CBSE OSM Controversy: मोदी सरकार ने CBSE के चेयरमैन (राहुल सिंह) और सेक्रेटरी (हिमांशु गुप्ता) को उनके पद से हटाकर सेंट्रल बोर्ड ऑफ सेकेंडरी एजुकेशन (CBSE) पर सख्ती दिखाई है। यह फैसला CBSE के ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) सिस्टम पर बढ़ती जांच-पड़ताल के बीच आया है। कैबिनेट सेक्रेटेरिएट ने आज 2 जून को CBSE के ऑन-स्क्रीन मार्किंग सिस्टम (OSM) के लिए सेवाओं की खरीद की जांच के लिए एक-सदस्यीय समिति बनाई है। समिति से कहा गया है कि वह एक महीने के अंदर अपनी रिपोर्ट डिपार्टमेंट ऑफ पर्सनल एंड ट्रेनिंग (DoPT) को सौंपे। इस समिति की अध्यक्षता कैपेसिटी बिल्डिंग कमीशन की चेयरपर्सन एस. राधा चौहान करेंगी।
आधिकारिक पत्र के अनुसार, पैनल को जरूरत पड़ने पर दूसरे विभागों के अधिकारियों से मदद लेने की अनुमति दी गई है। कैपेसिटी बिल्डिंग कमीशन समिति को सेक्रेटेरियल सहायता देगा।
हिमांशु गुप्ता के बारे में
हिमांशु गुप्ता (IAS, AGMUT कैडर 2012) बैच के अधिकारी हैं, 2 जून के दिन तक CBSE में सचिव के पद पर थे। उन्हें समय से पहले CBSE से वापस उनके मूल कैडर यानी गृह मंत्रालय (MHA) भेजा जा रहा है। यह तबादला प्रशासनिक आधार पर किया गया है।
राहुल सिंह के बारे में
IAS राहुल सिंह 1996 बैच के बिहार कैडर के अधिकारी हैं और करीब तीन दशक से प्रशासनिक सेवा में हैं। राहुल सिंह बिहार के वैशाली जिले से हैं। कंप्यूटर साइंस में बीटेक करने के बाद पब्लिक पॉलिसी एंड मैनेजमेंट में उच्च शिक्षा हासिल की। सिंह को 13 मार्च, 2024 को CBSE का अध्यक्ष नियुक्त किया गया था; उन्होंने निधि छिब्बर का स्थान लिया था।

CBSE
आधिकारिक पत्र में कहा गया है:
CBSE द्वारा ऑन-स्क्रीन मार्किंग सिस्टम के लिए सेवाओं की खरीद से जुड़े मामलों की जांच के लिए एक-सदस्यीय समिति का गठन इस प्रकार किया गया है:-
(i) समिति की अध्यक्षता सुश्री एस. राधा चौहान, चेयरपर्सन, कैपेसिटी बिल्डिंग कमीशन करेंगी।
(ii) समिति की चेयरपर्सन को जरूरत के हिसाब से दूसरे कार्यालयों के अधिकारियों से मदद लेने का अधिकार है।
(iii) समिति को सेक्रेटेरियल सहायता कैपेसिटी बिल्डिंग कमीशन द्वारा दी जाएगी।
CBSE सुर्खियों में क्यों?
CBSE की 10वीं और 12वीं कक्षा के नतीजे घोषित होने के बाद, जब छात्रों ने अपनी स्कैन की हुई कॉपियों (Answer Books) को देखने में आ रही दिक्कतों की शिकायत की, तब यह विवाद शुरू हुआ। कई छात्रों ने दावा किया कि उन्हें धुंधले पेज, गायब हिस्से और बोर्ड की ऑनलाइन सेवाओं का इस्तेमाल करने में परेशानिया पेश आईं।
हालात तब और बिगड़ गए, जब OSM प्लेटफॉर्म और उस टेंडर प्रक्रिया पर सवाल उठाए गए, जिसके जरिए डिजिटल मूल्यांकन का ठेका दिया गया था। वेंडर चुनने की प्रक्रिया, साइबर सुरक्षा से जुड़ी चिंताओं और पुनर्मूल्यांकन सेवाओं में हो रही देरी को लेकर हुई चर्चाओं ने लोगों का ध्यान और भी ज्यादा अपनी ओर खींचा।
बाद में, CBSE ने समय-सीमा को आगे बढ़ाया, कई स्पष्टीकरण जारी किए और कहा कि छात्रों द्वारा उठाई गई हर जायज़ चिंता की समीक्षा निर्धारित प्रक्रिया के तहत की जाएगी।
