सीबीएसई (CBSE) कक्षा 12वीं के उन छात्रों की परेशानियां बढ़ती जा रही हैं, जिनके सत्यापन (Verification), उत्तर पुस्तिका की फोटोकॉपी (Photocopy) और पुनर्मूल्यांकन (Revaluation) के परिणाम अभी तक घोषित नहीं हुए हैं। इस मुद्दे को लेकर सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता विनीत जिंदल ने सीबीएसई अध्यक्ष को एक औपचारिक प्रतिनिधित्व भेजकर लंबित परिणामों को तत्काल जारी करने की मांग की है। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में देशभर के विश्वविद्यालयों, इंजीनियरिंग कॉलेजों, फार्मेसी संस्थानों, लॉ कॉलेजों और अन्य उच्च शिक्षण संस्थानों में प्रवेश प्रक्रिया जारी है। कई संस्थानों ने काउंसलिंग, सीट आवंटन और दस्तावेज सत्यापन के लिए समय-सीमा तय कर रखी है। ऐसे में जिन छात्रों के पुनर्मूल्यांकन के परिणाम लंबित हैं, वे अपने अंतिम अंकों और मेरिट स्थिति को लेकर असमंजस में हैं।
विनीत जिंदल ने कहा कि पिछले कुछ दिनों में उन्हें देशभर के छात्रों और अभिभावकों से बड़ी संख्या में ई-मेल, फोन कॉल और लिखित शिकायतें प्राप्त हुई हैं। इन शिकायतों में छात्रों ने बताया है कि उन्होंने सीबीएसई की निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार अंकों के सत्यापन, उत्तर पुस्तिका की प्रति प्राप्त करने और पुनर्मूल्यांकन के लिए आवेदन किया था, लेकिन काफी समय बीत जाने के बावजूद उनके परिणाम अभी तक घोषित नहीं किए गए हैं।
प्रतिनिधित्व में यह भी उल्लेख किया गया है कि कई छात्रों को प्रवेश, छात्रवृत्ति और अन्य शैक्षणिक अवसरों से वंचित होने का खतरा पैदा हो गया है। कुछ छात्रों को विभिन्न संस्थानों में अस्थायी रूप से प्रवेश का अवसर मिला है, लेकिन संशोधित परिणाम समय पर घोषित न होने के कारण उनके प्रवेश पर संकट मंडरा रहा है। यदि जल्द परिणाम जारी नहीं किए गए तो कई छात्रों का एक पूरा शैक्षणिक वर्ष प्रभावित हो सकता है।
उन्होंने कहा कि प्रशासनिक देरी का खामियाजा छात्रों को नहीं भुगतना चाहिए। छात्रों के भविष्य और करियर से जुड़े इस गंभीर मामले में सीबीएसई को तत्काल कार्रवाई कर उनकी शैक्षणिक संभावनाओं की रक्षा करनी चाहिए। विनीत जिंदल ने सीबीएसई से मांग की है कि सभी लंबित सत्यापन, फोटोकॉपी और पुनर्मूल्यांकन परिणामों को तुरंत घोषित किया जाए। साथ ही बोर्ड लंबित आवेदनों के निस्तारण की स्पष्ट समय-सीमा सार्वजनिक करे और विश्वविद्यालयों व कॉलेजों को आवश्यक सलाह जारी कर प्रभावित छात्रों के हितों की रक्षा सुनिश्चित करे।
