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"खुश रहने की डिग्री": DU का ‘साइंस ऑफ हैप्पीनेस’ कोर्स बना यूथ की पसंद

पढ़ाई, असाइनमेंट, प्लेसमेंट का प्रेशर... आज के स्टूडेंट्स के सिर पर टेंशन का बोझ बहुत ज्यादा है। इसी एंग्जायटी और बर्नआउट के बीच दिल्ली यूनिवर्सिटी ने छात्रों के लिए एक अलग ही क्लास शुरू की है।

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Science of Happiness

पढ़ाई, असाइनमेंट, प्लेसमेंट का प्रेशर... आज के स्टूडेंट्स के सिर पर टेंशन का बोझ बहुत ज्यादा है। इसी एंग्जायटी और बर्नआउट के बीच दिल्ली यूनिवर्सिटी ने छात्रों के लिए एक अलग ही क्लास शुरू की है। नाम है ‘साइंस ऑफ हैप्पीनेस’ - यानी खुश रहने का विज्ञान। यहां कमाल की बात ये है कि ये कोर्स हिट हो गया है। पिछले 2 साल में 2000+ स्टूडेंट्स रजिस्ट्रेशन करा चुके हैं। इससे साफ है कि आज की पीढ़ी को सिर्फ CGPA नहीं, मेंटल पीस भी चाहिए।

ये DU के VAC यानी वैल्यू एडेड कोर्स का हिस्सा है। इसे ‘हैप्पीनेस पोडियम’ पहल के तहत चलाया जा रहा है। टारगेट सिर्फ नंबर लाना नहीं है। टारगेट है सिखाना कि - तनाव आए तो क्या करें? नेगेटिविटी से कैसे बचें? पढ़ाई और पर्सनल लाइफ में बैलेंस कैसे बनाएं?

कोर्स में सिखाते क्या हैं? 5 बड़े पिलर्स

बिना रट्टे, बिना थ्योरी के ये कोर्स 5 बातों पर फोकस करता है:

पॉजिटिव नजरिया

प्रॉब्लम में भी अच्छी चीज ढूंढना सीखो। खुद को नेगेटिविटी में मत डूबाओ।

खुद को समझो

अपनी ताकत और कमजोरी जानो। फैमिली और दोस्तों से दिल से जुड़ो।

रिश्ते मजबूत करो

भरोसा, इज्जत और खुलकर बात करने से रिलेशन कैसे बेहतर बनें।

लाइफ का मकसद

बस दिन मत काटो। अपने बड़े गोल तय करो और उन्हें दिशा दो।

छोटी जीत

सेलिब्रेट करोबड़ी सफलता का इंतजार मत करो। रोज की छोटी अचीवमेंट पर खुश होना सीखो।

कहां-कहां शुरू हुआ?

शुरुआत DU के 5 टॉप महिला कॉलेजों से हुई है:

LSR, गार्गी, IP कॉलेज, मिरांडा हाउस और दौलत राम कॉलेज

क्लास कैसी होती है? बोरिंग लेक्चर नहीं। यहां मेडिटेशन, माइंडफुलनेस, ग्रुप एक्टिविटी, खुली बातचीत से प्रैक्टिकल तरीके सिखाए जाते हैं।

ये कोर्स सिर्फ "फील गुड" नहीं, 3 वजह से जरूरी है

1. टॉक्सिक पॉजिटिविटी का तोड़

इंस्टा पर सब परफेक्ट दिखाते हैं। इस प्रेशर से डिप्रेशन होता है। ये कोर्स सिखाता है कि उदास होना, गुस्सा आना नॉर्मल है। भावनाओं को दबाओ मत, उन्हें समझो और आगे बढ़ो।

2. कॉर्पोरेट की नई डिमांड - EQ

आज कंपनियां सिर्फ मार्क्स नहीं देखतीं। वो देखती हैं प्रेशर में आप कैसे रिएक्ट करते हो। इसे कहते हैं इमोशनल इंटेलिजेंस। ये कोर्स स्टूडेंट्स को फ्यूचर ऑफिस लाइफ के लिए तैयार कर रहा है।

3. मेंटल हेल्थ का टैबू तोड़ रहा

हमारे यहां थेरेपी-काउंसलिंग पर बात करना आज भी अजीब लगता है। जब यूनिवर्सिटी खुद इसे पढ़ाएगी तो शर्म खत्म होगी। स्टूडेंट्स खुलकर मदद मांग पाएंगे।

अब PG और PhD तक जाएगा

UG में मिली सफलता के बाद DU अब इसे PG और PhD लेवल पर भी लाने की सोच रहा है। प्लान है इसे एक फुल टाइम सब्जेक्ट या डिप्लोमा बनाने का।अगर ऐसा हुआ तो रिसर्च करने वाले स्टूडेंट्स को मेंटल हेल्थ और लाइफस्टाइल पर गहराई से काम करने और इसी में करियर बनाने का मौका मिलेगा।

सीधी बात: डिग्री के साथ-साथ अब यूनिवर्सिटी "जीना" भी सिखा रही है। और शायद यही आज के टाइम की सबसे बड़ी जरूरत है।

Neelaksh Singh
नीलाक्ष सिंहauthor

नीलाक्ष सिंह 2021 से टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल से जुड़े हैं और एजुकेशन सेक्शन के लिए कंटेंट लिखते हैं। लखनऊ विश्वविद्यालय से मास कम्युनिकेशन की पढ़ाई के दौरान ही उन्होंने प्रिंट मीडिया में इंटर्नशिप की, जहां फील्ड रिपोर्टिंग, स्टूडेंट-इश्यू बेस्ड ग्राउंड स्टोरीज और सटीक न्यूजराइटिंग की बुनियादी समझ हासिल की। प्रिंट के बाद डिजिटल मीडिया में भी वह एजुकेशन बीट पर ही लगातार काम करते रहे हैं। पत्रकारिता में 10 सालों से सक्रिय नीलाक्ष सिंह 12 हजार से अधिक खबरें लिख चुके हैं। वह एग्जाम अपडेट्स, एडमिशन प्रोसेस, करियर गाइडेंस, स्टूडेंट वेलफेयर, बोर्ड रिजल्ट्स और नीतिगत बदलावों पर गहन और बेहद उपयोगी कंटेंट तैयार करते हैं।

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