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Red Planet Day 2025: सौर मंडल का 'लाल ग्रह', अनोखे रहस्यों से भरी है जिसकी 'दुनिया'

Red Planet : सौरमंडल में आठ ग्रह हैं और इनकी दुनिया रोचक और हैरतअंगेज रहस्यों से भरी है। इन रहस्यों का अध्ययन रोमांचित करता है। इन सभी ग्रहों की अपनी प्रकृति और विशेषताएं हैं और आज हम आपको जिस ग्रह के बारे में बताने वाले हैं उसे तो 'लाल ग्रह' के नाम से जाना जाता है। सौरमंडल में मौजूद मंगल ग्रह को रेड प्लेनेट यानी लाल ग्रह कहा जाता है। 28 नवंबर को लाल ग्रह दिवस यानी रेड प्लेनेट डे मनाया जाता है। इस अवसर पर जानें मंगल ग्रह से जुड़ी खास बातें-

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Red Planet Day: लाल ग्रह की रहस्यमयी दुुनिया (Canva)

Red Planet Day 2025: सौरमंडल में बुध, शुक्र, पृथ्वी, मंगल, बृहस्पति, शनि, यूरेनस और नेप्च्यून जैसे आठ ग्रह हैं। हर ग्रह की अपने-अपने आकार, संरचना और अपने वायुमंडल के अनुसार अलग विशेषताएं हैं। समय-समय पर वैज्ञानिक इन ग्रहों की रिसर्च करते रहे हैं। मगर इन सब ग्रहों में मंगल की बात करें तो ये अपने आप में बेहद खास है और वैज्ञानिकों को अन्य ग्रहों के मुकाबले मंगल ग्रह के बारे में जानने की ज्यादा दिलचस्पी है। मंगल सौरमंडल में हमारा पड़ोसी है और ऐसा ग्रह है, जहां रहने की कल्पना की जा सकती है। मगर यही एक ऐसा ग्रह है, जिसपर आज तक कोई इंसान नहीं गया। इसके रहस्यों को वैज्ञानिक लंबे समय से जानने की कोशिश कर रहे हैं। वैज्ञानिकों का मानना है कि मंगल पर पानी मौजूद है। साथ ही अपने लाल रंग की वजह से भी ये लोगों के लिए आकर्षण का केंद्र है। मंगल ग्रह को रेड प्लेनेट भी कहा जाता है और हर साल 28 नवंबर को रेड प्लेनेट डे मनाया जाता है। ऐसे में चलिये जानते हैं इस दिन को मनाने के पीछे की वजह और मंगल ग्रह से जुड़ी विशेषताओं के बारे में...

क्या मंगल ग्रह पर संभव है जीवन? Life in Red Planet

मंगल ग्रह कई मायनों में अपने पड़ोसी ग्रह पृथ्वी के जैसा है। यहां पर दिन रात का चक्र लगभग हमारे ग्रह जैसा ही है। यहां का एक दिन पृथ्वी से सिर्फ 37 मिनट ही बड़ा होता है। मंगल पर पृथ्वी की ही तरह ठंड और गर्मी को नियंत्रित करने के लिए वातावरण है। इसके अलावा पृथ्वी की धुरी भी मंगल की धुरी जितनी ही घूमी हुई है। ग्रहों पर जब रिसर्च की गई तो पता चला कि मंगल ग्रह पर पृथ्वी जैसी कई सारी समानताएं हैं और यही समानताएं वहां पर जीवन की उम्मीदों को बढ़ाती हैं।

कभी मंगल ग्रह पर हुआ करती थी जिंदगी : How Red planet destroyed

साढ़े तीन अरब साल पहले तक मंगल ग्रह जीवन के लिए बिल्कुल अनुकूल था। मगर मंगल ग्रह ने अपने वातावरण का बड़ा हिस्सा खो दिया। सूर्य के आते कणों के निरंतर प्रवाह ने मंगल के ऊपरी वातावरण को अंतरिक्ष में उड़ा दिया। आज मंगल का वातावरण पृथ्वी के मुकाबले 100 गुना कम सघन है। मगर कभी ये जिंदगी के लिए सघन था। आज मंगल सिर्फ एक सूखा हुआ रेगिस्तान है। हालांकि इसके ध्रुवों की सतह पर बर्फ जमी है। साथ ही इंसानी बस्तियों के लिए बेशकीमती खजाने भी हैं।

रेड प्लेनेट डे: Which planet is called the Red planet

रेड प्लेनेट के बारे में हम बचपन से ही पढ़ते हुए आ रहे हैं। धूल भरी, ठंडी और रेगिस्तानी दुनिया के ऊपर रेड प्लेनेट का एटमोस्फेयर बहुत पतला है। मौसम, पोलर आइस कैप, कैन्यन और खत्म हो चुके ज्वालामुखी इस बात का चीखकर सबूत देते हैं कि ये कभी बहुत ज्यादा एक्टिव ग्रह हुआ करता था। मंगल ग्रह से जुड़ा 28 नवंबर का दिन बेहद खास माना जाता है और इसके पीछे वजह है स्पेस एक्सप्लोरेशन। 28 नवंबर का दिन इतिहास में बेहद अहम है क्योंकि साल 1964 में NASA का मेरिनर 4 स्पेसक्राफ्ट इस दिन लॉन्च हुआ था। ये मिशन मंगल ग्रह की क्लोज अप तस्वीरें भेजने वाला पहला सफल मिशन बना। इसके बाद इंसानों को मंगल ग्रह के बारे में काफी कुछ पता चला और सबसे अहम बात कि इस ग्रह की तस्वीरों से इससे जुड़ी समझ और भी ज्यादा बढ़ी।

लाल ग्रह पर पृथ्वी जैसी कई सारी समानताएं

लाल ग्रह पर पृथ्वी जैसी कई सारी समानताएं (Canva)

लाल ग्रह पर किस देश के कितने मिशन?

जब से अंतरिक्ष विज्ञान ने तरक्की की है, तब से पृथ्वी के अलावा कई सारे ग्रहों पर वैज्ञानिकों ने रिसर्च की है। मगर चंद्रमा के बाद अब वैज्ञानिकों की नजर मंगल पर आकर टिक गई हैं। वैज्ञानिकों में मंगल पर जाने की होड़ सी लग गई है। हमारे सौरमंडल के लाल ग्रह पर पिछले 61 सालों में 58 मिशन भेजे जा चुके हैं। सबसे पहले यहां मिशन भेजने की शुरुआत सोवियत संघ ने साल 10 अक्तूबर 1960 में की थी मगर सफलता अमेरिका को मिली थी।

अमेरिका ने मंगल ग्रह पर अभी तक सबसे ज्यादा मिशन चलाए हैं। इनमें से कई मिशन अब भी सक्रिय हैं। मंगल पर अब तक कुल 58 मिशन भेजे गए हैं। इनमें से 30 फेल और 31 सफल रहे हैं। अमेरिका ने मंगल ग्रह पर अपने 29 मिशन भेजे हैं। सोवियत संघ ने 22, यूरोपियन यूनियन ने मंगल ग्रह पर 4 मिशन भेजे हैं। वहीं भारत, जापान, यूएई और चीन ने मंगल ग्रह पर 1-1 मिशन भेजे हैं।

मंगल ग्रह पर देशों द्वारा भेजे गए मिशन की जानकारी.

मंगल ग्रह पर देशों द्वारा भेजे गए मिशन की जानकारी.

लाल ग्रह दिवस का महत्व : Red Planet Day Significance

मंगल ग्रह से जुड़े रेड प्लेनेट डे की बात करें तो ये दिन मंगल ग्रह पर पिछली कामयाबियों को सम्मान देने, साइंटिफिक सिसर्च में मंगल ग्रह के महत्व को दिखाने और भविष्य के एक्सप्लोरेशन को आगे बढ़ाने के लिए प्रेरित करने का दिन है। 28 नवंबर का ही दिन था, जब एक सफल मिशन के चलते हमें एक शानदार और रहस्यमयी ग्रह के बारे में जानकारी मिली। साथ ही इस ग्रह की तस्वीरें सामने आईं, जिससे इसे और भी करीब से जानने का मौका मिला।

मंगल को क्यों कहते हैं लाल ग्रह?

मंगल ग्रह को लाल ग्रह इसलिए बोला जाता है क्योंकि इसकी सतह पर आयरन ऑक्साइड की मात्रा काफी ज्यादा है। इसी वजह से इसका रंग लाल और नारंगी सा दिखाई पड़ता है। मंगल के इसी रंग के चलते इसे दूर से ही आसानी से पहचाना जा सकता है।

रेड प्लैनेट डे का इतिहास : Red Planet Day History

रेड प्लैनेट डे की शुरुआत 28 नवंबर 1964 से हुई थी, जब नासा के मेरिनर 4 स्पेसक्राफ्ट को मंगल ग्रह की अपनी ऐतिहासिक यात्रा पर लॉन्च किया गया था। इस मिशन ने जुलाई साल 1965 में मंगल ग्रह पर पहुंचकर और उसकी सतह की पहली क्लोज अप तस्वीरें भेजकर लाल ग्रह के साथ पहली बार इंसानों की वर्चुअल मुलाकात करवाई। इन तस्वीरों में दिखा एक सुनसान, गड्ढों भरा नजारा। जिसके बाद इसमें संभावित जीवन और कई सारी नहरों और पानी को लेकर ढेर सारी जानकारी मिली। इससे पहले मंगल ग्रह को लेकर लोगों का सिर्फ अनुमान ही था। ये कैसा दिखता है, वहां मानव जीवन संभव है फिर नहीं? क्या वहां पर पेड़ पौधे हैं... कई ऐसे सवाल थे, जिसका जवाब इंसान लंबे समय से खोजने की कोशिश कर रहे थे।

क्यों मनाया जाता है रेड प्लेनेट डे

क्यों मनाया जाता है रेड प्लेनेट डे (Canva)

वैज्ञानिकों के लिए क्यों जरूरी है लाल ग्रह ?

मंगल ग्रह हमेशा से ही वैज्ञानिक दृष्टि से भी खास रहा है, क्योंकि ये पृथ्वी से मिलता-जुलता है। मंगल ग्रह में जीवन होने की संभावनाएं हैं। ग्रह की जियोलॉजी, एटमास्फियर और पानी की संभावनाओं को समझने से पृथ्वी के अतीत और भविष्य की जानकारी मिलती है खासकर क्लाइमेट चेंज और ग्रहों के विकास के बारे में।

लाल ग्रह पर जीवन की खोज

एलियन जीवन की खोज मंगल ग्रह की खोज का मुख्य हिस्सा बनी हुई है। पानी की बर्फ, ऑर्गेनिक मॉलिक्यूल और मीथेन स्पाइक्स के निशानों ने पिछले माइक्रोबियल जीवन के बारे में अंदाजों को हवा दी है। लाल ग्रह दिवस इन नतीजों और उनके असर पर चर्चा को बढ़ावा देता है। साथ ही बीते कुछ सालों में मंगल ग्रह से जुड़े कई वीडियोज और तस्वीरें भी सामने आई हैं, जिन्होंने काफी हैरान किया है। इन तस्वीरों में कहीं मानव आकृति सी नजर आई तो कभी पानी जैसा कुछ.. इन्हीं सब चीजों ने मंगल ग्रह को वैज्ञानिकों के लिए और भी खास बना दिया।

FAQs

लाल ग्रह दिवस कब मनाया जाता है?

लाल ग्रह दिवस हर साल 28 नवंबर को मनाया जाता है। यह दिन मंगल ग्रह (जिसे लाल ग्रह भी कहा जाता है) के बारे में जागरूकता बढ़ाने और 28 नवंबर, 1964 को नासा के मेरिनर 4 अंतरिक्ष यान के प्रक्षेपण की याद में मनाया जाता है।

रेड प्लेनेट डे का संबंध किस ग्रह से है?

मंगल ग्रह पर सबसे पहले कौन सा देश गया था?

क्या भारत देश मंगल पर पहुंचा है?

मंगल पर पहुंचने वाला पहला एशियाई देश कौन सा है?

Kusum Bhatt
कुसुम भट्टauthor

टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में बतौर एजुकेशन जर्नलिस्ट कार्यरत कुसुम भट्ट शिक्षा जगत से जुड़ी हर छोटी-बड़ी हलचल पर पैनी नजर रखती हैं। मास्टर्स इन मास कम्युनिकेशन की डिग्री प्राप्त करने के बाद वह पिछले 5 सालों से एजुकेशन बीट को मजबूती से संभाल रही हैं। कुसुम को खबरों को सबसे पहले ब्रेक करने, विषय की गहराई में जाकर स्टोरी तैयार करने और युवाओं को उनके करियर से जुड़ी सटीक जानकारी देने में विशेष दक्षता प्राप्त है। कुसुम की लेखन शैली संक्षिप्त, शोध आधारित और प्रभावशाली है। वे एग्जाम टिप्स, करियर गाइडेंस, सरकारी नौकरी से जुड़ी खबरें, बोर्ड रिजल्ट और सक्सेस स्टोरीज़ जैसे विषयों पर सटीक और भरोसेमंद कंटेंट तैयार करने के लिए जानी जाती हैं। कुसुम अबतक पांच हजार से अधिक बाइलाइन रिपोर्ट पब्लिश कर चुकी हैं। उन्हें ब्लॉगिंग, वेब स्टोरीज और ट्रेंडिंग एजुकेशनल टॉपिक्स पर काम करने का खास शौक है। उनका मानना है कि – "शिक्षा सिर्फ करियर का माध्यम नहीं, बल्कि सोच और समाज दोनों को बदलने की शक्ति रखती है।"

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