बिजनेस

RBI ने Tata Sons को दिया झटका! Upper Layer NBFC लिस्ट में बरकरार रखा नाम, IPO पर सस्पेंस

टाटा सन्स को रिवर्ज बैंक ने बड़ा झटका दिया है। टाटा संन्स लिस्टिंग से बचने के लिए RBI से अपना NBFC लाइसेंस सरेंडर करने और खुद को अपर लेयर से बाहर करने की मांग कर रही है।

Image

टाटा सन्स को लाना पड़ सकता है आईपीओ

Tata Sons IPO RBI Upper Layer NBFC Rules : भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने गुरुवार को Tata Sons को एक बार फिर Upper Layer NBFC की सूची में बरकरार रखा है। इससे साफ संकेत मिलता है कि केंद्रीय बैंक ने अभी तक Tata Sons को NBFC ढांचे से बाहर निकलने की मंजूरी नहीं दी है। कंपनी की NBFC-Core Investment Company (CIC) का पंजीकरण रद्द करने की अर्जी फिलहाल RBI के पास विचाराधीन है। RBI ने अपने बयान में कहा कि Tata Sons का Upper Layer NBFC सूची में शामिल रहना उसकी डी-रजिस्ट्रेशन अर्जी के अंतिम फैसले से अलग है। यानी आवेदन पर अंतिम निर्णय आने तक कंपनी पर मौजूदा नियम लागू रहेंगे। RBI ने यह जानकारी गुरुवार 6 अगस्त को जारी अपने एक नोटिफिकेशन में दी है।

RBI ने क्या कहा?

केंद्रीय बैंक ने स्पष्ट किया कि Tata Sons की डी-रजिस्ट्रेशन अर्जी अभी जांच के दौर में है। इसलिए कंपनी को फिलहाल Upper Layer NBFC की सूची से बाहर नहीं किया गया है। RBI के मुताबिक, Tata Sons का इस सूची में बने रहना उसकी अर्जी पर होने वाले अंतिम फैसले को प्रभावित नहीं करेगा।

Upper Layer NBFC क्या होता है?

RBI ने बड़े और सिस्टम के लिए महत्वपूर्ण गैर-बैंकिंग वित्तीय संस्थानों (NBFC) के लिए चार स्तर वाला नियामकीय ढांचा बनाया है। इसमें Upper Layer में आने वाली कंपनियों पर सामान्य NBFC की तुलना में अधिक सख्त नियम लागू होते हैं। इन कंपनियों को पूंजी, गवर्नेंस, जोखिम प्रबंधन और नियामकीय अनुपालन से जुड़े अतिरिक्त मानकों का पालन करना पड़ता है।

5 साल तक लागू रहेंगे कड़े नियम

RBI ने दोहराया कि यदि कोई NBFC एक बार Upper Layer में शामिल हो जाती है, तो उस पर कम से कम पांच वर्षों तक कड़े नियामकीय नियम लागू रहेंगे। भले ही बाद के वर्षों में वह तय मानदंडों पर खरी न उतरे। यही वजह है कि कुछ कंपनियां इस साल पात्रता मानदंड पूरा नहीं करने के बावजूद Upper Layer सूची में बनी हुई हैं।

किन कंपनियों के नाम शामिल हैं?

इस बार RBI की Upper Layer NBFC सूची में कुल 17 कंपनियां शामिल हैं। इनमें टाटा सन्स के अलावा प्रमुख REC, पावर फाइनेंस कॉरपोरेशन (PFC), IRFC, PNB हाउसिंग फाइनेंस और सम्मान कैपिटल हैं।

Tata Sons क्यों नहीं चाहती लिस्टिंग?

Tata Sons, Tata Group की होल्डिंग कंपनी है और यह Core Investment Company (CIC) के रूप में पंजीकृत है। 31 मार्च 2026 तक कंपनी की कुल परिसंपत्तियां करीब 1.75 लाख करोड़ रुपये थीं, जो RBI की तय सीमा से काफी अधिक हैं। Upper Layer NBFC में शामिल कंपनियों को आमतौर पर तीन वर्षों के भीतर शेयर बाजार में सूचीबद्ध (Listing) होना पड़ता है। इसी अनिवार्यता से बचने के लिए Tata Sons ने अपना CIC लाइसेंस रद्द करने के लिए RBI में आवेदन किया था। कंपनी 2022 में Upper Layer सूची में आई थी और नियमों के मुताबिक 2025 तक इसकी लिस्टिंग अपेक्षित मानी जा रही थी।

Yateendra Lawaniya
यतींद्र लवानियाauthor

प्रिंट और डिजिटल मीडिया में बिजनेस एवं इकोनॉमी कैटेगरी में 10 वर्षों से अधिक का अनुभव। पिछले 7 वर्षों से शेयर बाजार, कॉरपोरेट सेक्टर और आर्थिक नीतियों से जुड़ी खबरों पर विशेष पकड़। लेखन में केवल हेडलाइन तक सीमित न रहकर आंकड़ों, नीतिगत फैसलों और कॉरपोरेट दावों के पीछे की वास्तविक तस्वीर को बैलेंस्ड और आसान शब्दों में पाठकों तक पहुंचाने का प्रयास। वर्तमान में Times Now Hindi के लिए बाजार की हर हलचल और आर्थिक घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए हैं।

और पढ़ें
End of Article