दिल्ली में प्रदूषण बढ़ा (ANI)
Delhi Air Pollution: बढ़ते प्रदूषण के कारण दिल्ली एक बार फिर से गैस चैंबर जैसी बन गई है। आज सुबह कई इलाकों में एयर क्वालिटी गंभीर स्तर पर पहुंच गई। चांदनी चौक में एक्यूआई 430 पहुंच गया। इसके अलावा आनंद विहार, विवेक विहार, वजीरपुर, रोहिणी समेत कई इलाकों में सुबह के समय स्मॉग छाया रहा। कर्तव्य पथ पर लोग धुंध के बीच मॉर्निंग वॉक करते नजर आए। एनसीआर के शहर भी जहरीली हवा की गिरफ्त में है। बढ़ते प्रदूषण का असर लोगों की सेहत पर पड़ रहा है। पॉल्यूशन के कारण सिर्फ सांस व दमा के मरीजों को ही नहीं बल्कि स्वस्थ्य लोगों को भी आंखों में जलन, गले में खराश, लगातार खांसी जैसी समस्याएं हो रही हैं।
दिल्ली-एनसीआर में बुधवार की वायु गुणवत्ता पिछले दिनों की तुलना में और भी भयावह हो गई है। दिल्ली, नोएडा और गाजियाबाद के अनेक इलाकों में वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 400 से 430 के खतरनाक स्तर को पार करते हुए 450 के आसपास पहुंच गया है। दिल्ली में आज आनंद विहार में 402, चांदनी चौक में 430, विवेक विहार में 410 और वजीरपुर 402 एक्यूआई के साथ कई इलाके 'गंभीर' श्रेणी में पहुंच चुके हैं। आरके पुरम और रोहिणी में भी एक्यूआई 418 दर्ज किया गया है।
नोएडा और गाजियाबाद में भी पॉल्यूशन के कारण स्थिति बेहतर नहीं है। नोएडा में बुधवार को सुबह के समय सेक्टर-116 (406), सेक्टर-125 (405) और सेक्टर-1 (397) में हवा की गुणवत्ता 'बेहद खराब' से 'गंभीर' स्तर पर है। वहीं गाजियाबाद में भी इंदिरापुरम में 410, लोनी में 428 एक्यूआई बना हुआ है। इस भीषण प्रदूषण का स्वास्थ्य पर गहरा प्रभाव पड़ रहा है।
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विशेषज्ञों के अनुसार, इस स्तर की खराब वायु गुणवत्ता पर लंबे समय तक रहने से सांस की बीमारियों का खतरा काफी बढ़ जाता है। अस्पतालों के आपातकालीन विभागों और श्वास रोग विशेषज्ञों के क्लीनिकों में मरीजों की संख्या में अचानक वृद्धि देखी जा रही है। न केवल अस्थमा और सीओपीडी जैसी पुरानी बीमारियों के मरीजों में समस्या बढ़ रही है, बल्कि स्वस्थ लोग भी आंखों में जलन, गले में खराश, लगातार खांसी और सांस लेने में तकलीफ जैसी शिकायतें लेकर पहुंच रहे हैं। बच्चों और बुजुर्गों को इस स्थिति में विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी जा रही है।
वायु प्रदूषण बढ़ने के पीछे मौसम की प्रतिकूल परिस्थितियां, जैसे कम हवा की गति और ठंड का बढ़ना, प्रमुख कारण माने जा रहे हैं, जो प्रदूषकों को फैलने से रोक रही हैं। हालांकि, वाहनों और उद्योगों से निकलने वाला धुआं, निर्माण गतिविधियां, और पराली जलाने जैसे स्थानीय स्रोत भी इस समस्या में इजाफा कर रहे हैं। इस गंभीर स्थिति में स्वास्थ्य विशेषज्ञ लोगों से घर के अंदर रहने, बाहर निकलते समय मास्क पहनने, खूब पानी पीने और व्यायाम जैसी शारीरिक गतिविधियां बाहर करने से बचने की सलाह दे रहे हैं। स्कूलों में बच्चों की बाहरी गतिविधियों पर भी रोक लगाई जा सकती है।
(इनपुट - IANS)
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