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BPSC Success Story: 9 साल की शादी और 2 बच्चों की मां; हरियाणा की बहू रेनू कादियान बिहार में बनीं अफसर

BPSC Success Story: कहते हैं सफलता उम्र की मोहताज नहीं होती है। यह सच साबित कर दिखाया है हरियाणा की बहू रेनी कादियान ने, जिन्होंने बीपीएससी 70वीं संयुक्त प्रतियोगी परीक्षा पास कर टैक्स असिस्टेंट कमिश्नर पद हासिल किया। अब उनका लक्ष्य SDM बनने का है।

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हरियाणा की बहू रेनू कादियान बिहार में बनीं अफसर (Photo - AI)

BPSC Success Story: सफलता उम्र, शादी या जिम्मेदारियों की मोहताज नहीं होती है। इस बात को सच कर दिखाया है हरियाणा की बहू रेनू कादियान (Renu Kadian) ने, जिन्होंने बिहार की सबसे प्रतिष्ठित परीक्षाओं में से एक BPSC 70वीं संयुक्त प्रतियोगी परीक्षा 2026 में 349वीं रैंक हासिल कर बड़ा मुकाम पाया है। उनकी इस कामयाबी पर मायके और ससुराल में जश्न का माहौल बना हुआ है। उन्होंने न केवल अपने परिवार का बल्कि पुरे गांव का नाम रोशन किया है।

उनकी इस सफलता पर उनकी सास सबसे अधिक खुश नजर आई। ढोल-नगाड़ों पर नाच रही सास ने अपनी बहू को बहू नहीं बेटी माना था और बहू ने भी सास को मां का दर्जा दिया था। उनकी यह खुशी ही बताती है कि उन्होंने अपनी बहू को कितना सपोर्ट किया है। ससुराल से मिले इस सपोर्ट से उन्होंने आज कामयाबी हासिल की है।

ससुराल में घूंघट नहीं, सपनों को मिली उड़ान

रेनू मूल रूप से हरियाणा के पानीपत जिले के सिवाह गांव की बहू हैं। उनकी शादी को 9 साल से ज्यादा का समय हो चुका है और वे दो बच्चों की मां भी हैं। आमतौर पर समाज में यह धारणा बनी रहती है कि शादी और बच्चों के बाद महिलाओं का करियर खत्म हो जाता है या उन्हें घूंघट और चारदीवारी के बीच ही रहना पड़ता है। लेकिन रेनू ने इन तमाम रूढ़ियों को पीछे छोड़ते हुए ससुराल के सपोर्ट और अपनी मेहनत के दम पर बिहार लोक सेवा आयोग की परीक्षा में परचम लहराया।

ढोल पर नाची सास

रेनू की इस कामयाबी पर उनके ससुराल में जश्न का माहौल है। रिजल्ट के जारी होते ही उनकी सास ने ढोल की थाप पर जमकर नाचा और अपनी खुशी का इजहार किया। गर्व के इस अवसर पर भावुक होते हुए सास ने कहा कि मेरी बेटी ने पूरे गांव और परिवार का नाम रोशन किया है। ये मेरी बेटी है, मैंने इसे कभी बहू नहीं समझा। वहीं रेनू ने भी अपनी सास के प्रति आदर व्यक्त करते हुए कहा कि वह उनके लिए मां जैसी ही हैं। रेनू ने माना कि इस लंबे और कठिन सफर में ससुराल से मिला मजबूत सपोर्ट सिस्टम उनके लिए बेहद कारगर साबित हुआ।

पिता का सपना किया पूरा

रेनू ने मीडिया को दिए एक इंटरव्यू में बताया कि उनके पिता का सपना था कि उनकी बेटी पढ़-लिखकर एक बड़ी सरकारी अफसर बने। आज रेनू ने अपनी मेहनत की बदौलत पिता के उस सपने को सच तो कर दिखाया है, लेकिन इस पल को देखने के लिए उनके पिता अब जीवित नहीं है। हाल ही में उनका निधन हो गया था। इस अवसर पर वह खुशी के साथ भावुक भी हैं।

टीचर से टैक्स असिस्टेंट कमिश्नर बनने का सफर

बता दें कि रेनू शुरू से शिक्षा से जुड़ी थी। वह हरियाणा के एक सरकारी स्कूल में पिछले 8 से 9 साल से पढ़ा रही थी। लेकिन वह यहीं नहीं रुकी। उन्होंने एक अधिकारी बनने का संघर्ष जारी रखा और बीपीएससी परीक्षा पास कर टैक्स असिस्टेंट कमिश्नर बनी। बता दें कि उन्होंने टीचर और परिवार की जिम्मेदारी संभालते हुए कुछ साल पहले ही सिविल सेवा की तैयारी शुरू की थी। उन्होंने इस दौरान यूपीएससी, एसएससी जैसी बड़ी परीक्षाएं भी दी थी। लेकिन उन्होंने सफलता नहीं मिली। रेनू ने हार न मानते हुए तैयारी जारी रखी और उनकी यह मेहनत बीपीएससी परीक्षा में रंग लाई।

क्या है रेनू का अगला लक्ष्य

टैक्स असिस्टेंट कमिश्नर जैसी क्लास-1 पोस्ट मिलने के बाद भी रेनू रुकना नहीं चाहती हैं। उन्होंने बताया कि उनका असली लक्ष्य SDM बनने का है। वह यह पद पाकर बेहद खुश हैं, लेकिन उन्होंने यह भी कहा की प्रशासनिक सेवा के सर्वोच्च पद पर पहुंचने की तैयारी जारी रहेगी।

Varsha Kushwaha
वर्षा कुशवाहा author

वर्षा कुशवाहा टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल की एजुकेशन डेस्क पर बतौर कॉपी एडिटर कार्यरत हैं और पिछले 5 वर्षों से मीडिया में सक्रिय हैं। जर्नलिज़्म में पोस्... और देखें

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