटने की बजाय समझने पर ज्यादा फोकस किया जाता है। प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए इस तरह के मॉडल काफी कारगर होते हैं।

बच्चों के विकास के लिए जरूरी Flipped Model

Photo: Canva

आजकल स्कूली शिक्षा के बाद जब भी बच्चे प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए पढ़ते हैं या फिर सीखते हैं तो कई बार उन्हें दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। खासकर तब जब बात प्रैक्टिकल लर्निंग की हो तो। मगर इस तरह के एजुकेशन मॉडल में बच्चों को पहले ही तैयार किया जाता है। हालांकि फ्लिप्ड क्लासरूम की अपनी कुछ चुनौतियां भी हैं।

क्या भारत में भी आ रहा है Flipped Classroom Model ?

इस तरह के क्लासरूम मॉडल को अपनाने के लिए छात्रों को घर पर रूल्स को फॉलो करने की बेहद जरूरत होती है। हर छात्र के पास इंटरनेट का एक्सेस और डिवाइस होनी चाहिए। साथ ही अगर सभी छात्र कंटेंट ना देखें तो दिक्कत हो सकती है। साथ ही इस तरह के मॉडल को फॉलो करने के लिए शिक्षकों को डिजिटल ट्रेनिंग देनी बेहद जरूरी है। ऐसे में इस तरह के मॉडल को अपनाने के लिए तैयारी बेहद ज्यादा जरूरी है।

भारत में नई शिक्षा नीति के तहत कई तरह के नए शिक्षा के मॉडल को अपनाने पर विचार किया जा रहा है। इस बीच NEP 2020 की बात करें तो इसमें टेक्नोलॉजी आधारित शिक्षा पर जोर देने की बात भी हो रही है। ऐसे में कई CBSE, ICSE और यूनिवर्सिटी इस तरह के मॉडल को अपना भी रही हैं। ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स और स्मार्ट क्लासेज ने इस तरह की शिक्षा मॉडल को आसान बनाया है। फ्लिप्ड क्लासरूम मॉडल शिक्षा को छात्र केंद्रित बनाता है। अगर सही संसाधन और अनुशासन हो तो ये मॉडल भविष्य में पढ़ाई का एक मजबूत आधार बन सकता है।

Kusum Bhatt
कुसुम भट्टauthor

टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में बतौर एजुकेशन जर्नलिस्ट कार्यरत कुसुम भट्ट शिक्षा जगत से जुड़ी हर छोटी-बड़ी हलचल पर पैनी नजर रखती हैं। मास्टर्स इन मास कम्युनिकेशन की डिग्री प्राप्त करने के बाद वह पिछले 5 सालों से एजुकेशन बीट को मजबूती से संभाल रही हैं। कुसुम को खबरों को सबसे पहले ब्रेक करने, विषय की गहराई में जाकर स्टोरी तैयार करने और युवाओं को उनके करियर से जुड़ी सटीक जानकारी देने में विशेष दक्षता प्राप्त है। कुसुम की लेखन शैली संक्षिप्त, शोध आधारित और प्रभावशाली है। वे एग्जाम टिप्स, करियर गाइडेंस, सरकारी नौकरी से जुड़ी खबरें, बोर्ड रिजल्ट और सक्सेस स्टोरीज़ जैसे विषयों पर सटीक और भरोसेमंद कंटेंट तैयार करने के लिए जानी जाती हैं। कुसुम अबतक पांच हजार से अधिक बाइलाइन रिपोर्ट पब्लिश कर चुकी हैं। उन्हें ब्लॉगिंग, वेब स्टोरीज और ट्रेंडिंग एजुकेशनल टॉपिक्स पर काम करने का खास शौक है। उनका मानना है कि – "शिक्षा सिर्फ करियर का माध्यम नहीं, बल्कि सोच और समाज दोनों को बदलने की शक्ति रखती है।"

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