Allahabad High Court makes TET mandatory for UP TGT and LT grade recruitment: उत्तर प्रदेश में शिक्षक भर्ती को लेकर बड़ा बदलाव सामने आया है। अब नई टीजीटी (Trained Graduate Teacher) भर्ती में टीईटी (Teacher Eligibility Test) को अनिवार्य किए जाने का रास्ता साफ हो गया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि उत्तर प्रदेश अधीनस्थ शैक्षिक (प्रशिक्षित स्नातक श्रेणी) सेवा नियमावली-1983 के नियम आठ में उल्लेखित योग्यताओं के साथ अब टीईटी पास होना भी जरूरी होगा। हाईकोर्ट ने अपने आदेश में यह भी कहा कि भर्ती से जुड़े विज्ञापनों में स्पष्ट रूप से यह उल्लेख होना चाहिए कि चयनित शिक्षक किन कक्षाओं को पढ़ाएंगे। अदालत ने भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता और स्पष्टता पर जोर देते हुए कहा कि अधूरी जानकारी देने से अभ्यर्थियों में भ्रम की स्थिति पैदा होती है। इलाहाबाद हाईकोर्ट के हालिया फैसले के बाद यह स्पष्ट हो गया है कि बिना टीईटी पास किए उम्मीदवारों को शिक्षक भर्ती प्रक्रिया में शामिल नहीं किया जा सकेगा।
जस्टिस अरिंदम सिन्हा व जस्टिस प्रशांत कुमार की खंडपीठ ने जयहिंद यादव व अन्य की याचिका पर यह आदेश दिया। कोर्ट में दाखिल याचिकाओं में यह सवाल उठाया गया था कि टीजीटी भर्ती में बिना टीईटी योग्य अभ्यर्थियों को आवेदन करने की अनुमति क्यों दी जा रही है। इस पर सुनवाई करते हुए अदालत ने साफ कहा कि शिक्षक भर्ती में न्यूनतम योग्यता के रूप में टीईटी अनिवार्य होना चाहिए। इस फैसले का सीधा असर आने वाली यूपी टीजीटी और एलटी ग्रेड शिक्षक भर्ती पर पड़ेगा। अब अभ्यर्थियों के लिए टीईटी पास करना जरूरी होगा, जिससे चयन प्रक्रिया अधिक मानकीकृत और गुणवत्तापूर्ण बनने की उम्मीद है। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे शिक्षा व्यवस्था में सुधार होगा और योग्य उम्मीदवारों को ही अवसर मिलेगा।
कुल मिलाकर, हाईकोर्ट के इस फैसले के बाद उत्तर प्रदेश में शिक्षक बनने की तैयारी कर रहे अभ्यर्थियों के लिए टीईटी पास करना अब और भी जरूरी हो गया है। आने वाले समय में भर्ती प्रक्रिया अधिक पारदर्शी, नियमबद्ध और प्रतिस्पर्धी होने की संभावना है। गौरतलब है कि इससे पहले भी विभिन्न स्तरों पर टीईटी को शिक्षक भर्ती के लिए अनिवार्य बनाने पर जोर दिया जाता रहा है। यहां तक कि सुप्रीम कोर्ट भी यह स्पष्ट कर चुका है कि टीईटी शिक्षक बनने के लिए न्यूनतम पात्रता है और इसमें किसी प्रकार की छूट नहीं दी जा सकती। कोर्ट ने माना, विज्ञापन में कक्षाओं के बारे में जानकारी न देना चूक है। कोर्ट ने निर्देश दिया कि आयोग शुद्धि पत्र जारी करे, जिसमें स्पष्ट अंकित हो कि विज्ञापन केवल कक्षा 9 और 10 के लिए है।
