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Explained: कौन सा कोर्स करने नेपाल जाते हैं भारतीय छात्र, जानें पड़ोसी देश में कैसा है शिक्षा व्यवस्था का हाल

Nepal Gen Z Protest: नेपाल में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर प्रतिबंध को लेकर शुरू हुआ विरोध हिंसक रूप ले गया। युवाओं ने सोशल मीडिया बैन के अलावा देश में बढ़ती बेरोजगारी और भ्रष्टाचार के खिलाफ प्रदर्शन किया। हालात को देखते हुए भारत भी स्थिति पर कड़ी नजर रखे हुए है। नेपाल में बड़ी संख्या में भारतीय छात्र भी रहते हैं। आइये जानते हैं कि भारतीय छात्र कौन सी डिग्री लेने नेपाल जाते हैं और वहां का एजुकेशन सिस्टम कैसा है।

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कौन सा कोर्स करने नेपाल जाते हैं भारतीय छात्र (Image - TNN)

Nepal Gen Z Protest: नेपाल में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर प्रतिबंध को लेकर शुरू हुआ विरोध हिंसक रूप ले गया। युवाओं ने सोशल मीडिया बैन के अलावा देश में बढ़ती बेरोजगारी और भ्रष्टाचार के खिलाफ प्रदर्शन किया। हालात को देखते हुए भारत भी स्थिति पर कड़ी नजर रखे हुए है। नेपाल में बिगड़े हालातों को देखते हुए भारत सरकार ने देश में रह रहे अपने नागरिकों और छात्रों के लिए एडवाइजरी जारी की है और उन्हें सावधानी बरतने को कहा गया है। नेपाल में मौजूद भारतीय दूतावास ने विदेश मंत्रालय की एडवाइजरी एक्स (X) पर पोस्ट की है। इसमें कहा गया, 'हम कल से नेपाल में हो रहे घटनाक्रम पर बारीकी से नजर रख रहे हैं। भारतीय नागरिकों को सलाह दी जाती है कि वे सावधानी बरतें और नेपाली अधिकारियों द्वारा जारी किए गए निर्देशों और दिशानिर्देशों का पालन करें।' नेपाल में बड़ी संख्या में भारतीय छात्र भी रहते हैं जोकि पढ़ाई करने वहां पहुंचे हैं। आइये जानते हैं कि भारतीय छात्र कौन सी डिग्री लेने नेपाल जाते हैं और वहां का एजुकेशन सिस्टम कैसा है।

नेपाल में कितने भारतीय छात्र हैं

भारत सरकार के आंकड़ों के अनुसार, नेपाल में इस समय 2100 से अधिक भारतीय छात्र पढ़ाई कर रहे हैं। जानकारी के मुताबिक, हालिया प्रदर्शनों में किसी भी भारतीय छात्र के घायल या हताहत होने की कोई खबर सामने नहीं आई है। 2.97 करोड़ की जनसंख्या वाले भारत के इस पड़ोसी देश में ऐसी कौन सी पढ़ाई है जिसे करने इतनी अधिक संख्या में भारतीय छात्र पहुंच गए। मीडिया रिपोर्ट की मानें तो, नेपाल में भारतीय छात्र मुख्य रूप से प्रोफेशनल कोर्सेज के लिए जाते हैं। इसका कारण है कि नेपाल में कई कोर्स में भारतीय छात्रों के लिए अपेक्षाकृत आसान प्रवेश प्रक्रिया है और खर्च भारत के मुकाबले कम है।

नेपाल में भारतीयों के लिए कौन सा कोर्स है फेवरेट

भारत से नेपाल जाने वाने अधिकांश छात्र मेडिकल कोर्सेज के लिए जाते हैं। काठमांडू का इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिसिन, बीपी कोइराला इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ साइंसेज, काठमांडू मेडिकल कॉलेज और मणिपाल कॉलेज ऑफ मेडिकल साइंसेज भारतीय छात्रों के बीच एमबीबीएस के लिए सबसे लोकप्रिय संस्थान माने जाते हैं। भारतीय छात्रों को यहां एमबीबीएस की पढ़ाई भारत से अपेक्षाकृत कम खर्च पर और MCI/NMC मान्यता प्राप्त कोर्सेज में करने का मौका मिलता है।

Top Medical College in Nepal: नेपाल के प्रमुख मेडिकल कॉलेज

  • इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिसिन (IOM), त्रिभुवन यूनिवर्सिटी – काठमांडू
  • बी.पी. कोइराला इंस्टिट्यूट ऑफ हेल्थ साइंसेज (BPKIHS) – धरान
  • काठमांडू मेडिकल कॉलेज (KMC) – काठमांडू
  • मणिपाल कॉलेज ऑफ मेडिकल साइंसेज (MCOMS) – पोखरा
  • नेशनल मेडिकल कॉलेज – बिरगंज
  • नेपाल मेडिकल कॉलेज – काठमांडू
  • गंडकी मेडिकल कॉलेज – पोखरा
  • देवदह मेडिकल कॉलेज – रूपनदेही (भैरहवा के पास)
  • जनकपुर मेडिकल कॉलेज – जनकपुर
  • नोबल मेडिकल कॉलेज – बिराटनगर
नेपाल में हिंसा की तस्वीर (Photo: AP)

नेपाल में हिंसा की तस्वीर (Photo: AP)

नेपाल में ये कोर्स भी हैं काफी पॉपुलर

कुछ भारतीय छात्र नेपाल में इंजीनियरिंग, बिज़नेस मैनेजमेंट और आईटी से जुड़े कोर्स भी करते हैं। नेपाल के टॉप इंजीनियरिंग कॉलेजों में काठमांडू विश्वविद्यालय, त्रिभुवन विश्वविद्यालय, और नेपाल इंजीनियरिंग कॉलेज शामिल हैं। भारत की तुलना में नेपाल में इंजीनियरिंग की पढ़ाई की फीस किफायती है, जिससे भारतीय छात्रों के लिए यह एक आकर्षक विकल्प बनता जा रहा है। नेपाल की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक धरोहरों को देखते हुए कुछ छात्र बौद्ध अध्ययन, योग, आयुर्वेद और संस्कृत से जुड़े कोर्स भी करते हैं।

Best Engineering College in Nepal: नेपाल के टॉप इंजीनियरिंग कॉलेज

  • त्रिभुवन यूनिवर्सिटी पुलचौक कैंपस (Pulchowk Campus), ललितपुर
  • त्रिभुवन यूनिवर्सिटी थापाथली कैंपस (Thapathali Campus), काठमांडू
  • काठमांडू यूनिवर्सिटी, स्कूल ऑफ इंजीनियरिंग (Dhulikhel)
  • हिमालयन कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग (HCOE), ललितपुर
  • एडवांस्ड कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग एंड मैनेजमेंट (ACEM), काठमांडू
  • नेपाल इंजीनियरिंग कॉलेज (NEC), भक्तपुर
  • पोखरा इंजीनियरिंग कॉलेज, पोखरा
  • नेशनल कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग (NCE), काठमांडू
  • एवरेस्ट इंजीनियरिंग कॉलेज, ललितपुर
नेपाल में आगजनी और हिंसा (Photo: AP)

नेपाल में आगजनी और हिंसा (Photo: AP)

नेपाल में हिंसा का छात्रों पर प्रभाव

नेपाल में हुई हिंसा का छात्रों और उनकी शिक्षा पर असर पड़ेगा। ऐसे हालात में सबसे ज्यादा नुकसान शिक्षा और भविष्य की दिशा को होता है।

शैक्षिक गतिविधियों में बाधा– हिंसा और अशांति जैसी गतिविधियों के कारण स्कूल-कॉलेज लंबे समय तक बंद रहते हैं। इससे एजुकेशन कैलेंडर गड़बड़ा जाता है और परीक्षाएं भी टल जाती हैं। लगातार तनाव और डर की स्थिति में पढ़ाई पर ध्यान केंद्रित करना मुश्किल हो जाता है। छात्र असुरक्षा और चिंता से जूझते हैं।

करियर पर असर– शिक्षा में देरी होने से उच्च शिक्षा या नौकरियों के अवसर प्रभावित होते हैं। विदेश पढ़ाई या स्कॉलरशिप की तैयारी करने वाले छात्रों को समय पर आवेदन करने में कठिनाई आती है।

ड्रॉपआउट बढ़ जाता है– कई बार हिंसक माहौल में बच्चे पढ़ाई छोड़कर सुरक्षित स्थानों पर चले जाते हैं या परिवार उन्हें पढ़ाई से रोक देते हैं। विदेशी छात्रों का भविष्य अधर में लटक जाता है क्योंकि उनके देश उन्हें वापस बुला लेते हैं। यूक्रेन युद्ध के समय फंसे भारतीय छात्रों को वापस बुलाया गया।

संसाधनों की कमी– हिंसा और अशांति की वजह से पूरा नेपाल सुलग रहा है। प्रतिष्ठानों और इमारतों को आग के हवाले किया जा चुका है। ऐसी हिंसा की वजह से किताबें, इंटरनेट, परिवहन, लाइब्रेरी जैसी सुविधाएं प्रभावित होती हैं।

नेपाल में परीक्षाएं टली (Photo: AP)

नेपाल में परीक्षाएं टली (Photo: AP)

नेपाल का एजुकेशन सिस्टम

नेपाल का एजुकेशन सिस्टम भारत के एजुकेशन सिस्टम से काफी मिलता जुलता है या कहें कि काफी हद तक प्रभावित है। वहां प्रारंभिक शिक्षा (Pre-primary) 4 से 5 वर्ष की आयु में शुरू हो जाती है। वहीं 6 वर्ष की आयु में प्राथमिक (Grades 1–5) शिक्षा की पढ़ाई शुरू होती है। इसी तरह कक्षा 10 में SEE परीक्षा (Secondary Education Examination) होती है, जोकि भारत में बोर्ड परीक्षा की तरह ही है। हाईस्कूल के बाद उच्च माध्यमिक (Grades 11–12) परीक्षा है जिसे 10+2 कहा जाता है। भारत की तरह नेपाल में भी स्नातक (3 से 4 साल) और स्नातकोत्तर ( 2 साल) का पाठ्यक्रम है। खासबात यह है कि भारत की तरह नेपाल में भी शिक्षा संस्कृति, धर्म और मूल्यों से जुड़ी है। संस्कृत, योग, बौद्ध अध्ययन जैसे विषय दोनों ही देशों में पढ़ाए जाते हैं।

Kuldeep Raghav
कुलदीप राघवauthor

कुलदीप राघव प्रिंट और डिजिटल पत्रकारिता में 13 वर्षों से अधिक अनुभव का रखने वाले पत्रकार हैं। टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में वह एजुकेशन सेक्शन को लीड कर रहे हैं। एजुकेशन सेक्टर की गहरी समझ और लगातार फील्ड-ओरिएंटेड रिपोर्टिंग के कारण कुलदीप इस बीट के भरोसेमंद पत्रकारों में गिने जाते हैं। वे स्कूल और उच्च शिक्षा, प्रतियोगी परीक्षाएं, एडमिशन और काउंसलिंग प्रोसेस, स्कॉलरशिप, करियर गाइडेंस, जॉब अलर्ट, स्किल डेवलपमेंट और युवाओं से जुड़े सामाजिक-शैक्षणिक मुद्दों पर तथ्यात्मक और आसान भाषा में खबरें पब्लिश करते हैं। कुलदीप ने अब तक 18,000 से अधिक बाइलाइन स्टोरीज लिखी हैं, जिनमें कई एक्सक्लूसिव रिपोर्ट्स, विश्लेषण, डेटा आधारित रिपोर्ट्स और एक्सप्लेनर शामिल हैं।

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