दिल्ली सरकार अवैध बोरवेल और पानी की बर्बादी रोकने के लिए नई नीति अंतिम चरण में, जल बोर्ड ने NGT को दी जानकारी
- Curated by: Nishant Tiwari
- Updated Dec 7, 2025, 03:58 PM IST
दिल्ली सरकार ग्राउंडवॉटर की बर्बादी रोकने के लिए नई बोरवेल और ग्राउंडवॉटर एक्सट्रैक्शन पॉलिसी तैयार कर रही है। दिल्ली जल बोर्ड (DJB) ने NGT को हलफनामा देकर बताया कि नीति का ड्राफ्ट पर्यावरण विभाग को भेजा गया है। नई नीति लागू होने पर अवैध दोहन पर सख्त कार्रवाई संभव होने की उम्मीद है।
दिल्ली सरकार ग्राउंडवॉटर की बर्बादी रोकने के लिए ला रही है नई पॉलिसी (सांकेतिक चित्र)
Delhi News: दिल्ली सरकार ग्राउंडवॉटर (भूजल) की बर्बादी पर कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित करने के लिए बोरवेल और ग्राउंडवॉटर एक्सट्रैक्शन पॉलिसी को अंतिम रूप देने की तैयारी में है। हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक दिल्ली जल बोर्ड (DJB) ने नेशनल ग्रीन ट्राइब्यूनल (NGT) को हलफनामा दायर कर यह जानकारी दी है। बोर्ड ने बताया कि नीति का ड्राफ्ट काफी अच्छा है और इस पर पर्यावरण विभाग को सुझाव भेजे जा चुके हैं।
पहाड़गंज में 10 साल से जारी अवैध दोहन पर रिपोर्ट
DJB ने 1 दिसंबर को NGT को सौंपी गई ताजा स्थिति रिपोर्ट में कहा कि लगभग एक दशक से पहाड़गंज के गेस्टहाउसों के अनियंत्रित भूजल दोहन को लेकर दिए गए निर्देशों के जवाब के तौर पर यह जानकारी दी जा रही है। बोर्ड ने कहा कि उसके पास कानूनी तौर पर उल्लंघनकर्ताओं पर दंड लगाने का अधिकार नहीं है, लेकिन अब तक 6.36 करोड़ जल सेस और सीवरेज चार्ज के रूप में लिए गए हैं।
स्वैच्छिक घोषणा योजना कानूनी रूप से 'गायब'
हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, DJB ने यह भी स्पष्ट किया कि होटल और गेस्टहाउस जिन Voluntary Disclosure Scheme (VDS) का हवाला देकर भूजल निकालते रहे, वह कभी भी कानूनी रूप से मान्य नहीं थी। यह योजना केवल 2014 की एक पब्लिक नोटिस के जरिए अस्तित्व में लाई गई थी, न कि किसी आधिकारिक अधिसूचना के तहत। बोर्ड ने बताया कि 2013 में NGT ने सिर्फ इस तरह की एक व्यवस्था पर चर्चा की थी, जिसके बाद एक विज्ञापन जारी हुआ, लेकिन कानूनी ढांचा कभी नहीं बना। लगभग 11,000 रजिस्ट्रेशन आए थे, पर दिल्ली जल बोर्ड के पास न इन्हें स्वीकार करने, न दंड लगाने और न ही दोहन को नियंत्रित करने की शक्ति थी। रिपोर्ट में यह बात है कि, इसीलिए किसी भी पंजीकृत इकाई पर आधिकारिक रूप से कोई जुर्माना नहीं लगाया गया।
NGT ने फरवरी में योजना को ‘घोटाला’ बताया था
फरवरी 2025 में NGT ने इस योजना को 'स्कैम' करार देते हुए पाया कि पहाड़गंज के 536 में से 442 गेस्टहाउस बिना मीटर, शुल्क और किसी भी नियमन के पानी निकालते रहे। NGT ने दिल्ली के मुख्य सचिव से वित्तीय नुकसान, पर्यावरणीय क्षति और इसमें जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका की जांच के निर्देश दिए थे।
DJB ने अपनी सीमाएं बताईं
DJB ने कहा कि भूजल नियमन की जिम्मेदारी पर्यावरण विभाग, जिला स्तरीय सलाहकार समिति (DLAC), जिलाधिकारियों और केंद्रीय भूजल प्राधिकरण (CGWA) की है। 2010 की अधिसूचना के अनुसार DJB की भूमिका केवल आवेदन लेने और DLAC सचिवालय के रूप में काम करने तक सीमित है। रिपोर्ट में कहा गया है कि जुलाई 2010 की अधिसूचना में DJB और एनडीएमसी को केवल आवेदन प्रक्रिया का अधिकार दिया गया है। उन्हें दंड लगाने, कार्रवाई करने या अवैध दोहन पर कार्रवाई करने का कोई वैधानिक अधिकार नहीं दिया गया है।
अब सभी गेस्टहाउसों को मीटर लगाने का निर्देश
NGT के हालिया निर्देशों के बाद DJB ने पहाड़गंज के सभी प्रतिष्ठानों को भूजल निकासी पर मीटर लगाने के आदेश दिए हैं। अब तक 22 प्रतिष्ठानों ने अनुपालन किया, जिनमें सर्वाधिक निकासी 2.31 KLD दर्ज की गई, जो कि CGWA की 2020 नोटिस के 10 KLD की सीमा से कम है और शुल्क से मुक्त है। सरकार जो नई नीति तैयार कर रही है, इस नीति के लागू होने पर ग्राउंडवॉटर के अवैध दोहन पर प्रभावी कार्रवाई संभव होने की उम्मीद है। अभी तक कई स्तरों पर कानून और अधिकारों की कमी के कारण कार्रवाई अटकी हुई थी, जिसे यह नई नीति दूर कर सकती है।