Reforms to cut coaching dependence: देश में तेजी से बढ़ते कोचिंग कल्चर और छात्रों पर पड़ते मानसिक दबाव को देखते हुए केंद्र सरकार अब स्कूल शिक्षा की जड़ों में बड़ा बदलाव करने की तैयारी में है। छात्रों की कोचिंग पर निर्भरता कम करने के मकसद से बनाई गई एक उच्चस्तरीय समिति ने ऐसे सुधारों का खाका पेश किया है, जो लागू हुए तो आने वाले वर्षों में JEE, NEET और CUET जैसी परीक्षाओं की तैयारी का पूरा ढांचा बदल सकता है।
समिति का क्या कहना है ?
स्कूल पढ़ाई ही इतनी मजबूत हो कि बच्चों को कोचिंग की जरूरत ही न पड़े। स्कूल तैयारी का केंद्र बनेंगे और कोचिंग पर लगाम भी लग सकती है। प्रस्तावों के मुताबिक, कोचिंग क्लासेज को रोजाना अधिकतम 2 से 3 घंटे तक सीमित करने पर विचार किया जा रहा है। समिति का मानना है कि घंटों चलने वाली कोचिंग न सिर्फ छात्रों को थका देती है, बल्कि उनकी सीखने की स्वाभाविक क्षमता पर भी असर डालती है।
इसके साथ ही NCERT और CBSE के सिलेबस को JEE, NEET और CUET के अनुरूप बनाने की दिशा में काम होगा, ताकि स्कूल और प्रतियोगी परीक्षाओं के बीच की खाई खत्म हो सके।
क्लास 11 से ही एंट्रेंस एग्जाम? दबाव घटाने की नई सोच
- समिति की सबसे बड़ी और चौंकाने वाली सिफारिश यह है कि प्रतियोगी परीक्षाएं कक्षा 11 से ही आयोजित की जा सकती हैं, और वह भी साल में एक से ज्यादा बार।
- इससे छात्रों पर क्लास 12 में “सब कुछ एक ही परीक्षा में” वाला दबाव कम होगा और उन्हें बार-बार खुद को परखने का मौका मिलेगा।
- बोर्ड परीक्षा को मिलेगा सम्मान, सिर्फ MCQ से तय नहीं होगा भविष्य ।
- अब तक एंट्रेंस एग्जाम ही भविष्य की चाबी माने जाते रहे हैं, लेकिन समिति इस सोच को बदलना चाहती है।
- कॉलेज एडमिशन में बोर्ड परीक्षा के अंकों को ज्यादा वेटेज देने और बोर्ड + एप्टीट्यूड टेस्ट के संयुक्त (हाइब्रिड) मॉडल पर काम करने का प्रस्ताव है।
- इससे न सिर्फ बोर्ड परीक्षा की अहमियत बढ़ेगी, बल्कि कक्षा में नियमित पढ़ाई का स्तर भी सुधरेगा।
डमी स्कूल और मेंटल स्ट्रेस पर सख्त नजर
- रिपोर्ट में साफ कहा गया है कि स्कूल-सिलेबस और एंट्रेंस पैटर्न के अंतर ने डमी स्कूलों को बढ़ावा दिया है।
- बच्चे स्कूल की बजाय कोचिंग में ज्यादा समय देने लगे हैं, जिसका सीधा असर उनके मानसिक स्वास्थ्य पर पड़ रहा है।
- समिति का मानना है कि कम उम्र में ही कोचिंग शुरू होना बच्चों में डर, तनाव और असफलता का भय पैदा करता है।
प्रस्तावों के तहत स्कूलों में ही रेमेडियल क्लास, मेंटरिंग सिस्टम, नियमित टेस्ट और एनालिसिस, शिक्षक प्रशिक्षण जैसी सुविधाएं विकसित की जाएंगी, ताकि छात्रों को बाहर जाने की मजबूरी न रहे।
कक्षा 8 से करियर काउंसलिंग अनिवार्य
एक और अहम सुझाव है कि कक्षा 8 से ही करियर गाइडेंस शुरू की जाए। इसके लिए एक राष्ट्रीय करियर गाइडेंस पोर्टल बनाने और माता-पिता को भी काउंसलिंग प्रक्रिया में शामिल करने की योजना है।
कोचिंग संस्थानों पर कसेगा शिकंजा
समिति ने कोचिंग संस्थानों के भ्रामक विज्ञापनों और झूठे दावों पर भी सख्ती की सिफारिश की है। अब कोचिंग सेंटरों को वास्तविक रिजल्ट, शिक्षकों की योग्यता, पढ़ाने का तरीका, सब कुछ पारदर्शी तरीके से बताना होगा। ये समिति शिक्षा मंत्रालय ने 17 जून 2025 को गठित की थी और इसकी अध्यक्षता उच्च शिक्षा विभाग के सचिव विनीत जोशी कर रहे हैं। समिति में CBSE, NTA, IIT और NIT से जुड़े वरिष्ठ अधिकारी और शिक्षा विशेषज्ञ शामिल हैं।
सरकार अब शिक्षा का चेहरा बदलने की तैयारी में है। अगर ये सिफारिशें लागू होती हैं, तो कोचिंग का दबदबा घटेगा, स्कूल शिक्षा मजबूत होगी और साथ ही छात्रों पर मानसिक दबाव कम होगाऔर तैयारी की दौड़ ज्यादा संतुलित बनेगी।
